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प्राइवेट स्कूलों के सामने सरकारी सिलेबस फेल

Thu, 27 Nov 2014 10:36 AM IST
Updated Thu, 27 Nov 2014 10:36 AM IST
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govt school syllabus lacks major topics as comparison to private school.

बेशक! प्रदेश सरकार हिमाचल में शिक्षा का स्तर अन्य राज्यों के मुकाबले संतोषजनक होने का दम भरती हों, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। हिमाचल में सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के सिलेबस में ही अंतर नहीं है, बल्कि प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाने के तरीके भी अपेक्षाकृत बेहतर और स्तरीय पाए गए।

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प्राइवेट स्कूलों में पहली से पांचवीं तक की बेसिक शिक्षा की बात करें तो नर्सरी और केजी से ही इंग्लिश में पढ़ाई शुरू होती है, जबकि सरकारी स्कूलों में दूसरी के बाद इंग्लिश विषय शुरू होता है। सर्वशिक्षा अभियान से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के 16 हजार स्कूलों में से मात्र 100 स्कूलों में पहली से पांचवीं तक की पढ़ाई इंग्लिश मीडियम में हो रही है।
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इन स्कूलों ने भी अपने स्तर पर इंग्लिश में पढ़ाना शुरू किया है। हैरानी की बात यह है कि इन स्कूलों को इंग्लिश मीडियम के किताबें तक विभाग से उपलब्ध नहीं होती थीं।
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कमी सिलेबस में नहीं इंप्लीमेंटेशन में है

govt school syllabus lacks major topics as comparison to private school.

अगले सत्र के लिए विभाग ने यह सुनिश्चित अवश्य करवा दिया है कि सभी स्कूलों को किताबें मुहैया करवाई जाएं। इसके लिए स्कूल शिक्षा बोर्ड से किताबों के प्रकाशन को लेकर औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। सरकार और विभाग प्रदेश में इंग्लिश मीडियम में पढ़ाई शुरू करने को लेकर कितने गंभीर हैं, इसका पता मौजूदा स्थिति से चल जाता है।

वहीं प्रारंभिक शिक्षा विभाग के पूर्व निदेशक बीएम नैन्टा का कहना है कि सरकारी स्कूलों के सिलेबस में कमी नहीं है, समस्या इसे इंप्लीमेंट करने में है। एचपी बोर्ड का सिलेबस भी लगभग वही है, जो एनसीईआरटी का है। सिलेबस में बदलाव से ज्यादा मौजूदा सिलेबस को इंप्लीमेंट करने की अधिक आवश्यकता है।

सिलेबस एक जैसा नहीं हुआ तो सरकारी स्कूल पिछड़े रहेंगे

govt school syllabus lacks major topics as comparison to private school.

हिमाचल शिक्षा सुधार एवं विकास मंच के रिटायर्ड शिक्षक एवं अध्यक्ष पीआर सांख्यान ने कहा कि प्राइवेट स्कूलों और सरकारी स्कूलों में पढ़ाई में बहुत अंतर है। जब तक दोनों का सिलेबस एक जैसा नहीं होगा, सरकारी स्कूलों के बच्चे पीछे ही रहेंगे। सरकारी स्कूलों में भी इंग्लिश में पढ़ाई पहली से ही शुरू होनी चाहिए।

सर्व शिक्षा अभियान (हिमाचल प्रदेश) के निदेशक घनश्याम चंद का कहना है कि पहली से पांचवीं तक के सिलेबस को रिवाइज कर दिया गया है। इसमें कई सुधार किए गए हैं। शिक्षा में सुधार एक निरंतर प्रोसेस है, जो पहले भी होते रहे हैं और आगे भी होते रहेंगे। सरकार भी प्रदेश में शिक्षा के स्तर को और बढ़ाने के लिए प्रयासरत है।

सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की जवाबदेही फिक्स नहीं

govt school syllabus lacks major topics as comparison to private school.

हिमाचल प्रदेश प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के महासचिव रवि अजटा ने कहा कि प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से जुड़े करीब 3 हजार प्राइवेट स्कूलों में भी एनसीईआरटी का ही सिलेबस पढ़ाया जाता है।

हमारे यहां मैनेजमेंट बहुत स्ट्रांग है। शिक्षकों की जिम्मेवारियां फिक्स हैं। जो शिक्षक जिस विषय में विशेषज्ञता रखता है, उनसे वही विषय पढ़ाए जाते हैं। सरकारी स्कूलों में तो शिक्षकों की जवाबदेही भी फिक्स नहीं है।

‘शिक्षा का सच’ को लेकर किसी भी तरह का सुझाव और कमियों को लेकर
97360-10280, 94181-10002 पर सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक संपर्क कर सकते हैं।

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