High Court: एचआरटीसी बसों में महिलाओं को 50 फीसदी किराये में छूट के मामले की सुनवाई एक अगस्त को
हिमाचल हाईकोर्ट के न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ के समक्ष इस मामले को सूचीबद्ध किया गया था। राज्य सचिव परिवहन और निदेशक परिवहन ने इस मामले में बुधवार को हाईकोर्ट में शपथपत्र दायर किया है।
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हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम की बसों में महिलाओं के लिए किराये में 50 फीसदी छूट देने के मामले की सुनवाई एक अगस्त को होगी। हिमाचल हाईकोर्ट के न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ के समक्ष इस मामले को सूचीबद्ध किया गया था। राज्य सचिव परिवहन और निदेशक परिवहन ने इस मामले में बुधवार को हाईकोर्ट में शपथपत्र दायर किया है। शपथपत्र में अदालत को अवगत कराया गया कि महिलाओं को बस किराये में 50 फीसदी छूट देने से परिवहन निगम को 60 करोड़ का घाटा उठाना पड़ेगा। इसकी भरपाई सरकार की ओर से की जाएगी। निगम ने 30 मार्च, 2022 तक 221 करोड़ का रोड टैक्स अदा नहीं किया है।
महिलाओं को बस किराये में छूट देने वाला निर्णय मंत्रिमंडल का है। किराये में छूट के लिए निगम की ओर से सरकार को प्रस्ताव भेजा गया था। मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद सरकार ने महिलाओं को किराये में यह छूट देने का निर्णय लिया है। याचिकाकर्ता निजी बस ऑपरेटर संघ ने आरोप लगाया है कि सरकार की ओर से गत 7 जून, 2022 को जारी की गई अधिसूचना कानून के सिद्धांतों के विपरीत है। महिलाओं और पुरुषों के लिए बराबर किराया होना चाहिए। परिवहन निगम की ओर से ग्रीन कार्ड जारी करने को भी उच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दी गई है। दलील दी गई है कि निगम के ग्रीन कार्ड जैसी सुविधाएं देने की वजह से उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है।
हाईकोर्ट ने दिए दो भूतपूर्व सैनिकों को पुलिस में नियुक्ति देने के आदेश
वहीं, प्रदेश हाईकोर्ट ने दो भूतपूर्व सैनिकों को पुलिस की नौकरी के लिए नियुक्ति पत्र जारी करने के आदेश दिए हैं। हिमाचल में पुलिस विभाग ने कांस्टेबल की भर्ती की थी। पूर्व हवलदार राजीव शर्मा व मनीष कुमार को पुलिस भर्ती से उचित लंबाई न होने के कारण बाहर कर दिया था। मुख्य न्यायाधीश एए सैयद और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किए। अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं को उस दिन से नियुक्ति और वरिष्ठता दी जाए, जिस दिन से समकक्ष अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी गई है।
याचिकाकर्ताओं ने पूर्व सैनिक कोटे से पुलिस भर्ती के लिए आवेदन किया था। भर्ती के दौरान उनकी लंबाई पांच फीट छह इंच पाई गई। पर्याप्त लंबाई न होने के कारण उन्हें भर्ती से बाहर कर दिया गया था। याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई थी कि सेना के रिकॉर्ड में उनकी लंबाई पांच फीट 6.5 इंच दर्ज गई है। लंबाई के आधार पर उन्हें पुलिस भर्ती से बाहर करना वास्तविकता से परे है। अदालत ने मामलों की सुनवाई के दौरान पाया कि भारतीय सेना के भर्ती नियम और इसकी प्रक्रिया कड़ी होती है। याचिकाकर्ताओं की लंबाई के बारे में सेना के दस्तावेजों पर अंगुली नहीं उठाई जा सकती है।