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शिमला: आपराधिक मामलों में सबूतों से छेड़छाड़ पर हाईकोर्ट ने मांगी सैंपलों की संख्या

Thu, 03 Mar 2022 11:16 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 03 Mar 2022 11:16 PM IST
सार

विभिन्न आपराधिक मामलों में सबूतों से छेड़छाड़ का मामला उजागर करने पर हाईकोर्ट ने राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला जुन्गा, रेंज फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला धर्मशाला और मंडी में लंबित नमूनों की कुल संख्या बताने के आदेश दिए हैं।

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High court asked for number of samples on tampering of evidence in criminal cases
हाईकोर्ट हिमाचल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विभिन्न आपराधिक मामलों में सबूतों से छेड़छाड़ का मामला उजागर करने पर हाईकोर्ट ने राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला जुन्गा, रेंज फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला धर्मशाला और मंडी में लंबित नमूनों की कुल संख्या बताने के आदेश दिए हैं। सरकार को इन प्रयोगशालाओं की ओर से जांच एजेंसियों से प्राप्त नमूनों की रिपोर्टिंग के लिए लगने वाले औसत समय का उल्लेख करने को भी कहा है। प्रयोगशालाओं के कर्मचारियों की संख्या, रिक्त पदों, खराब मशीनों के बारे में सूचित करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने पूछा कि उच्च न्यायालय की ओर से इससे संबधित जारी निर्देशों और डॉ. एमएस राव, तत्कालीन निदेशक, सह मुख्य फोरेंसिक वैज्ञानिक, गृह मंत्रालय भारत सरकार की सिफारिशों की अनुपालना की गई है और शेष निर्देशों की अनुपालना के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने नेहा स्कॉट की याचिका की सुनवाई के बाद यह आदेश दिए। 

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याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि अपराध स्थल पर भौतिक साक्ष्यों को एकत्र करने और सील करने की प्रक्रिया वर्तमान में आधुनिक समय के अनुसार उच्च स्तर की नहीं है। कपड़े और मोम में साक्ष्य भेजना पुरातन तरीका है। इसे समाप्त करने की आवश्यकता है। किसी भी आपराधिक मामले की जांच समाज में आपराधिक न्याय की रीढ़ है, इसलिए सबूत हासिल करने और एकत्र करने के लिए उचित रूप से पैक, सील और लेबल किया जाना चाहिए। आरोप लगाया है कि ऐसे कई आपराधिक मामले हुए हैं, जिनमें मामले से जुड़े अधिकारियों द्वारा सबूतों के साथ छेड़छाड़ किए जाने के कारण मामले की भावना कम हुई है। मामले को अगली सुनवाई 30 मार्च को होगी। 

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