सरकार चाहे तो बंदरों से मिल सकती है निजात
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राजधानी शिमला सहित पूरे प्रदेश में जंगली जानवरों को मारने पर लगे प्रतिबंध के बाद शहरों में जहां आम लोगों का जीना मुश्किल है वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में लोग खेती छोड़ने तक को मजबूर हैं।
प्रदेश सरकार चाहे तो जनता को बंदरों के आतंक से निजात मिल सकती है। इसके लिए राजनैतिक दलों और प्रदेश की सरकार को मिलकर प्रयास करने की जरूरत है। सरकार मामले की गंभीरता को देख केंद्र सरकार से इसका समाधान करवा सकती हैं।
सरकार सर्वोच्च न्यायालय से भी लगी रोक को हटाने के लिए प्रयास कर सकती है। 2010 में पशु प्रेमियों की अपील पर बंदरों और जंगली जानवरों के मारने पर प्रतिबंध लगाया गया था। तब से लेकर आज तक किसान फसलों को बर्बाद कर रहे जानवरों से निजात दिलवाने की मांग उठा रहे है, जिसका आज तक समाधान नहीं हो सका है।
प्रदेश में वन विभाग 87 हजार बंदरों की नसबंदी करने के दावे कर रहा है लेकिन इससे किसानों और आम लोगों को बंदरों के आतंक से निजात मिली हो, ऐसा नजर नहीं आता। इसके भले ही दूरगामी नतीजे हो लेकिन को फौरी कोई राहत नहीं मिली। लोगों काकहना है कि सरकार चाहे तो इस समस्या से छुटकारा मिल सकता है।
कानून में है अलग प्रावधान
फसलों और लोगों को नुकसान करने वाले वन्य प्राणियों से निजात के लिए कानून में अलग से प्रावधान है। बंदर और जंगली जानवरों को मारने के लिए वाइल्ड लाइफ एक्ट 1972 के सेक्शन 11 में चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन को शक्तियां दी हैं। इसमें वह बंदरों को मारने की रेंज अधिकारी और सूअर को मारने को डीएफओ को शक्तियां प्रदान कर सकता है।
1983 से लेकर प्रदेश भर में शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध भी समस्या की वजह है। प्रतिबंध लगने से बंदरों का डर समाप्त हो गया है। इससे इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है।
एक्ट में सेक्शन 62 शेड्यूल-5 में चूहे, चमगादड़ और कौवा वर्मिन घोषित है। इन्हें मारने को अलग से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होती। सरकार चाहे तो केंद्र सरकार के समक्ष मामला उठाकर बंदरों और सूअरों को आतंक से अधिक प्रभावित क्षेत्र में कुछ समय के लिए वर्मिन घोषित कर समस्या हल कर सकते हैं।
देश से बंदरों से निर्यात पर 1978 में लगे प्रतिबंध को हटाने के लिए प्रदेश सरकार यदि केंद्र से मामला उठाए तो भी समस्या का हल किया जा सकता है। इंडोनेशिया, फिलिपिनस, चीन, वियतनाम जैसे देश बायो मेडिकल शोध के लिए बंदरों का अमेरिका और यूरोप जैसे देशों को निर्यात करते हैं।