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Shimla News: धोखाधड़ी करने वाले लदानियों आढ़तियों की मंडियों में नो एंट्री
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सेब बागवानों को धोखाधड़ी से बचाने का पुलिस प्लान तैयार
पिछले सालों में दर्ज मामलों और शिकायतों पर होगी केवाईसी
दिल्ली, हैदराबाद, महाराष्ट्र और बांग्लादेश से आते हैं लदानी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जिले की मंडियों में सेब लेकर आने वाले हजारों बागवानों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए पुलिस ने विशेष योजना बनाई है।
पुलिस आढ़तियों और बाहरी राज्यों तथा देशों से आने वाले लदानियों के आपराधिक रिकॉर्ड की जांच करेगी। केवाईसी के माध्यम से ऐसे लोगों को पता लगाया जाएगा। इसमें जिन्होंने पिछले सालों में बागवानों की पेमेंट हड़पने, चेक बाउंस और धोखाधड़ी जैसी घटनाओं को अंजाम दिया है, ऐसे लदानियों और आढ़तियों को जिला पुलिस एपीएमसी के साथ मिलकर मंडियों में कारोबार करने से रोकेगी। इसके लिए जिला पुलिस ने एपीएमसी से आढ़तियों और लदानियों की सूची मांगी है।
जिला पुलिस के पास ऐसे लदानियों और आढ़तियों का ब्योरा है, जिन्होंने पिछले सालों में बागवानों, आढ़तियों के साथ सेब खरीद के नाम पर धोखाधड़ी की है। इसमें सेब लेकर फरार हो जाना, चेक बाउंस और पेमेंट देने में आनाकानी करने वाले लोग शामिल हैं। पूर्व में सामने आया है कि कई लदानी और आढ़ती एक साल शिमला और दूसरे साल पराला तथा रोहड़ू सहित अन्य क्षेत्रों की मंडियों में जाकर सेब का कारोबार करते हैं और फिर लाखों का सेब लेकर फरार हो जाते हैं।
लदानी, आढ़ती के साथ धोखाधड़ी करता है तो कहीं न कहीं बागवान को ही इसका नुकसान झेलना पड़ता है क्योंकि आढ़ती लदानी से पेमेंट आने के बाद ही अपना कमीशन काटकर बागवान को उसकी फसल की कीमत अदा करता है। जिले में हैदराबाद, महाराष्ट्र, दिल्ली के साथ ही देश के विभिन्न राज्यों के अलावा नेपाल और बांग्लादेश से भी लदानी सेब का कारोबार करने के लिए पहुंचते हैं। हर सीजन में ऐसी कई शिकायतें आती हैं कि बाहरी राज्यों से आने वाले लदानी पहले तो आढ़तियों को सेब खरीद की नियमित अदायगी करते हैं लेकिन बाद में करोड़ों का सेब लेकर फरार हो जाते हैं। पुलिस की इस पहल से जहां संदिग्ध लदानियों और आढ़तियों को कारोबार करने से रोका जा सकेगा वहीं उनका पूरा ब्योरा सत्यापित होने से ऐसी घटनाओं के होने पर आरोपियों को पकड़ने में भी आसानी होगी।
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300 से अधिक धोखाधड़ी के मामले हुए हैं दर्ज
जिला पुलिस के मुताबिक पिछले सालों की बात करें तो जिले में ही बागवानों और आढ़तियों से लाखों की धोखाधड़ी के 300 से अधिक मामले दर्ज कर हो चुके हैं। इसमें कईअन्वेषणाधीन और अदालतों में विचाराधीन है। यह मामले जिले के थानों के अलावा प्रदेश सरकार द्वारा सेब के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी के मामलों की जांच के लिए गठित सीआईडी की एसआईटी के पास दर्ज हुए हैं। इसको देखते हुए पुलिस अब बागवानों को सेब के कारोबार के नाम पर होने वाली ठगी से बचाने के लिए विशेष योजना पर काम कर रही है।
कोट्स
सेब सीजन में बागवानों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए जिला पुलिस आढ़तियों और लदानियों की ईकेवाईसी करेगी। इसमें पता लगाया जाएगा कि इनके खिलाफ पूर्व में सेब के कारोबार में लेनदेन को लेकर धोखाधड़ी के मामले दर्ज तो नहीं हैं। ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें कारोबार करने से रोका जाएगा। जिला पुलिस बागवानों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए यह कदम उठा रही है।
