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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal: 12 tree species brought by the British discovered after 100 years, included in documents

हिमाचल: अंग्रेजों की लाईं 12 पेड़ों की प्रजातियों का 100 साल बाद चला पता, दस्तावेजों में शामिल किया

Mon, 19 May 2025 10:35 AM IST
Krishan Singh सुरेश शांडिल्य, शिमला
सुरेश शांडिल्य, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Mon, 19 May 2025 10:35 AM IST
सार

 प्रदेश की राजधानी शिमला और इसके आसपास के पर्वतीय क्षेत्रों में अंग्रेजों की ओर से करीब 100 साल पहले लाई गई 12 पेड़ों की प्रजातियां गुमनामी में उगती रहीं। 

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Himachal: 12 tree species brought by the British discovered after 100 years, included in documents
पेड़ों की प्रजातियां। - फोटो : संवाद

विस्तार

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला और इसके आसपास के पर्वतीय क्षेत्रों में अंग्रेजों की ओर से करीब 100 साल पहले लाई गई 12 पेड़ों की प्रजातियां गुमनामी में उगती रहीं। अब पता चलने पर हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान शिमला और वन्य प्राणी विंग ने इनका दस्तावेजीकरण किया है। इसके चलते शिमला और आसपास चिह्नित लकड़ी वाले पेड़ों की प्रजातियां 138 से बढ़कर 150 हो गई हैं। इन 12 प्रजातियों को शिमला स्थित पश्चिमी हिमालयन टेंपरेट आर्बोरेटम में प्रदर्शन के लिए रखा गया है, जबकि यहां पर 138 प्रजातियों को संरक्षण के लिए जुटाया जा रहा है।

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हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान पंथाघाटी शिमला के वैज्ञानिक डॉ. विनीत जिश्टू ने बताया कि हेनरी कॉलेट की 1902 में लिखी पुस्तक कॉलेट फ्लोरा सिमलेंसिंस में लकड़ी वाले पेड़ों की 138 प्रजातियों का उल्लेख किया गया है। इस पुस्तक में जिन पेड़ों का उल्लेख नहीं है और जो पिछले 100 साल से शिमला व इसके आसपास के क्षेत्रों में उगाए जा रहे हैं, ऐसे पेड़ों की करीब 12 प्रजातियों को चिह्नित कर लिया गया है। अब यहां उगने वाले पेड़ों की 150 प्रजातियां हो गई हैं। इनमें से ज्यादातर प्रजातियों को शिमला में बनाए गए आर्बोरेटम में रखा जा चुका है। नई मिली 12 प्रजातियों को केवल प्रदर्शन के लिए रखा गया है। इन्हें उगाए जाने को अधिक प्राेत्साहन नहीं दिया जाता है।

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पुरानी स्थानीय प्रजातियों को उगाने की ही मुहिम चलाई जानी चाहिए। हालांकि, पुस्तक में जिन 138 प्रजातियों का उल्लेख किया गया है, उनमें से भी अभी कई लुप्त होने की स्थिति में हैं। इन्हें भी ढूंढ-ढूंढकर संरक्षित किया जा रहा है। इनमें शमशाड, लोजा या लोदर, कांगू, थुणू या थुनार जैसी प्रजातियां हैं, जो अब शिमला के आसपास उगी नजर नहीं आती हैं। इन प्रजातियों या उनके बीज को जुटाकर संरक्षित किया जा रहा है। संस्थान के निदेशक डॉ. संदीप शर्मा ने भी बताया कि हाल ही में हिमाचल प्रदेश वन विभाग के वन्य प्राणी विंग के साथ भी एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिसके तहत पश्चिमी हिमालयन टेंपरेट आर्बोरेटम की स्थापना की गई है। इसी में तमाम स्थानीय प्रजातियों को संरक्षित किया गया है।

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इन 12 प्रजातियों का दस्तावेजीकरण किया
अमेरिकन चिनार 
फारसी चिनार
इंग्लिश ओक
रोबिनिया
मीठा चेस्टनट 
सुगी पाइन
मैगनोलिया 
गिंग्को 
कैम्पबेल्स मेपल 
इटालियन सरू
चीनी थूजा
चीनी देवदार

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