बाबा अमरदेव की मुश्किलें बढ़ीं, वन विभाग ने भेजी चालान रिपोर्ट
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हिमाचल के सोलन के साधु पुल स्थित रामलोक आश्रम के बाबा अमरदेव की मुश्किलें बढ़ गई हैं। आश्रम से बरामद तेंदुए की खालों की वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की ओर से पुष्टि के बाद वन विभाग ने बाबा के खिलाफ चालान रिपोर्ट जिला अधिवक्ता (डीए) को सौंप दी है।
अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट की कमियां दूर कर इसी हफ्ते चालान कोर्ट में पेश किया जा सकता है। पिछले साल 23 अप्रैल को रामलोक आश्रम में सीआईडी ने छापामारी की थी। इसमें तेंदुए की तीन और बाघ की एक खाल बरामद की थी।
सीआईडी की क्राइम ब्रांच ने वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया था। वैज्ञानिक प्रमाणिकता को खालें देहरादून स्थित वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई) भेजी थीं।
करीब एक साल बाद पिछले सोमवार को जांच रिपोर्ट मिली। इसमें खालें तेंदुए और बाघ के होने की पुष्टि हुई। इसे सीआईडी ने डीएफओ सोलन को भेजा। अब वन अधिकारियों ने रिपोर्ट की समीक्षा कर उसे अंतिम रूप देने के लिए डीए को भेज दिया है।
जानवरों की खाल मिलने पर हो सकती है इतनी सजा
बाबा के ऊपर जिन जानवरों की खालें रखने का आरोप है, वे वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 के तहत शेड्यूल एक में आते हैं। इस श्रेणी के जानवरों की खाल मिलने पर आरोपी को तीन से सात साल तक सजा हो सकती है।
कम से कम दस हजार रुपये के अर्थदंड का भी प्रावधान है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो इस एक्ट में आरोपी पर खूद को बेगुनाह साबित करने का दबाव रहता है। चूंकि, आश्रम में खालें बरामद हुईं और वैज्ञानिक जांच में ये तेंदुए की होने की पुष्टि हो चुकी है।