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शिमला: जंगल में मिला बच्ची का क्षत विक्षत सिर, ढारे से उठा ले गया था आदमखोर तेंदुआ
Fri, 06 Aug 2021 11:25 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 06 Aug 2021 11:25 AM IST
सार
कनलोग की पार्षद ब्रज सूध ने बताया कि साथ लगते जंगल से बच्ची का सिर बरामद किया गया है। वन्य जीव विभाग के डीएफओ कृष्ण कुमार ने बताया कि पूरे क्षेत्र में अलर्ट कर दिया गया है, तेंदुआ अब आदमखोर बन गया है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के कनलोग क्षेत्र से वीरवार देर रात तेंदुए का शिकार हुई पांच साल की बच्ची का क्षतविक्षत सिर साथ लगते जंगल से बरामद कर लिया है। बच्ची की तलाश में जुटी पुलिस और वन्यजीव विभाग की टीम को शुक्रवार सुबह करीब पौने सात बजे जंगल में झाड़ियों के बीच बच्ची का सिर मिला। शव की हालत देख पुलिस कर्मियों और वन विभाग के कर्मचारियों के भी रोंगटे खड़े हो गए।
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यहां सिर्फ दो हड्डियां और बच्ची का क्षत विक्षत सिर पड़ा था। बाद में फोरेंसिक टीम भी मौके पर पहुंची और सैंपल लिए। पांच साल की यह बच्ची प्रियंका यहां निर्माणाधीन मकान के ग्राउंड फ्लोर में बने ढारे में अपनी दादी सुखमती के साथ रहती थी। दादी के अलावा दादा सोमरा और एक चाचा भी साथ रहते हैं। दादा किसी काम से परवाणू गए थे। यह परिवार मूलत: झारखंड के गुमला जिले का रहने वाला है।
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दादी सुखमती ने बताया कि शाम करीब सात बजे प्रियंका पड़ोस के ढाई साल के बच्चे के साथ खेलने गई थी। साढ़े आठ बजे वापस लौटी। ढारे के बाहर बने चूल्हे पर दादी रात का खाना बना रही थी। प्रियंका ने कहा कि उसे पेशाब जाना है। दादी ने इसे बाकी दिनों की तरह ढारे के पिछली तरफ जाने को कहा। यह जगह दादी की पीठ से करीब चार कदम की दूरी पर है। यहां घात लगाए बैठा तेंदुआ इस पर झपट पड़ा और बच्ची को उठा ले गया।
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तेंदुए के झपटने पर प्रियंका ने दादी को लगाई थी आवाज
कनलोग में तेंदुआ जब बच्ची पर झपटा तो बाल्टी गिरने के बाद दादी को लगा कि बेटी ने इसे गिरा दिया है। उधर साथ लगते ढारे के बाहर खाना खा रहे मजदूर अजय को बच्ची की चीख सुनाई दी। प्रियंका ने अपनी दादी को आवाज लगाई थी, साथ ही अंधेरे में कुछ घसीटकर ले जाने की आवाज सुनी। वह तुरंत प्रियंका की दादी के पास पहुंचा। पूछा प्रियंका कहां है। दादी बोली पीछे गई है। दोनों लाइट लेकर पीछे गए तो यहां कुछ नहीं था। अजय ने अंदेशा जताया कि कोई जानवर प्रियंका को ले गया है। इसने आसपास के बाकी मजदूरों को इकट्ठा किया। फिर पुलिस और वन्यजीव विभाग को सूचना दी गई। अजय ने बताया कि रात साढ़े आठ बजे तक प्रियंका उसके बच्चे के साथ खेल रही थी।
दादी बोली, उसके लिए पूरा परिवार थी प्रियंका
शिमला। पांच साल की प्रियंका की मां करीब तीन साल पहले उसे छोड़ कर चली गई है। पिता मनोज ने दूसरी शादी कर ली थी, वह अब झारखंड में ही रहता है। प्रियंका का पिता 15 जून को शिमला आया था। कुछ दिन बाद फिर वापस झारखंड लौट गया। प्रियंका अपनी दादी के साथ कनलोग में बने ढारे में रहती थी। हमेशा दादी के साथ ही रहती थी। दादी इन दिनों पूर्व मेयर मधू सूद के घर पर भी काम करने जाती थी। पोती को भी कई बार साथ ले जाती थी। मौके पर पहुंची पूर्व मेयर मधू सूद ने बताया कि उनकी पोती कई बार प्रियंका को घर पर पढ़ाती भी थी। अचानक यह घटना सुनकर सभी दुखी है। दादी का रो-रो कर बुरा हाल है।
शहर के रिहायशी इलाकों में कई बार दस्तक दे चुका तेंदुआ
शहर के कनलोग में कई बार तेंदुआ रिहायशी इलाके में घूमता रहा है। लोअर कनलोग में तेंदुआ बीते साल भी कई बार भवनों के बीच घूमता देखा गया था। अब ताजा घटना से लोग दहशत में आ गए हैं। शहर के बाकी रिहायशी इलाकों में कई बार तेंदुआ दस्तक दे चुका है।
विकासनगर, नवबहार में दर्जनों लावारिस कुत्तों को तेंदुआ अपना शिकार बना चुका है। खलीनी, कनलोग में कई बार तेंदुआ लोगों पर भी झपट चुका है। शहर में रिहायशी इलाके में तेंदुए के घूमने की घटनाएं सीसीटीवी में भी कैद होती रही है। वन्यजीव विभाग का कहना है कि जंगल के साथ लगते रिहायशी इलाकों में तेंदुओं के आने का खतरा ज्यादा है। ऐसे में लोग खिड़की दरवाजे बंद करके रखें।
सड़कों पर सोने को मजबूर सैकड़ों मजदूर परिवार
शहर में स्मार्ट सिटी समेत बाकी निर्माणकार्यों में लगे सैकड़ों मजदूर परिवार सड़क किनारे बने कच्चे ढारों में रहने को मजबूर हैं। तेंदुए का सबसे ज्यादा खतरा इन्हीं परिवारों को है।
विकासनगर, नवबहार में दर्जनों लावारिस कुत्तों को तेंदुआ अपना शिकार बना चुका है। खलीनी, कनलोग में कई बार तेंदुआ लोगों पर भी झपट चुका है। शहर में रिहायशी इलाके में तेंदुए के घूमने की घटनाएं सीसीटीवी में भी कैद होती रही है। वन्यजीव विभाग का कहना है कि जंगल के साथ लगते रिहायशी इलाकों में तेंदुओं के आने का खतरा ज्यादा है। ऐसे में लोग खिड़की दरवाजे बंद करके रखें।
सड़कों पर सोने को मजबूर सैकड़ों मजदूर परिवार
शहर में स्मार्ट सिटी समेत बाकी निर्माणकार्यों में लगे सैकड़ों मजदूर परिवार सड़क किनारे बने कच्चे ढारों में रहने को मजबूर हैं। तेंदुए का सबसे ज्यादा खतरा इन्हीं परिवारों को है।