आउटसोर्स कर्मियों के नियमितीकरण में फंसा ये पेच, लटक गई पॉलिसी
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आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण में कानूनी पेच नहीं सुलझ रहा है। मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद नियमितीकरण पॉलिसी कानूनी अड़चनों के चलते लटक गई है। इस संबंध में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का कहना है कि आउटसोर्स कर्मियों के लिए सरकार पॉलिसी बनाते हुए तकनीकी पहलुओं को देख रही है।
इसके चलते देरी हो रही है। मुख्यमंत्री ने फरवरी माह में इसकी घोषणा की थी कि सरकार एक माह में नीति लेकर आएगी। अब मामला कानूनी पचड़ों में घिरने से सरकार के गले की फांस बनता दिख रहा है। विधानसभा चुनाव के लिहाज से आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित करने की नीति बेहद अहम है।
सरकार की मंशा जल्द से जल्द लागू करने की थी, लेकिन अब कई कानूनी और तकनीकी दिक्कतों के चलते नीति अधर में लटक गई है। सूत्रों की माने तो सरकार आउटसोर्सिंग को पहले संविदा कर्मचारियों में परिवर्तित कर उनके नियमितीकरण का रास्ता खोलना चाहती है। इसका लाभ देने के लिए आउटसोर्सिंग पर तैनात कर्मचारी के कार्यकाल की न्यूनतम समय अवधि तय होनी है।
तो कैसे दी जाए राहत
उस अवधि को पूरा करने वालों को संविदा में परिवर्तित किया जाएगा। हालांकि इसमें कई कानूनी दिक्कतें है। जिन राज्यों ने आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित किए जाने की नीति तैयार की वह अदालत के निर्णयों से लटक गई हैं। हिमाचल प्रदेश जिस पंजाब के आउटसोर्स कर्मचारी कल्याण बिल 2016 को आधार बना रहा है, उसको भी हाईकोर्ट से झटका लग चुका है।
उधर, वित्त विभाग ने अपना परामर्श नकारात्मक दिया है, जबकि विधि विभाग को परामर्श के लिए फाइल अभी नहीं भेजी गई है। आउटसोर्सिंग की नीति में होने वाली देरी को लेकर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने बताया कि आउटसोर्सिंग पर रखे कर्मचारियों को लेकर सरकार नीति लेकर आ रही है, लेकिन यह इतना सरल नहीं है। कई तकनीकी पहलुओं को देखा जा रहा है, जिससे बाद में कानूनी दिक्कतों से बचा जाए। सरकार सभी संभावनाओं को तलाश रही है।
सरकार आउटसोर्सिंग कर्मियों को नियमित करना का कानूनी समाधान तलाश रही है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ का उमा देवी बनाम कर्नाटक सरकार वाद में दिया फैसला सबसे बड़े रोड़ा है। चुनाव के चलते सरकार किसी भी तरह से आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को राहत देना चाहती है। अगर सरकार नीति नहीं ला पाई तो उनको बड़े कर्मचारी वर्ग का विरोध झेलना पड़ सकता है। ऐसे में आउटसोर्स कर्मचारियों को फौरी राहत देने के लिए उनका मानदेय को रिवाइज करने पर भी विचार चल रहा है।