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तीसरी की इंग्लिश 5वीं में पढ़ा रहे सरकारी स्कूल

Sat, 29 Nov 2014 11:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Sat, 29 Nov 2014 11:24 AM IST
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govt school syllabus lacks major topics as comparison to private school.

हिमाचल प्रदेश में सरकारी स्कूलों और प्राइवेट स्कूलों में शिक्षा के स्तर के अंतर को पाटना विभाग के लिए आसान काम नहीं है। आईसीएसई बोर्ड के थर्ड क्लास के बच्चे जो इंग्लिश तीसरी में पढ़ चुके हैं, वह सरकारी स्कूल के बच्चे पांचवीं में पढ़ रहे हैं।

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निबंध राइटिंग, लेटर राइटिंग, नेशनल सिंबल, ग्रामर (प्रारंभिक स्तर) जैसी बेसिक इंग्लिश आईसीएसई बोर्ड के बच्चे तीसरी में पढ़ चुके हैं, लेकिन सरकारी स्कूल में पांचवीं कक्षा के बच्चों को प्रोग्रेसिल इंग्लिश में इसका कु छ ही अंश पढ़ने के मिल रहा है।
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इसमें भी कुछ सामान्य कहानियां, कविताएं, लेटर राइटिंग और लोकल फेयर के बारे में चैप्टर दिए गए हैं। इसी तरह हिंदी विषय की बात करें तो प्राइवेट स्कूलों में पांचवीं कक्षा में दो किताबें हैं। इनमें एक हिंदी की पुस्तक, जिसमें करीब 16 अध्याय हैं और एक व्याकरण है।
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जबकि संज्ञा, सर्वनाम,  विश्लेषण जैसे सामान्य व्याकरण तीसरी में ही पढ़ाया जा चुका है। उधर, सरकारी स्कूलों में हिंदी की किताब में 24 अध्याय हैं, लेकिन इसमें व्याकरण को लेकर कोई जिक्र नहीं किया गया है। यह अंतर इन दो प्रमुख विषयों में ही नहीं सभी विषयों के सिलेबस में है। बड़ी बात यह है कि आईसीएसई में हर साल प्रत्येक क्लास का सिलेबस बदलता है।  

जागरूक पाठकों की ओर से आए सुझाव
- परीक्षा में शिक्षक और स्टाफ की ओर से करवाई जाने वाली नकल पर लगे लगाम
- शिक्षक नेताओं से न लिए जाए सुधार संबंधी किसी तरह के सुझाव।
- पढ़ाई और रिजल्ट को लेकर शिक्षकों की जिम्मेवारियां हों निर्धारित  
- प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों की संख्या बढ़ाई जाए
- सेशन के बीच शिक्षकों के स्थानांतरण पर लगे पूर्ण प्रतिबंध
- राजनीतिक हस्तक्षेप कम हो तो शिक्षा में आएगा स्वयं सुधार
- शैक्षणिक सत्र के मध्य पाठ्यक्रमों में न हो बदलाव
- शिक्षकों के लिए हो एक ही तरह का टेस्ट
- स्कूल मुखिया के पदों को खाली न रखा जाए।
- सतत समग्र मूल्यांकन और गैर शैक्षणिक कार्यों का अतिरिक्त बोझ हटे।

अमर उजाला को ये सुझाव हमीरपुर के समाजसेवक अनुराग ठाकुर, नालागढ़ से पूर्व शिक्षक राकेश कुमार, करसोग से लाल सिंह, शिमला से रमा कुमारी, नाहन से राजकुमार, कुल्लू से पूर्व प्रोजेक्ट ऑफिसर घनश्याम सूरी सहित तीन सरकारी और दो प्राइवेट स्कूलों के प्रिंसिपलों ने दिए हैं।

‘शिक्षा का सच’ को लेकर किसी भी तरह का सुझाव और कमियों को लेकर 97360-10280, 94181-10002 पर सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक संपर्क कर सकते हैं।

एक होना चाहिए सिलेबस
प्रदेश में जितने भी स्कूल हैं, सबका सिलेबस एक जैसा होना चाहिए। सरकार को इस बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए। प्राइवेट स्कूलों के मुकाबले सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की मॉनिटरिंग नहीं होती है।

 पीआर सांख्यान, हिमाचल शिक्षा सुधार एवं विकास मंच

एनसीईआरटी को फोलो करते हैं

आईसीएससी बोर्ड बहुत एडवांस चलता है। हम उन्हें नहीं एनसीईआरटी को फोलो करते हैं। नेशनल करिकुलम आफ फ्रेमवर्क की गाइडलाइंस के तहत सिलेबस तैयार किया जाता है।
घनश्याम चंद, डायरेक्टर सर्व शिक्षा अभियान

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