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हाईकोर्ट ने निरस्त किया एआरओ का फैसला
ब्यूरो/अमर उजाला, अंब (ऊना)
Updated Fri, 25 Dec 2015 12:40 PM IST
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विकास खंड गगरेट की ग्राम पंचायत दियोली से प्रधान पद की उम्मीदवार निशा देवी का नामांकन पत्र जाति प्रमाण पत्र के चलते रद्द करने के सहायक निर्वाचन अधिकारी के फैसले को हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया है।
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सहायक निर्वाचन अधिकारी को निशा देवी का नामांकन पत्र स्वीकार करने के साथ चुनाव लड़ने की इजाजत देने के निर्देश दिए हैं।
उधर, आमरण अनशन पर बैठे निशा देवी के जेठ अविनाश विद्रोही की कुछ मांगें प्रशासन ने मान ली हैं। एसडीएम सुनील वर्मा ने माता चिंतपूर्णी का प्रसाद खिलाकर अविनाश का अनशन तुड़वाया।
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निशा देवी का मायका पंजाब में है। वह लोहार जाति से संबंधित है। पंजाब में लोहार जाति अन्य पिछड़ा वर्ग में आती है। प्रदेश में यह जाति अनुसूचित जाति श्रेणी में आती है।
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इसके चलते स्थानीय प्रशासन ने उसे अन्य पिछड़ा वर्ग का प्रमाण पत्र जारी नहीं किया था। निशा के पास पंजाब सरकार से जारी अन्य पिछड़ा वर्ग का प्रमाण पत्र था।
इसे मानने से सहायक निर्वाचन अधिकारी ने मना कर दिया था। इसी आधार पर उसका नामांकन रद्द कर दिया था। इस पर निशा देवी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जबकि उनका जेठ अविनाश विद्रोही आमरण अनशन पर बैठ गया था।
उधर, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि निशा देवी को अन्य पिछड़ा वर्ग के ही लाभ मिलेंगे। वह चुनाव भी लड़ सकती है। सहायक निर्वाचन अधिकारी के फैसले को निरस्त कर स्पष्ट आदेश दिए कि निशा देवी को चुनाव लड़ने की इजाजत दी जाए।
स्थानीय प्रशासन ने भी अविनाश की मांग पर तहसीलदार को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। नियमों के अनुसार उसका जाति प्रमाण पत्र बनाने का भी आश्वासन दिया है।
इसके बाद एसडीएम सुनील वर्मा और नायब तहसीलदार बलदेव सरोआ ने अविनाश को मां चिंतपूर्णी का प्रसाद खिलाकर और जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया।
एसडीएम ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले की प्रति उन्हें नहीं मिली है। उसे देखकर ही वह कोई प्रतिक्रिया दे सकते हैं। अविनाश की मांग पर नियमानुसार कार्रवाई होगी।