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राजकीय अध्यापक संघ: कर्मचारियों के एनपीएस के 12 हजार करोड़ रुपये जल्द जारी करे केंद्र सरकार

Tue, 06 Jan 2026 12:12 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 06 Jan 2026 12:12 PM IST
सार

शिमला में प्रेस वार्ता में संघ के राज्य अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान और महासचिव तिलक नायक ने कहा कि प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों की नई पेंशन योजना (एनपीएस) के तहत जमा की गई लगभग 12,000 करोड़ की राशि अभी भी केंद्र सरकार के स्तर पर लंबित है।

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hgtu: Central govt should soon release Rs 12,000 crore for NPS of employees.
संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजकीय अध्यापक संघ ने केंद्र सरकार से एनपीएस का 12 हजार करोड़ जल्द जारी करने की मांग की है। शिमला में प्रेस वार्ता में संघ के राज्य अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान और महासचिव तिलक नायक ने कहा कि प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों की नई पेंशन योजना (एनपीएस) के तहत जमा की गई लगभग 12,000 करोड़ की राशि अभी भी केंद्र सरकार के स्तर पर लंबित है। उन्होंने कहा कि यह विषय कर्मचारियों के भविष्य, सामाजिक सुरक्षा तथा विश्वास से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ है, जिस पर शीघ्र, संवेदनशील एवं सकारात्मक निर्णय लिया जाना अत्यंत आवश्यक है। राज्य सरकार की ओर से ओल्ड पेंशन स्कीम (ओपीएस) लागू किए जाने के बाद यह स्वाभाविक अपेक्षा है कि कर्मचारियों एवं राज्य सरकार के अंशदान से संबंधित इस राशि के विषय में केंद्र सरकार द्वारा स्पष्ट निर्णय लिया जाएगा, ताकि कर्मचारियों की आशंकाओं का समाधान हो सके। हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ के राज्य अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान और महासचिव तिलक नायक ने कहा कि यह विषय किसी भी प्रकार से राजनीतिक नहीं है, बल्कि यह पूर्णतः कर्मचारियों के हित, भविष्य एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा हुआ मुद्दा है।

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संघ केंद्र सरकार से विनम्र आग्रह करता है कि आपसी संवाद, सहयोग एवं सहमति के माध्यम से एनपीएस की लंबित राशि के संबंध में शीघ्र समाधान निकाला जाए। उन्होंने कहा कि जिन कर्मचारियों के दो वर्ष की सेवा पूर्ण हो चुकी है, उन्हें वर्ष में दो बार नियमित किया जाए। हाल ही में पदोन्नत हुए प्रधानाचार्यों को शीघ्र स्टेशन आवंटित किए जाएं।  प्रधानाचार्य पदोन्नति से वंचित रह गए पात्रों के लिए एक सप्लीमेंट्री सूची जारी की जाए। कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस योजना के साथ मेडिकल अलाउंस को ओपन करने का विकल्प पुनः बहाल किया जाए। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा ली जा रही लेट फीस एवं पेनल्टी को समाप्त किया जाए। नया वेतन आयोग केंद्र सरकार की तर्ज पर हिमाचल प्रदेश में भी शीघ्र लागू किया जाए।   उन्होंने कहा कि हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ को पूर्ण विश्वास है कि केंद्र एवं राज्य सरकारें इन सभी विषयों को गंभीरता से लेते हुए कर्मचारियों के हित में उचित, न्यायसंगत एवं संवेदनशील निर्णय लेंगी।

