फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   foreign apple cultivation is threat for himachal apple growers

विदेशी सेब पौधे कहीं चौपट न कर दें 3000 करोड़ की बागवानी

Mon, 23 Jan 2017 04:28 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Mon, 23 Jan 2017 04:28 PM IST
विज्ञापन
foreign apple cultivation is threat for himachal apple growers

विदेशी सेब पौधों के मोह में कहीं हिमाचल की मौजूदा बागवानी ही चौपट न हो जाए। इससे आठ लाख परिवारों की रोजी-रोटी प्रभावित हो सकती है। ये सवाल इटली से आयातित पौधों में वायरस मिलने के बाद खड़ा हुआ है। बागवानों की आशंका यह है कि अगर कॉडलिंग मॉथ, फायर ब्लाइट जैसे कीट और रोग हिमाचल के बगीचों में इन विदेशी पौधों केे साथ पहुंच गए तो प्रदेश का बागवानी क्षेत्र तबाह हो सकता है।

विज्ञापन


विदेशी पौधों के साथ वायरस आने से प्रदेश की बागवानी विकास परियोजना पर ही बागवानों ने कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं। हिमाचल में 3000 करोड़ के सालाना बागवानी कारोबार पर विदेशी पौधे मंगवाने की सरकारी मुहिम भारी पड़ सकती है। बागवानी विकास परियोजना में इस बार मंगवाए सेब के पौधों में जिस तरह से वायरस पाया गया है, उससे बागवानों को बगीचे बर्बाद होने की आशंका है। राज्य में कॉडलिंग मॉथ और फायर ब्लाइट जैसे कीट या रोग अभी नहीं पहुंचे हैं।
विज्ञापन


अगर पहुंच जाएं तो सेब के बगीचे रातोंरात बर्बाद हो सकते हैं। बागवानी विभाग इस बारे में सफाई दे रहा है कि जो पौधे विदेशों से मंगवाए गए हैं, उनमें कुछ पौधों में वायरस है और ये वायरस हिमाचल में पहले से ही है। ऐसे में सवाल ये है कि विदेशों से सामान्य वायरस को आने से नहीं रोका जा सका है तो खतरनाक वायरस, कीटों और रोगों ने अगर यहां प्रवेश कर लिया तो बड़ी तबाही होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


ऐसे खतरनाक कीटों, रोगों और वायरस से निपटने की हिमाचल में दवाएं तक दर्ज नहीं हैं। बागवानी विश्वविद्यालय नौणी और एनएचआईवी फरीदाबाद की रिपोर्ट में विदेशी पौधे वायरसयुक्त पाए गए हैं। इससे 1169 .15 करोड़ की इस पूरी बागवानी विकास परियोजना पर सवाल खडे़ हैं।

बागवानों को ये पौधे क्लस्टरों में बांटे जा रहे हैं, जबकि उनसे इन्हें रोपने के एफिडेविट नहीं लिए जा रहे हैं। आशंका ये भी है कि प्रदेश के कुछ प्रभावशाली लोग विदेशों से आ रहे सही पौधों को हथियाकर अपनी नर्सरी तैयार कर अपना व्यवसाय चमका सकते हैं। ये पौधे ऐसे क्षेत्रों में भी बांटे जा रहे हैं, जहां पीने को पानी नहीं है। ऐसे में पानी से बढ़ने वाले ये पौधे सूख भी सकते हैं। 

मामले में गंभीरता बरतें सरकार और विश्वविद्यालय
जिला शिकायत निवारण समिति शिमला के सदस्य और इंजीनियर बागवान आरएल जस्टा ने इस संबंध में प्रधान सचिव बागवानी और और नौणी विश्वविद्यालय के कुलपति को पत्र लिखकर इस बारे में गंभीरता बरतने को कहा है। उन्होंने कहा कि ये विदेशी पौधे बागवानों का भविष्य अंधकार में डाल सकते हैं। वायरसमुक्त पौधों को विदेशों से मंगवाया जाना चाहिए था। 


संक्रमित पौधे नहीं बेचेगा विभाग
राज्य बागवानी विभाग के निदेशक डा. एचएस बवेजा ने कहा है कि संक्रमित पौधों को बिल्कुल भी नहीं बेचा जाएगा। उन्होंने कहा कि बागवानों को वायरस फ्री पौधे ही दिए जाएंगे। बागवानों को इन पौधों से डरने की जरूरत नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed