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हाईकोर्ट का आदेश: चिंतपूर्णी में श्रावण मेलों के निर्णय पर फिर से विचार करे सरकार
Thu, 12 Aug 2021 09:39 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Thu, 12 Aug 2021 09:39 PM IST
सार
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने कोरोना महामारी से निपटने के लिए प्रदेश में अपर्याप्त सुविधाओं और बुनियादी ढांचे को उजागर करने वाली एक जनहित याचिका और अन्य याचिकाओं पर सुनवाई के पश्चात ये आदेश पारित किए।
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हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने कोरोना संक्रमण के मामलों को देखते हुए राज्य सरकार को ऊना के चिंतपूर्णी मंदिर में श्रावण मेले आयोजित करने के अपने निर्णय पर फि र से विचार करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि श्रद्धालुओं की भीड़ कोविड-19 वायरस संक्रमण के लिए उत्प्रेरक के रूप में कार्य कर सकती है। उल्लेखनीय है कि 16 अगस्त तक चलने वाले वाले मेलों को फि लहाल निलंबित करने को कहा गया है।
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न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह इस निर्णय पर यथासंभव शीघ्रता से 13 अगस्त से पहले पहले विचार करे। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने कोरोना महामारी से निपटने के लिए प्रदेश में अपर्याप्त सुविधाओं और बुनियादी ढांचे को उजागर करने वाली एक जनहित याचिका और अन्य याचिकाओं पर सुनवाई के पश्चात ये आदेश पारित किए।
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सुनवाई के दौरान कोर्ट मित्र ने कहा कि चूंकि सरकार द्वारा अपने पहले के फैसले की समीक्षा करके स्कूलों को बंद कर दिया है। इसलिए 16 अगस्त तक होने वाले मां चिंतपूर्णी सावन मेलों को भी फि लहाल के लिए निलंबित कर दिया जाए। लाखों श्रद्धालुओं के आने से कोरोना प्रोटोकॉल की अनुपालना नहीं हो पाएगी। वरिष्ठ अतिरिक्त महाधिवक्ता ने बताया कि उपायुक्त ऊना ने सोच समझकर निर्णय लिया है और यह सही मायने में मेला नहीं है, क्योंकि भक्तों को केवल मंदिर के दर्शन की अनुमति है और अन्य सभी गतिविधियों को निलंबित कर दिया गया है।
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राज्य सरकार ने न्यायालय को यह भी बताया कि अब तक 20 बच्चों की पहचान की जा चुकी है, जो कोविड -19 के कारण अनाथ हो गए हैं। यह 4 हजार रुपये प्रति माह की दर से वित्तीय सहायता के हकदार हैं। इसमें से बच्चे के भरण-पोषण के लिए पालक माता-पिता को 25 सौ रुपये प्रतिमाह और 18 वर्ष की आयु तक बच्चे के नाम पर 15 सौ रुपये प्रतिमाह आरडी के रूप में दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक बच्चा सरकार से पारिवारिक पेंशन पाने के लिए पात्र है, इसलिए उसे पालक देखभाल के तहत नहीं रखा जा सकता है और वह अपने चाचा के साथ रह रहा है।
जिला न्यायिक अदालतों का नाम बदला
वहीं, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की ओर से जारी सर्कुलर के तहत अब हाईकोर्ट को छोड़कर अन्य सभी जिला न्यायिक अदालतों को डिस्ट्रिक्ट ज्यूडिशियरी कहा जाएगा। अधीनस्थ न्यायालय की जगह इन अदालतों को ट्रायल कोर्ट कहा जाएगा। इस सर्कुलर के तहत ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास को जेएमआईसी की जगह जेएमएफसी कहा जाएगा।