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फिर आमने सामने होंगे सरकार और विपक्ष
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Fri, 21 Nov 2014 09:10 AM IST
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हिमाचल प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र पांच से बारह दिसंबर तक धर्मशाला में होगा। धर्मशाला के तपोवन में चलने वाले इस सत्र में कुल सात बैठकें होंगी। बीच में स्थगित हुए मानसून सत्र के बाद हो रहा यह सेशन कई मायनों में अहम होगा। राज्यपाल की मंजूरी के बाद सत्र की अधिसूचना वीरवार को जारी कर दी गई है।
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इससे पहले कैबिनेट बैठक के बजाय शीतकालीन सत्र बुलाने के लिए मंत्रियों से फाइल पर ही मंजूरी ली गई। अगस्त 2014 में मानसून सत्र विपक्ष के हंगामे की वजह से बीच में ही स्थगित करना पड़ा था। मुख्यमंत्री से जुड़े मनी लॉड्रिंग मामले को लेकर भाजपा विधायकों ने सदन को नहीं चलने दिया था।
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उस दौरान कई महत्त्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा नहीं हो पाई थी। हालांकि राज्य सरकार ने बीच में विशेष सत्र भी बुलाने की बात कही थी, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। अब शीतकालीन सत्र में लोकायुक्त, टीसीपी जैसे कई अहम विधेयक सदन में रखे जा सकते हैं। सत्र के लिए विधानसभा प्रशासन ने तैयारियां भी शुरू कर दी हैं।
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शिमला के बाद धर्मशाला विधानसभा में ई विधान के जरिए सदन का कामकाज चलेगा। विधानसभा सचिव सुंदर सिंह वर्मा ने बताया कि राज्यपाल से मंजूरी के बाद ही विधानसभा के पास सत्र बुलाने के लिए प्रस्ताव आया था। इसके बाद वीरवार को अधिसूचना जारी कर दी गई है।
मंत्रियों ने किया था विरोध
धर्मशाला में सत्र बुलाने को लेकर पिछली कैबिनेट बैठक में ही कई मंत्रियों ने विरोध किया था। इनका तर्क था कि इससे सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। एक अनुमान के अनुसार एक दिन में सत्र पर करीब 20 लाख रुपये से अधिक का खर्चा आएगा। लेकिन, राजनीतिक मजबूरी के कारण सरकार के लिए शीतकालीन सत्र का आयोजन शिमला में संभव नहीं है।