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स्क्रब टायफस से चार साल की बच्ची की मौत, 17 पहुंची मरने वालों की संख्या

Tue, 10 Oct 2017 09:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Tue, 10 Oct 2017 09:06 AM IST
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four years girl died due to scrub typhus in igmc

आईजीएमसी में स्क्रब टायफस से एक और मौत हो गई है। राजगढ़ की रहने वाली दिव्या को दो दिन पहले अस्पताल में दाखिल किया गया था। देर रात बच्ची की मौत हो गई। 

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मौत की पुष्टि वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमेश चंद ने की है। राजगढ़ (सिरमौर) की दिव्या (4) को सात अक्तूबर को स्क्रब टायफस होने के बाद अस्पताल लाया गया था। बच्ची को बाल रोग विभाग में दाखिल किया था। 
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डॉक्टर बच्ची पर लगातार निगरानी बनाए रखे हुए थे। बच्ची की हालत गंभीर थी। नौ अक्तूबर की देर रात बच्ची की मौत हो गई। उधर स्क्रब टायफस से मरने वाले लोगों की संख्या सत्रह पहुंच गई है। आधा दर्जन से अधिक लोग टेस्ट रिपोर्ट में इस बीमारी से पॉजीटिव पाए जा रहे हैं। 

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कैसे होता है स्क्रब टायफस

four years girl died due to scrub typhus in igmc

स्क्रब टायफस ज्वर खतरनाक जीवाणु जिसे रिकटेशिया (संक्रमित माइट, पिस्सू) के काटने से फैलता है। यह पिस्सू झाड़ियों, खेतों और घास के अलावा घर में रहने वाले चूहों और पिस्सू से भी फैलता है। जिसमें कि जीवाणु चमड़ी के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता और स्क्रब टायफस का बुखार पैदा करता है।

जोड़ों में दर्द और कंपकंपी पर दे डॉक्सीसाइक्लेन 
स्क्रब टायफस की चपेट में आने वाले मरीज को डॉक्टरी जांच के बाद तुरंत डॉक्सीसाइक्लेन दवा देनी चाहिए। इससे मरीज को बीमारी की चपेट में आने से बचाया जा सकता है। - प्रो. दलीप गुप्ता, - विभागाध्यक्ष, आईजीएमसी

बरसात में होता है अधिक प्रकोप

four years girl died due to scrub typhus in igmc

विशेषज्ञों की मानें तो यह बीमारी बरसात के दौरान अधिक होती है। जो लोग खेतों में काम करने जाते है, अगर वह व्यक्ति को जीवाणु काट लेता है तो  स्क्रब टायफस वायरस शरीर में जाता है। जोकि 48 से 72 घंटों के अंदर अपना असर दिखाना शुरू कर देता है। 

क्या है लक्षण
- मरीज को 104 से 105 तक बुखार आता है
- जोड़ों में दर्द और कंपकंपी होना
- शरीर का टूटना
- शरीर में ऐंठन और अकड़न आना

बचाव के उपाय
घर के आसपास झाड़ियों और खरपतवार न उगने दे। शरीर को स्वच्छ रखने के अलावा साफ कपड़े पहने  और घरों के पास कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करने की बात डॉक्टरों ने कही है। जबकि दूसरी ओर खेतों में काम करने के दौरान पूरे शरीर को ढका जाना चाहिए।

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