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समाज के लिए बालिकाओं का शिक्षित होना जरूरी : भारद्वाज
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शिविर में महिलाओं की भूमिका की चर्चा
मोबाइल के अधिक उपयोग से परिवार में खत्म हो रहा भावनात्मक जुड़ाव
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिम रश्मि परिसर विकासनगर में चल रहे 30 दिवसीय आचार्य प्रशिक्षण वर्ग के 20वें दिन हिमाचल शिक्षा समिति की प्रांत बालिका प्रमुख सह सचिव अमिता भारद्वाज ने महिलाओं और बालिकाओं की भूमिका पर चर्चा की। शिविर में 30 शिक्षकों ने भाग लिया।
भारद्वाज ने कहा कि महिला परिवार की धुरी और समाज की जन्मदात्री होती हैं। जैसे हरित क्रांति के लिए सही बीज का चुनाव आवश्यक है, वैसे ही समाज के विकास के लिए महिलाओं और बालिकाओं का शिक्षण जरूरी है। उन्होंने बताया कि महिलाओं की भूमिका परंपराओं और संस्कृति को संजोने में महत्वपूर्ण है। उन्होंने नारी के शरीर के पोषण पर जोर देते हुए इसे आने वाली पीढ़ियों की सेहत से जोड़ा। साथ ही महिलाओं को स्वयं को कमजोर न समझने की प्रेरणा देते हुए वीरांगनाओं के योगदान को याद किया। तकनीकी क्षेत्र में महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हुए उन्होंने कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स के उदाहरण दिए। बालिकाओं को पारिवारिक और सामाजिक शिक्षा के महत्व को समझाते हुए उन्होंने मोबाइल के अधिक उपयोग से परिवार में भावनात्मक जुड़ाव की कमी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि रसोईघर में पोषण और पाक शास्त्र का ज्ञान बालिकाओं के लिए अनिवार्य है। अंत में हिमाचल की एक बेटी द्वारा तेंदुए से अपने भाई की रक्षा कर वीरता पुरस्कार पाने की घटना का उल्लेख किया। इस प्रशिक्षण वर्ग का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना है।
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मोबाइल के अधिक उपयोग से परिवार में खत्म हो रहा भावनात्मक जुड़ाव
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिम रश्मि परिसर विकासनगर में चल रहे 30 दिवसीय आचार्य प्रशिक्षण वर्ग के 20वें दिन हिमाचल शिक्षा समिति की प्रांत बालिका प्रमुख सह सचिव अमिता भारद्वाज ने महिलाओं और बालिकाओं की भूमिका पर चर्चा की। शिविर में 30 शिक्षकों ने भाग लिया।
भारद्वाज ने कहा कि महिला परिवार की धुरी और समाज की जन्मदात्री होती हैं। जैसे हरित क्रांति के लिए सही बीज का चुनाव आवश्यक है, वैसे ही समाज के विकास के लिए महिलाओं और बालिकाओं का शिक्षण जरूरी है। उन्होंने बताया कि महिलाओं की भूमिका परंपराओं और संस्कृति को संजोने में महत्वपूर्ण है। उन्होंने नारी के शरीर के पोषण पर जोर देते हुए इसे आने वाली पीढ़ियों की सेहत से जोड़ा। साथ ही महिलाओं को स्वयं को कमजोर न समझने की प्रेरणा देते हुए वीरांगनाओं के योगदान को याद किया। तकनीकी क्षेत्र में महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हुए उन्होंने कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स के उदाहरण दिए। बालिकाओं को पारिवारिक और सामाजिक शिक्षा के महत्व को समझाते हुए उन्होंने मोबाइल के अधिक उपयोग से परिवार में भावनात्मक जुड़ाव की कमी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि रसोईघर में पोषण और पाक शास्त्र का ज्ञान बालिकाओं के लिए अनिवार्य है। अंत में हिमाचल की एक बेटी द्वारा तेंदुए से अपने भाई की रक्षा कर वीरता पुरस्कार पाने की घटना का उल्लेख किया। इस प्रशिक्षण वर्ग का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना है।
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