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निजी जमीन में पेड़ कटान पर कोर्ट का बड़ा फैसला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Sat, 06 Jun 2015 10:22 AM IST
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हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को आदेश दिए हैं कि वह किसी भी निजी भूमि के मालिक को पेड़ कटान की स्वीकृति न दे। सरकार को डिमार्केशन का कार्य भी जल्द पूरा करने को कहा। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने कांगड़ा निवासी की ओर से मुख्य न्यायाधीश के नाम लिखे पत्र पर संज्ञान लेने वाली जनहित याचिका की सुनवाई के बाद उक्त आदेश दिए।
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पत्र में आरोप लगाया है कि कांगड़ा जिले में अवैध रूप से पेड़ काटे जा रहे हैं। इसकी शिकायत आला अधिकारिओं से भी की गई, लेकिन एक भी नहीं सुनी गई। अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सरकार से जवाब मांगा था। सरकार से अदालत को बताया गया कि वनों का अवैध काटन रोकने को सरकार तत्पर है। सर्कल लेवल पर कंट्रोल रूम बनाए गए हैं।
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अदालत को बताया गया कि 2026 वन बीट में से 593 वन बीटों को अति संवेदनशील घोषित किया है। हाईकोर्ट ने वन विभाग को आदेश दिए कि संवेदनशील बीटों के पद खाली न रखे जाएं। अदालत ने सरकार को फ्रेश स्टेटस रिपोर्ट दायर करने के आदेश दिए हैं। आदेशों में कहा कि सरकार स्टेटस रिपोर्ट ने स्पष्ट करे कि आरोपिओं के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। मामले की अगली सुनवाई 23 जून को निर्धारित की गई है।
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सरकार से पूछा कितने कब्जे हटाए
एक अन्य मामले में हाईकोर्ट ने कोटखाई के चैंथला गांव और इसके आसपास के क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर सेब के बगीचे लगाने के मुद्दे पर संज्ञान लिया था। सरकार ने मामले में अपने जवाब में कहा कि इन क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा किया हुआ है।
अदालत ने सरकार को आदेश दिए कि वह दो सप्ताह के भीतर स्टेटस रिपोर्ट दायर कर अदालत को बताए कि अवैध कब्जों को हटाने के लिए क्या कदम उठाए। क्या इन क्षेत्रों की डिमार्केशन कर दी गई। कितने अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं।
अक्षम लोगों के लिए अलग से बनाएं शेल्टर होम
हाईकोर्ट ने अक्षम आश्रय रहित और घर से निकाले गए व्यक्तियों के लिए अलग से शेल्टर होम बनाने के आदेश दिए हैं। अदालत ने प्रधान सचिव सामाजिक न्याय और अधिकारिता को आदेश दिए हैं कि वह आठ सप्ताह के भीतर शेल्टर होम बनाने को आवश्यक धन मुहैया करवाएं।
उमंग फाउंडेशन की ओर से ऐसे लोगों का मुद्दा उठाए जाने पर अदालत ने बसंतपुर ओल्ड ऐज होम में रह रहे अक्षम लोगों के लिए ओल्ड ऐज पेंशन देने के लिए तीन माह का समय दिया है। अदालत ने कल्याण विभाग के निदेशक को आदेश दिए हैं कि वह बसंतपुर, दाड़ी धर्मशाला और भंगरोटू स्थित ओल्ड ऐज होम का निरीक्षण करें।