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अमर उजाला तहकीकात: बगलामुखी मंदिर की कार्यप्रणाली पर सवाल, इस तरह होती है चढ़ावे की गिनती

Mon, 09 Mar 2020 10:37 AM IST
अरविन्द ठाकुर सुनील चड्ढा, अमर उजाला, धर्मशाला
सुनील चड्ढा, अमर उजाला, धर्मशाला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Mon, 09 Mar 2020 10:37 AM IST
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फाइल फोटो

बगलामुखी मंदिर बनखंडी ट्रस्ट की पूरी कार्यप्रणाली अमर उजाला की तहकीकात के चलते सवालों के घेरे में आ गई है। मंदिर में होने वाले लाखों रुपये के चढ़ावे की गिनती सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में नहीं, बल्कि महंत रजतगिरि की मां की देखरेख में होती है। हैरत की बात है कि महंत की माता मंदिर में न तो ट्रस्टी हैं और न आधिकारिक कर्मचारी। ट्रस्ट ने मंदिर परिसर और सड़क के आसपास सुरक्षा के लिहाज से 26 सीसीटीवी कैमरे जरूर लगा रखे हैं, लेकिन चढ़ावा गिनने वाले स्थल पर ट्रस्ट ने सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए हैं।

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ट्रस्ट का सारा लेखा-जोखा रखने के लिए मंदिर में नियुक्त क्लर्क राजिंद्र कुमार ने अमर उजाला को बताया कि हफ्ते में एक दिन सोमवार को चढ़ावा महंत की मां की देखरेख में पांच सेवादार गिनते हैं। इस दौरान मंदिर अधिकारी, महंत और ट्रस्टी मौजूद नहीं होते। मंदिर ट्रस्ट में 44 सेवादार हैं। इनमें से जो ड्यूटी पर मौजूद होता है, उसकी ड्यूटी चढ़ावा गिनने के लिए लगाई जाती है। चढ़ावा गिनने के लिए किसी नियमित सेवादार की ड्यूटी नहीं लगती है। सेवादारों पर हर माह करीब पौने चार लाख रुपये तनख्वाह के रूप में खर्च होते हैं।
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मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली की पारदर्शिता जांचने अमर उजाला बगलामुखी मंदिर पहुंचा। इसकी भनक लगते ही महंत कहीं गायब हो गए। ट्रस्ट से हर माह 20 हजार रुपये तनख्वाह लेने वाले मंदिर अधिकारी पवन बडियाल से जब सवाल पूछे तो उन्होंने मंदिर के कामकाज और हिसाब-किताब से खुद को बिल्कुल अलग कर दिया। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट ने उनकी नियुक्ति सिर्फ वीवीआईपी लोगों को दर्शन करवाने के लिए की है। इसके अलावा उनका मंदिर के लेखे-जोखे से कोई लेना-देना नहीं। ट्रस्ट का हिसाब क्लर्क राजिंद्र कुमार के पास होता है।

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सवा लाख के अनुष्ठान में मंदिर के खाते में आते 1100 रुपये

मंदिर में करीब 7 हवन कुंड हैं। इनमें रोजाना हवन होते हैं। हवन और अनुष्ठान का रेट 2100 से लेकर सवा लाख रुपये तक है, लेकिन मंदिर ट्रस्ट के खाते में सिर्फ 1100 रुपये जाते हैं। ट्रस्ट श्रद्धालु से 1100 रुपये की पर्ची काटता है। यहां सवाल यह उठता है कि अगर 11000 या सवा लाख रुपये का हवन अनुष्ठान हो तो 1100 रुपये के अलावा शेष राशि किस खाते में जाती है।

बगलामुखी मंदिर के पास सिर्फ 6 तोले सोना
अमर उजाला की ओर से ली गई आरटीआई में खुलासा हुआ है कि मंदिर के पास सिर्फ 6 तोले सोना है। वर्ष 2013 में हुई ट्रस्ट डीड में ट्रस्ट ने मंदिर के पास सिर्फ 6 तोले सोना बताया। 2018 में हुई सप्लीमेंटरी ट्रस्ट डीड में भी 6 तोले ही सोना होने की बात लिखी है।

चिंतपूर्णी मंदिर के पास 200 तोले, ज्वालामुखी मंदिर के पास करीब 100 तोले सोना होने के मुकाबले बगलामुखी मंदिर के पास सिर्फ 6 तोला सोना है। क्लर्क राजेंद्र कुमार ने बताया कि बगलामुखी मंदिर में श्रद्धालु सोना नहीं चढ़ाते हैं। 2013 और 2018 की ट्रस्ट डीड में ट्रस्ट ने यह जिक्र ही नहीं किया है कि मंदिर के पास पैसा कितना है।

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