-संजीव कुमार गांधी, पुलिस अधीक्षक, शिमला
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पिछले सालों में दर्ज मामलों और शिकायतों पर होगी केवाईसी
दिल्ली, हैदराबाद, महाराष्ट्र और बांग्लादेश से आते हैं लदानी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जिले की मंडियों में सेब लेकर आने वाले हजारों बागवानों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए पुलिस ने विशेष योजना बनाई है।
पुलिस आढ़तियों और बाहरी राज्यों तथा देशों से आने वाले लदानियों के आपराधिक रिकॉर्ड की जांच करेगी। केवाईसी के माध्यम से ऐसे लोगों को पता लगाया जाएगा। इसमें जिन्होंने पिछले सालों में बागवानों की पेमेंट हड़पने, चेक बाउंस और धोखाधड़ी जैसी घटनाओं को अंजाम दिया है, ऐसे लदानियों और आढ़तियों को जिला पुलिस एपीएमसी के साथ मिलकर मंडियों में कारोबार करने से रोकेगी। इसके लिए जिला पुलिस ने एपीएमसी से आढ़तियों और लदानियों की सूची मांगी है।
जिला पुलिस के पास ऐसे लदानियों और आढ़तियों का ब्योरा है, जिन्होंने पिछले सालों में बागवानों, आढ़तियों के साथ सेब खरीद के नाम पर धोखाधड़ी की है। इसमें सेब लेकर फरार हो जाना, चेक बाउंस और पेमेंट देने में आनाकानी करने वाले लोग शामिल हैं। पूर्व में सामने आया है कि कई लदानी और आढ़ती एक साल शिमला और दूसरे साल पराला तथा रोहड़ू सहित अन्य क्षेत्रों की मंडियों में जाकर सेब का कारोबार करते हैं और फिर लाखों का सेब लेकर फरार हो जाते हैं।
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लदानी, आढ़ती के साथ धोखाधड़ी करता है तो कहीं न कहीं बागवान को ही इसका नुकसान झेलना पड़ता है क्योंकि आढ़ती लदानी से पेमेंट आने के बाद ही अपना कमीशन काटकर बागवान को उसकी फसल की कीमत अदा करता है। जिले में हैदराबाद, महाराष्ट्र, दिल्ली के साथ ही देश के विभिन्न राज्यों के अलावा नेपाल और बांग्लादेश से भी लदानी सेब का कारोबार करने के लिए पहुंचते हैं। हर सीजन में ऐसी कई शिकायतें आती हैं कि बाहरी राज्यों से आने वाले लदानी पहले तो आढ़तियों को सेब खरीद की नियमित अदायगी करते हैं लेकिन बाद में करोड़ों का सेब लेकर फरार हो जाते हैं। पुलिस की इस पहल से जहां संदिग्ध लदानियों और आढ़तियों को कारोबार करने से रोका जा सकेगा वहीं उनका पूरा ब्योरा सत्यापित होने से ऐसी घटनाओं के होने पर आरोपियों को पकड़ने में भी आसानी होगी।
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300 से अधिक धोखाधड़ी के मामले हुए हैं दर्ज
जिला पुलिस के मुताबिक पिछले सालों की बात करें तो जिले में ही बागवानों और आढ़तियों से लाखों की धोखाधड़ी के 300 से अधिक मामले दर्ज कर हो चुके हैं। इसमें कईअन्वेषणाधीन और अदालतों में विचाराधीन है। यह मामले जिले के थानों के अलावा प्रदेश सरकार द्वारा सेब के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी के मामलों की जांच के लिए गठित सीआईडी की एसआईटी के पास दर्ज हुए हैं। इसको देखते हुए पुलिस अब बागवानों को सेब के कारोबार के नाम पर होने वाली ठगी से बचाने के लिए विशेष योजना पर काम कर रही है।
कोट्स
सेब सीजन में बागवानों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए जिला पुलिस आढ़तियों और लदानियों की ईकेवाईसी करेगी। इसमें पता लगाया जाएगा कि इनके खिलाफ पूर्व में सेब के कारोबार में लेनदेन को लेकर धोखाधड़ी के मामले दर्ज तो नहीं हैं। ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें कारोबार करने से रोका जाएगा। जिला पुलिस बागवानों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए यह कदम उठा रही है।
-संजीव कुमार गांधी, पुलिस अधीक्षक, शिमला