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Shimla News: चरस के मामले में हाईकोर्ट के सजा बढ़ाए जाने के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

Tue, 06 Jun 2023 05:00 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 06 Jun 2023 05:00 AM IST
सार

प्रदेश हाईकोर्ट के चरस रखने के मामले में सजा बढ़ाने के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की अपील पर सशर्त नोटिस जारी किया है। 

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High Court's decision to increase sentence in Charas case challenged in Supreme Court
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के चरस रखने के मामले में सजा बढ़ाने के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की अपील पर सशर्त नोटिस जारी किया है। अदालत ने शर्त लगाई है कि आरोपी को दो हफ्ते की भीतर आत्म समर्पण करना होगा। 11 मई 2023 को हाईकोर्ट ने सरकार की अपील को स्वीकार करते हुए दो महीनों की सजा को तीन वर्ष के कठोर कारावास में तबदील किया था। इसके अतिरिक्त अदालत ने आरोपी पर 65,000 रुपये का जुर्माना लगाया था। अदालत ने आरोपी को जेल में डालने के लिए वारंट जारी करने के आदेश दिए थे। इस निर्णय को आरोपी फुकुनागा गुन ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चुनौती दी है।

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पहली अप्रैल 2019 को विशेष न्यायाधीश कुल्लू ने आरोपी को मादक पदार्थ निरोधक अधिनियम की धारा 18 और 20 के तहत दो-दो महीनों की सजा सुनाई थी। सरकार की अपील पर हाईकोर्ट ने आरोपी को धारा 18 के तहत दो वर्ष और 20 के तहत तीन वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। अदालत ने अपने निर्णय में कहा था कि निचली अदालत ने यह विचार नहीं किया कि आरोपी से चरस जब्त की गई थी। चरस की तस्करी से समाज पर बुरा असर पड़ता है। निचली अदालत ने इस पर भी विचार नहीं किया कि आरोपी के खिलाफ चरस पाए जाने के पुख्ता सुबूत हैं। 4 सितंबर 2016 को कुल्लू पुलिस ने आरोपी से 475 ग्राम चरस बरामद की थी। आरोपी के खिलाफ पुलिस ने मादक पदार्थ निरोधक अधिनियम की धारा 18 और 20 के तहत मामला दर्ज किया था।
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चेक बाउंस के आरोपी को सुनाई सजा पर सत्र न्यायाधीश ने लगाई मुहर
जिला अदालत शिमला ने चेक बाउंस के आरोपी को सुनाई सजा पर अपनी मुहर लगा दी है। इस जुर्म के लिए आरोपी सुरेंद्र को न्यायिक दंडाधिकारी चौपाल ने सात महीने की कारावास की सजा सुनाई थी। इस निर्णय को आरोपी ने सत्र न्यायाधीश शिमला की अदालत में अपील दायर की थी। अदालत ने इस अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत के निर्णय को बरकरार रखा है। आरोपी के खिलाफ चौपाल के राम लाल जिंटा ने चेक बाउंस की शिकायत दर्ज की थी। शिकायत की गई थी कि आरोपी ने 1,08,000 रुपये में सेब का ठेका लिया था। सेब की फसल उठाते हुए ठेकेदार ने केवल 10,000 रुपये दिए थे और बाकी के 98,000 रुपये के लिए उसने 49,000 रुपये के दो चेक जारी किए थे। चेक बाउंस होने पर शिकायतकर्ता ने आरोपी के खिलाफ न्यायिक दंडाधिकारी चौपाल की अदालत में शिकायत दर्ज करवाई। निचली अदालत ने पाया था कि ठेकेदार ने शिकायतकर्ता को गुमराह करने के लिए चेक जारी किया था। अदालत ने उसे इस जुर्म के लिए सात माह की कारावास और 1,10,000 रुपये का जुर्माना लगाया था। 

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