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हिमाचल के हजारों शिक्षकों के लिए मुसीबत बनी ये शर्त

Mon, 05 Jan 2015 05:56 PM IST
Updated Mon, 05 Jan 2015 05:56 PM IST
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Gap period condition for contract teachers.

हिमाचल में अनुबंध पर लगे कई शिक्षक बिना लाभ के ही सेवानिवृत्त हो रहे हैं। नियमितीकरण का लाभ मिले बिना अब तक दर्जनों शिक्षक रिटायर हो चुके हैं। इनमें अधिकतर एक्स सर्विसमैन कोटे से भर्ती शिक्षक शामिल हैं।

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प्रदेश में इस वक्त 4000 से अधिक शिक्षक अनुबंध पर तैनात हैं, जो बैचवाइज, कमीशन और आरएंडपी नियमों के तहत भर्ती हुए हैं। 31 दिसंबर को कांगड़ा के राजकीय उच्च पाठशाला चौकी में कार्यरत प्रशिक्षित स्नातक अध्यापक (कला) जगतार राणा पिछले 6 साल से शिक्षा विभाग में अनुबंध पर अपनी सेवाएं दे रहे थे और नियमित हुए बिना ही सेवानिवृत्त हो गए।
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अनुबंध अध्यापक संघ के प्रदेशाध्यक्ष राजेश जयसिंहपुरिया ने कहा कि सरकार ने सत्ता में आने से पहले अनुबंध कर्मियों के लिए 5 वर्ष के सेवाकाल के बाद नियमित करने का वादा किया था, उसे पूरा करना तो दूर सरकार ने वर्तमान नीति के तहत भी उन्हें नियमित नहीं किया।
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अपना वायदा पूरा करे सरकार

Gap period condition for contract teachers.

कइयों पर 31 मार्च की शर्त तो कइयों को अपनी मर्जी से नियमितीकरण का फायदा दिया जा रहा है। अनुबंध अध्यापक संघ के महासचिव राजेश वर्मा ने सरकार से मांग की है कि आखिर सरकार अपना वादा कब पूरा करेगी।

अगर सरकार अपने वादे को पूरा नहीं करती तो यह अनुबंध कर्मियों से सबसे बड़ा धोखा होगा। इसके अलावा अनुबंध पर 6 वर्ष कार्य करने के बाद भी हजारों की संख्या में अनुबंध शिक्षक और कर्मचारी खाली हाथ हैं।

राजेश जयसिंहपुरिया ने कहा कि वे शहरी एवं आवास मंत्री सुधीर शर्मा से नियमितीकरण को लेकर शनिवार को धर्मशाला पुलिस ग्राउंड में मिलेंगे और मांग की जाएगी कि उनके साथ अन्याय न होने दिया जाए।

गैप पीरियड को लेकर असमंजस

Gap period condition for contract teachers.

हिमाचल के स्कूलों में तैनात पीटीए शिक्षकों को अनुबंध पर लाने की प्रक्रिया में नई बाधा आ गई है। वीरवार शाम को सरकार ने आनन-फानन में पीटीए के अनुबंध पर लाने के विषय पर कैबिनेट की बैठक बुलाई और शिक्षकों के हित में फैसला लिया।

शुक्रवार को सरकार ने इस संबंध में अधिसूचना भी जारी की, लेकिन इस अधिसूचना में गैप पीरियड वाले शिक्षकों को अनुबंध पर लाने और न लाने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में सेवाकाल के दौरान जिन पीटीए शिक्षकों का गैप है, उनकी अनुबंध प्रक्रिया पर फिर से सवाल खड़े हो गए हैं।

सरकार ने बेशक 7 साल का नियमित कार्यकाल पूरा कर चुके पीटीए शिक्षकों को अनुबंध पर लाने का फैसला किया है, लेकिन अभी सभी पीटीए शिक्षकों को राहत मिलती नहीं दिख रही है।

हजारों शिक्षक होंगे प्रभावित

Gap period condition for contract teachers.

आरटीई, टेट और 50 फीसदी अंकों की अनिवार्यता की शर्त तो हट गई, लेकिन गैप पीरियड को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। प्रदेश में इस वक्त करीब 6,945 पीटीए शिक्षक तैनात हैं, जिनके अनुबंध पर लाने की प्रक्रिया विभाग में चल रही है।

विभाग फिलहाल उन्हीं शिक्षकों की सूची तैयार कर रहा है, जिनका कार्यकाल नियमित रूप से सात साल का है। जिन शिक्षकों के सेवाकाल में गैप है, उन मामलों को विभाग द्वारा सरकार को भेजा जा रहा है।

प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अशोक शर्मा का कहना है कि विभाग वही कर रहा है, जो सरकार ने निर्देश दिए हैं। सब कुछ नियमों के तहत हो रहा है। अभी दस्तावेजों की स्क्रूटनी चल रही है। दो से तीन दिन के भीतर अनुबंध पर आने वाले पीटीए शिक्षकों की सूची जारी होगी।

ये है गैप पीरियड

Gap period condition for contract teachers.

-कार्यकाल के दौरान किसी भी वजह से टर्मिनेट रहना
-निर्धारित समय से अधिक अवकाश लेना
-बैन पीरियड पर हुई नियुक्ति
-नियमितीकरण को लेकर प्रदर्शन का समय
-नई नियुक्ति के दौरान रिप्लेस हुए शिक्षकों के सेवाकाल में आया गैप
-मामले कोर्ट में जाने के बाद सेवाकाल में गैप
-स्वास्थ्य लाभ और स्टडी लीव

एसएमसी शिक्षक हटाने पर रोक

Gap period condition for contract teachers.

वहीं, प्रदेश सरकार ने स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (एसएमसी) के तहत पहले से तैनात शिक्षकों को हटाकर उनके स्थान पर नई भर्ती पर रोक लगा दी है। कोर्ट में दर्जनों मामले जाने के बाद सरकार ने यह फैसला लिया है। सभी उप निदेशकों को इस तरह की भर्तियां बंद करने के निर्देश जारी किए हैं।

इस तरह की भर्तियां तब तक बंद रहेगीं, जब तक अदालत में चल रहे मामलों पर कोई निर्णय नहीं आ जाता है। प्रारंभिक शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक की ओर से सभी उप निदेशकों को जारी पत्र में कहा गया कि निदेशालय को यह सूचना मिली है कि एसएमसी आधार पर विभिन्न पदों के लिए साक्षात्कार ऐसे स्कूलों में भी लिए जा रहे हैं, जहां पहले से एसएमसी शिक्षक नियुक्त हैं।

पत्र में स्पष्ट किया गया है कि ऐसी नियुक्तियां करने के संबंधित मामले कोर्ट में चल रहे हैं। कोर्ट ने ऐसे मामलों पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए शिक्षा विभाग को आठ सप्ताह का समय दिया है।

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