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टीसीपी विधेयक को लेकर राजभवन बैकफुट पर, ये हैं कारण

Sat, 26 Nov 2016 09:48 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Sat, 26 Nov 2016 09:48 AM IST
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Governor House at Backfoot on TCP Bill in himachal.

राजभवन टीसीपी संशोधन विधेयक पर कोई असंवैधानिक फैसला लेना नहीं चाहता। इसलिए तमाम  दबावों के बावजूद राजभवन बैकफुट पर है। यह मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। राजभवन कोर्ट के फैसला का इंतजार कर रहा है।

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उधर, सूबे के बहुसंख्यक नागरिक भी इस प्रस्तावित कानून के खिलाफ हैं। टीसीपी विधेयक को मंजूर करने के लिए मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल, शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा और स्थानीय विधायक सुरेश भारद्वाज राजभवन दस्तक दे चुके हैं।
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राज्यपाल से मिलकर सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ने विधेयक को मंजूरी देने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है। टीसीपी संशोधन विधेयक को मंजूरी देने की गेंद राजभवन के पाले में है। सूत्र बताते हैं कि विधेयक को लेकर राजभवन पर जबरदस्त दबाव है।
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गुरुवार को सीएम ने बंद कमरे में राज्यपाल से मुलाकात की। राज्यपाल ने विधेयक को लेकर अपनी मजबूरी सीएम के सामने बयान की। टीसीपी पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी बिल विधानसभा से पास होने के बाद की। इसलिए भी राजभवन की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। उधर कई स्वयं सेवी संगठन  बिल के कानून बनने के बाद उसे चुनौती देने को तैयार बैठे हैं।

30 हजार लोगों ने किया है अवैध भवनों का निर्माण

Governor House at Backfoot on TCP Bill in himachal.

हिमाचल में अवैध भवन मालिकों से ज्यादा उन लोगों के भवनों की संख्या ज्यादा है, जिन्होंने टीसीपी और नगर निगम के नियमों के तहत भवनों का निर्माण किया है। ये लोग लगातार इस विधेयक का विरोध कर रहे है।

हिमाचल में 30 हजार के करीब लोगों ने अवैध भवनों का निर्माण किया है। इनमें सबसे ज्यादा अवैध भवनों की संख्या शिमला में है। धर्मशाला, कुल्लू, हमीरपुर, सोलन, मनाली में भी इनकी संख्या काफी है। प्रदेश सरकार ने जब से विधानसभा से टीसीपी संशोधन विधेयक पास किया है।

इस बीच, हिमाचल में करीब 8 हजार लोगों ने डेबिएशन की है। जिन भवन मालिकों की दो अवैध मंजिला भवन था, उन्होंने 5 से 6 मंजिला भवन बना दिया है। लोगों ने सेटबैक नहीं छोड़े हैं। ऐसे स्थानों पर भवनों का निर्माण कर दिया है, जहां जमीन 90 डिग्री एंगल में है।

राजनीतिक एजेंडे में शामिल होता है अवैध भवन को नियमित करना
हिमाचल में चाहे सरकार कांग्रेस की हो या फिर भाजपा की रही हो। हर बार पार्टियों के एजेंडे में अवैध भवनों को नियमित करने का मामला होता है। यही नहीं, नगर निगम के चुनाव में भी इसे एजेंडे में शामिल किया जाता है।

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