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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   High court dismissed corruption case against Rajiv Bindal

हाईकोर्ट ने खारिज की राजीव बिंदल के खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़ी अपील

Thu, 19 Dec 2019 07:56 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 19 Dec 2019 07:56 PM IST
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High court dismissed corruption case against Rajiv Bindal
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल - फोटो : अमर उजाला

विधानसभा अध्यक्ष डॉ.राजीव बिंदल और अन्य के खिलाफ  भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा मामला हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। अर्की निवासी पवन ठाकुर ने याचिका दायर कर सरकार के उस निर्णय को चुनौती दी थी, जिसके तहत राजीव बिंदल और अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े मामले को वापस लेने की अनुमति दी गई थी। इनके खिलाफ आरोप था कि 30 अप्रैल, 1998 को प्रस्ताव पारित कर नगर परिषद सोलन में क्लर्कों, मीटर रीडर, ड्राइवर, कीमैन, चपरासी, क्लीनर व सफाई कर्मचारी के पद भरने को चयन कमेटी का गठन किया गया। इस कमेटी के अध्यक्ष राजीव बिंदल थे। सदस्यों में देवेंद्र ठाकुर व हेमराज गोयल थे। वे उस समय नप के पार्षद थे।

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एक अन्य सदस्य सुभाष चंद कलसोत्रा अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी सोलन थे। इनके पास कार्यकारी अधिकारी का कार्यभार था। इसके अतिरिक्त, 3 जून, 2000 को एक अन्य चयन कमेटी का गठन किया गया, जिसकी अध्यक्षता प्रधान जंगी लाल नगर परिषद सोलन ने की। उसमें पुरुषोत्तम दास चौधरी कार्यकारी अधिकारी, ललित मोहन नगर परिषद अध्यक्ष व कर्म सिंह निजी सहायक चयन कमेटी के सदस्य बनाए गए थे। इन पर आरोप था कि उन्होंने सरकार की अनुमति व हिमाचल प्रदेश नगर सेवा अधिनियम 1994 के विपरीत साक्षात्कार के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कर अयोग्य उम्मीदवारों को नौकरियां दीं।

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 सात जून, 2003 को तत्कालीन मुख्यमंत्री के ध्यान में मामला लाया गया। पुलिस अधीक्षक सतर्कता साउथ जोन शिमला के सपुर्द मामला करने के बाद जांच की गई। उप पुलिस अधीक्षक राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने जांच रिपोर्ट सौंपी। दो दिसंबर, 2016 को सरकार एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो सोलन के समक्ष सभी आरोपियों के खिलाफ  भादंसं की धारा 420, 468, 471 व 120 बी व भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 13 (1)डी व 13 (2) के तहत मामला दर्ज किया गया।

जांच के बाद अंतिम रिपोर्ट 17 जुलाई 2013 को कोर्ट के समक्ष दाखिल की गई। अभियोजन पक्ष ने 7 सितंबर, 2018 को राजीव बिंदल व अन्य आरोपियों के खिलाफ  मामला वापस लेने को विशेष जज सोलन के समक्ष आवेदन किया। स्पेशल जज सोलन ने 24 जनवरी, 2019 को अभियोजन पक्ष के आवेदन को स्वीकार करने के बाद राजीव बिंदल व अन्यों के खिलाफ  मामला वापस लेने की अनुमति दी। इस फैसले को अर्की निवासी पवन ठाकुर ने हाईकोर्ट में याचिका के माध्यम से चुनौती दी। इसे न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर ने मामले से जुड़े तमाम रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद खारिज कर दिया।

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