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ICAR नहीं अब यहां होगा नए कुलपतियों पर अंतिम फैसला

Mon, 08 Aug 2016 10:28 AM IST
सुरेश शांडिल्य /अमर उजाला, शिमला
सुरेश शांडिल्य /अमर उजाला, शिमला Updated Mon, 08 Aug 2016 10:28 AM IST
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governor acharya dev vrat decide the names of vc's for agriculture and horticulture university

हिमाचल के बागवानी और कृषि विश्वविद्यालयों के नए कुलपतियों पर अंतिम फैसला केंद्रीय कृषि अनुसंधान परिषद नहीं करेगी। राज्यपाल आचार्य देवव्रत ही हिमाचल के बागवानी और कृषि विश्वविद्यालयों के नए कुलपतियों पर अंतिम फैसला लेंगे। भारत सरकार की केंद्रीय कृषि अनुसंधान परिषद ने राजभवन शिमला को कुलपतियों के पद के लिए योग्य उम्मीदवारों का पैनल भेजा है।

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तीन दिन तक नई दिल्ली में स्क्रूटिनी के बाद प्रत्येक विश्वविद्यालय के लिए कुलपतियों के नामों के पैनल राजभवन शिमला भेजे गए हैं। राज्यपाल के सचिव पुष्पेंद्र राजपूत भी स्क्रूटिनी में शामिल होने के बाद शिमला लौटे हैं। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विवि नौणी और चौधरी सरवण कुमार कृषि विवि पालमपुर के कुलपतियों के पदों को मांगे आवेदनों की तीन, चार और पांच अगस्त को स्क्रूटिनी हुई।
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नौणी विश्वविद्यालय के लिए 76 और पालमपुर के लिए 50 उम्मीदवारों के आवेदन पहुंचे थे। सूत्रों की मानें तो आवेदकों में छह पूर्व कुलपति भी शामिल हैं। इनमें हाल में टेन्योर पूरा कर चुके नौणी विवि के पूर्व कुलपति डॉ. विजय सिंह ठाकुर और पालमपुर विवि के पूर्व कुलपति केके कटोच के अलावा डॉ. तेजप्रताप, डा. पीके शर्मा, डा. एसी वार्ष्णेय और डॉ. आरके मित्तल हैं।

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नियुक्ति का कानून बदलने को संशोधन विधेयक पारित कर सकती है सरकार

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डा. विजय ठाकुर ने तो नौणी के अलावा पालमपुर यूनिवर्सिटी के लिए भी आवेदन किया है। नौणी विश्वविद्यालय के लिए तो भारत के पूर्व बागवानी आयुक्त डॉ. गोरख सिंह का भी आवेदन है। केंद्रीय परिषद ने पैनल में किन नामों और कितने नामों को भेजा है, इसे राजभवन ने गोपनीय रखा है।

सूत्रों की सही मानें तो पैनलों में डॉ. विजय सिंह ठाकुर और डॉ. केके कटोच के नाम भी शामिल हैं। इन दोनों को सेवा विस्तार नहीं देने के मामले में ही प्रदेश सरकार और राजभवन में टकराव हुआ है। राजभवन नए कुलपतियों पर सोमवार के बाद कभी भी फैसला ले सकता है। राजभवन के अधिकृत सूत्रों ने इसकी पुष्टि की कि केंद्रीय कृषि अनुसंधान परिषद ने स्क्रूटिनी के बाद पैनल राजभवन शिमला पहुंच गए हैं।

सरकार अगली बार कुलपतियों की चयन प्रक्रिया में अपना हस्तक्षेप रखने को कानून बदलने की तैयारी में है। पिछले दिनों कुलपतियों की नियुक्ति प्रक्रिया में संशोधन को अध्यादेश लाने की तैयारी चल रही थी। सूत्रों ने बताया कि इसकी भनक के बीच आनन-फानन में केंद्रीय परिषद में स्क्रू टिनी हुई।

इसीलिए राज्य सचिवालय में किसी भी हरकत से पहले ही राजभवन कुलपतियों के नाम अधिसूचित कर सकता है। ऐसी स्थिति में अध्यादेश लाने का कोई मतलब भी नहीं रह जाएगा। हालांकि, इसके बाद प्रदेश विधानसभा में संशोधन विधेयक पारित किया जा सकता है।  

 

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