इन्हें फ्री शिक्षा देने की तैयारी में सरकार
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हिमाचल प्रदेश के एचआईवी और एड्स पीड़ित छात्र-छात्राओं के लिए स्वास्थ्य विभाग ने नई पहल की है। उन्हें पहली कक्षा से लेकर मेडिकल और इंजीनियर तक की शिक्षा फ्री में देने की तैयारी है। राज्य स्वास्थ्य विभाग की ओर से इसका प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार को भेज दिया गया है। इतना ही नहीं, ऐसे छात्र-छात्राओं को अलग से छात्रवृत्ति देने का भी प्रावधान किया जाएगा। इसकी स्वास्थ्य विभाग की ओर से सिफारिश की गई है, जिससे समाज में इन्हें पूरा सम्मान मिल सके।
राज्य में 15 साल से कम आयु वर्ग के 388 युवा एचआईवी से पीड़ित है। इनमें से 226 लड़के और 162 लड़कियां है। इन्हें समाज में पूरा हक और सम्मान मिले, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के तहत आने वाली संस्थान राज्य एड्स कंट्रोल सोसायटी की ओर से पहल की है। सोसायटी ने राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा है कि ऐसे छात्रों की शिक्षा पूरी तरह फ्री की जाए। राज्य के शिक्षण संस्थाओं में एचआईवी पीड़ित छात्रों से भेदभाव न हो।
इसके लिए पहले ही सरकार की ओर से अधिसूचना जारी की जा चुकी है। हिमाचल प्रदेश के सभी जिलों में अब एचआईवी और एड्स की दवाएं मुहैया कराई जाएंगी। अब तक प्रदेश में केवल शिमला, हमीरपुर और कांगड़ा में ही यह सुविधा उपलब्ध थी। हिमाचल प्रदेश में जल्द ही नेशनल एड्स कंट्रोल प्रोग्राम फेज-4 शुरू होगा। इसी के तहत प्रदेश में एचआईवी और एड्स की रोकथाम के लिए केंद्र की ओर से बजट मुहैया कराया जाएगा।
एचआईवी छात्रों को फ्री में शिक्षा दी जाए। इसका प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। ग्रीन सिग्नल मिलते ही इसका क्रियान्वयन शुरू करने पर बल दिया जाएगा।
डा. डीएस गुरुंग, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, राज्य एड्स कंट्रोल सोसायटी
पड़ोसी राज्यों के मुकाबले प्रदेश में संक्रमण दर कम
हिमाचल प्रदेश में एचआईवी संक्रमण लगभग थम गया है। पिछले एक दशक में एचआईवी को काफी हद का कंट्रोल कर लिया गया है। राज्य एड्स कंट्रोल सोसायटी के ताजा आंकड़ों के अनुसार सूबे में एचआईवी संक्रमण की दर घटकर महज .5 फीसदी रह गई है। जबकि एक दशक पहले ये आंकड़ा 3.3 था।
पड़ोसी राज्य पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के मुकाबले हिमाचल प्रदेश में एचआईवी का संक्रमण दर बेहद कम है। प्रदेश में शिक्षा और जन जागरूकता की वजह से यह सुखद नतीजे सामने आए हैं। हालांकि, इसके बावजूद सूबे में एचआईवी पीडि़तों और एड्स मरीजों की संख्या तकरीबन 7600 है। इसमें 388 मरीज 15 साल से कम आयु हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार एक दशक पहले प्रदेश में एचआईवी संक्रमण की दर 3.3 प्रतिशत थी। 2005-06 के बाद से प्रदेश में इसकी दर में लगातार गिरावट दर्ज की गई। दो साल पहले तक इसकी दर .8 से अधिक थी, लेकिन 2014-15 में यह घटकर तकरीबन .5 फीसदी तक सीमित हो गई है।
हिमाचल प्रदेश एड्स कंट्रोल सोसायटी के पदाधिकारियों का कहना है यह स्थिति तब है, जबकि प्रदेश के कई जिलों के युवा नशाखोरी की चपेट में हैं। केंद्र शासित राज्यों को मिलाकर हिमाचल का नंबर देश में 21वां आता है। यानी देश के 20 राज्यों की संक्रमण दर हिमाचल प्रदेश से अधिक है।