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एसएमसी अध्यापकों को शीघ्र दिया जाए वेतन
 प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों के विद्यालयों समेत सीनियर सेकेंडरी विद्यालयों में तैनात स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) के तहत रखे सैकड़ों अध्यापकों को वेतनमान नहीं मिला है। जनजातीय क्षेत्रों के अध्यापकों को अक्तूबर, नवंबर और दिसंबर का वेतनमान नहीं मिल पाया है। शिक्षकों का कहना है कि जिला चंबा में गत वर्ष भी उनके सामने यही समस्या पैदा हुई थी, लेकिन उस समय किसी दूसरे जिले के पास सरप्लस बजट था, जिसे चंबा को ट्रांसफर करके देर-सवेर उनकी तनख्वाह मिल गई। इस वर्ष ऐसी भी कोई उम्मीद नजर आ रही। ऐसे में ये शिक्षक सरकार से यह सवाल पूछ रहे हैं कि पीरियड आधारित पॉलिसी होने के बावजूद भी जब वे सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक विद्यालयों में सेवाएं दे रहे हैं। अपना विषय पढ़ाने के बाद खाली पड़े अध्यापकों के पदों वाले विषयों को भी पढ़ा रहे हैं और साथ ही साध सरकार के सभी प्रकार के कार्यक्रमों में अपनी भूमिका भी निभा रहे हैं। सरकार क्यों लगातार इन अध्यापकों के प्रति अपना दायित्व भूल जाती है। एक वर्ष में ये अध्यापक केवल 11 महीनों का ही वेतन लेते हैं और वे भी जब समय पर नहीं पाए तो फिर इनकी क्या स्थिति होगी। उधर, एसएमसी शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष हरीश ने एसएमसी शिक्षकों को जल्द वेतनमान प्रदान करने समेत एलडीआर की अधिसूचना जारी करने की मांग की है। 

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अनुबंध कर्मियों के नियमितीकरण में भेदभाव नहीं करे प्रदेश सरकार 
हिमाचल प्रदेश संयुक्त कर्मचारी महासंघ (एचपीएसकेएमएस) ने प्रदेश सरकार से अनुबंध कर्मचारियों के नियमितीकरण में हो रहे भेदभाव को खत्म करने की मांग उठाई है। महासंघ ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को इसे लेकर पत्र लिखा है। महासंघ के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान और महासचिव हीरालाल वर्मा ने बताया कि वर्ष में एक बार मार्च माह में नियमितीकरण की व्यवस्था से समान परिस्थितियों में कार्यरत अनुबंध कर्मचारियों के साथ भेदभाव हो रहा है। 2 दिसंबर 2023 से पहले प्रदेश सरकार कैलेंडर वर्ष में दो बार मार्च और सितंबर में अनुबंध कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित करती थी। इससे नियुक्ति की तिथि में अंतर के कारण उत्पन्न होने वाला भेदभाव काफी हद तक समाप्त हो जाता था। हालांकि अब नीति में संशोधन कर नियमितीकरण को वर्ष में केवल एक बार मार्च माह तक सीमित कर दिया गया है। इससे मार्च के तुरंत बाद आवश्यक दो वर्ष की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों विशेषकर अप्रैल या उसके बाद नियुक्त हुए कर्मियों को लगभग तीन वर्ष तक नियमितीकरण के लिए इंतजार करना पड़ता है। वहीं फरवरी या मार्च में नियुक्त कर्मचारियों को दो वर्ष पूरा होते ही नियमितीकरण का लाभ मिल जाता है। महासंघ का कहना है कि यह अंतर केवल नियुक्ति माह के आधार पर है, जिस पर कर्मचारियों का कोई नियंत्रण नहीं होता। महासंघ ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन बताते हुए कहा कि यह प्राकृतिक न्याय और समानता के सिद्धांतों के भी विपरीत है। पत्र में मांग की गई है कि सरकार वार्षिक व्यवस्था की समीक्षा कर मासिक आधार पर नियमितीकरण की प्रणाली अपनाए, ताकि जैसे ही कोई संविदा कर्मचारी निर्धारित सेवा अवधि पूरी करे, उसे नियमित किया जा सके, चाहे माह कोई भी हो।

दो साल पूरे करने वाले हों नियमित
महासंघ ने यह भी आग्रह किया है कि जिन अनुबंध कर्मचारियों ने पहले ही दो वर्ष की सेवा पूरी कर ली है, उन्हें बिना किसी अतिरिक्त देरी के नियमित किया जाए। महासंघ को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से प्रदेश में संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया में न्याय बहाल होगा और हजारों कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा।

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