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औचक निरीक्षण में दंग रह गए स्वास्थ्य मंत्री, जांच के आदेश

Mon, 19 Feb 2018 12:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, दाड़लाघाट (सोलन)
अमर उजाला ब्यूरो, दाड़लाघाट (सोलन) Updated Mon, 19 Feb 2018 12:47 PM IST
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Health minister Vipin Parmar surprise visit and checked 108 ambulance

स्वास्थ्य महकमे की 108 एंबुलेंस सेवा में ऑक्सीजन समेत इमरजेंसी से संबंधित तमाम जीवन रक्षक व्यवस्थाओं के दावे स्वास्थ्य मंत्री के औचक निरीक्षण में हवा साबित हो गए। सोलन जिले के दाड़लाघाट के नजदीक स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार ने एंबुलेंस का औचक निरीक्षण किया तो दंग रह गए।

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एंबुलेंस में एक भी ऑक्सीजन सिलिंडर नहीं था। कुछ इंजेक्शन को छोड़ दवाएं भी नहीं मिलीं। इससे नाराज मंत्री ने एंबुलेंस संचालक कंपनी को नोटिस जारी करने के निर्देश जारी कर दिए। महकमे को दो दिन के भीतर इस मामले की रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
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दरअसल स्वास्थ्य मंत्री को एक दिन पूर्व ही 108 एंबुलेंस सेवा में दी जा रही सुविधाएं गिनाई गईं थीं। उन्हें बताया गया था कि एंबुलेंस में 31 प्रकार की जेनेरिक दवाएं, 21 तरह के औजार, दो ऑक्सीजन सिलिंडर और तीन स्ट्रेचर उपलब्ध रहते हैं।
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यह इंतजाम किसी भी आपात स्थिति में मरीज के लिए जीवन रक्षक साबित होते हैं। इन्हीं दावों का सच जानने के लिए मंत्री ने दाड़लाघाट के नजदीक 108 एंबुलेंस नंबर एचपी63-4288 का औचक निरीक्षण किया।

मंत्री जब बताई गईं सुविधाओं की टोह लेने पर लगे तो दंग रह गए। सामान तो नजर नहीं आया, लेकिन एंबुलेंस के भीतर धूल की परत जमी हुई मिली। उन्होंने मौके से ही विभाग के विशेष सचिव को फोन कर जीवीके कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए।

साथ ही दो दिन में रिपोर्ट तलब की। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि यदि कंपनी के जवाब से विभाग संतुष्ट न हुआ तो टेंडर रद्द करने पर भी प्रदेश सरकार विचार कर सकती है। लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ को किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

स्वास्थ्य योजनाओं में देरी पर मंत्री तल्ख

Health minister Vipin Parmar surprise visit and checked 108 ambulance

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री विपिन सिंह परमार ने संबंधित विभागों को राज्य के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में चल रहे निर्माण और रखरखाव के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि निर्माणाधीन परियोजनाएं समयबद्ध पूरी की जानी चाहिए और विलंब को गंभीरतापूर्वक लिया जाएगा।

परमार बीते शनिवार को देर शाम शिमला में स्वास्थ्य संस्थानों के निर्माण, विस्तार और सुधार को लेकर आयोजित उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक रात्रि 10 बजे तक चली और राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं पर विस्तारपूर्वक चर्चा व समीक्षा की गई। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने प्रस्तुतियों के माध्यम से निर्माणाधीन कार्यों की स्थिति और विभागीय गतिविधियों के बारे में मंत्री को अवगत करवाया।

मंत्री को कहा गया कि बिलासपुर में 50 बिस्तरों के अस्पताल के लिए स्थल का चयन कर लिया गया है और इसके लिए 6 करोड़ रुपये की दो किस्तें लोक निर्माण विभाग को जारी कर दी गई हैं। कांगड़ा जिले के टांडा में 40 करोड़ रुपये की लागत के 200 बिस्तरों के स्वीकृत स्वास्थ्य संस्थान के लिए 10 करोड़ की राशि जारी की जा चुकी है। मंत्री ने इसके निर्माण में देरी पर चिंता जताई और संबंधित विभाग को निर्माण कार्य शीघ्र आरंभ करने को कहा। 

परमार ने कहा कि राज्य सरकार आशा वर्करों के लिए बीमा योजना पर विचार कर रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री मातृत्व योजना के तहत गर्भवती महिला को प्रसव के बाद अस्पताल से घर तक पहुंचाने और तीन बार टीकाकरण के लिए निशुल्क एंबुलेंस सेवा देने का केंद्र से आग्रह किया।

प्रधान सचिव स्वास्थ्य प्रबोध सक्सेना ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत विभिन्न घटकों में धनराशि का समयबद्ध और समुचित उपयोग कर इसकी रिपोर्ट समय पर भारत सरकार को प्रस्तुत करने को कहा।

विशेष सचिव स्वास्थ्य एवं  निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन पंकज राय, निदेशक स्वास्थ्य डॉ. बलदेव ठाकुर, प्राचार्य आईजीएमसी डॉ. अशोक शर्मा, लोक निर्माण विभाग, बीएसएनएल, एचपीएसआईडीसी के वरिष्ठ अधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।

पिछले एक साल के दौरान आयोजित शिविरों की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश 
मंत्री ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत कार्यक्रम कार्यान्वयन योजना (पीआईपी) की समीक्षा भी की। उन्होंने इस संबंध में विभाग से पिछले एक वर्ष के दौरान आयोजित शिविरों की रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा।

उन्होंने कहा कि पीआईपी कार्यक्रम पर विधायकों के लिए भी शिविर का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने सूचना, शिक्षा व संचार (आईईसी) को अधिक तवज्जो देने को कहा। उन्होंने कहा कि योजना के तहत भारत सरकार को मंजूरी के लिए वर्ष 2018-19 के लिए 539 करोड़ रुपये की योजनाएं प्रस्तावित की हैं।

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