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मंदिरों में चढ़ने वाले फूलों से बनेंगे पटाखे, धुआं नहीं खुशबू छोड़ेंगे

Sun, 05 Jan 2020 10:31 AM IST
अरविन्द ठाकुर संजय भारद्वाज, अमर उजाला, नाहन (सिरमौर)
संजय भारद्वाज, अमर उजाला, नाहन (सिरमौर) Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sun, 05 Jan 2020 10:31 AM IST
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fireworks crackers will be made of flowers offered by people in temples in sirmour himachl pradesh
सांकेतिक तस्वीर

पर्यावरण और ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले पटाखे अब धुआं छोड़ने के बजाय खुशबू बिखेरेंगे। इनको मंदिरों में चढ़ने वाले फूलों से बनाया जाएगा। पर्यावरण संरक्षण के मद्देनजर ईको फ्रेंडली पटाखों को बनाने के लिए जिला सिरमौर प्रशासन ने पहल की है। प्रशासन हिमालय जैव संपदा प्रौद्योगिकी संस्थान (सीएसआईआर) पालमपुर के साथ नाहन के एक पटाखा निर्माता का करार कराने जा रहा है। हर दिवाली पर आतिशबाजी से प्रदूषण खतरे के निशान से ऊपर चला जाता है।

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सिरमौर प्रशासन ने इस वर्ष दिवाली में ईको फ्रेंडली पटाखे बनाने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध करवाने के प्रयास किए हैं। इसके लिए पटाखा निर्माता शकिल शेख को तैयार किया है। उपायुक्त के प्रयासों से शेख और सीएसआईआर के बीच अनुबंध होगा, जिसके बाद इन पटाखों को बनाने की प्रक्रिया आरंभ होगी। उपायुक्त डा. आरके परूथी ने बताया कि इन पटाखों में केमिकल नाममात्र होगा। शकिल शेख ने बताया कि यह पटाखे दूसरे पटाखों की अपेक्षा 30 से 40 फीसदी कम प्रदूषण फैलाएंगे। हानिकारक धुआं भी नहीं छोड़ेंगे। खुशबू के लिए भी ईको फ्रेंडली केमिकल इस्तेमाल होगा।

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इस दिवाली गोबर के दीयों से रोशन होंगे घर

सिरमौर को प्लास्टिक मुक्त बनाने के साथ ही गो संरक्षण और मंदिरों में चढ़ने वाले फूलों के उपयोग की दिशा में भी प्रशासन कदम उठा रहा है। प्रशासन ने विजन डाक्यूमेंट तैयार कर गोबर के दीये और गमले बनाने के साथ-साथ मंदिरों में चढ़ने वाले फूलों से अगरबत्ती और धूप बनाने का निर्णय लिया है।

जिले में औषधीय और सुगंधित फूलों की खेती और उसके विकास के लिए सीएसआईआर के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। दुर्लभ और विलुप्त होने के कगार पर पहुंचे पौधे रोपित होंगे। इसके अलावा हर्बल अगरबत्ती के लिए उद्यम लगाएंगे। उपायुक्त ने बताया कि गोबर के दीये माता बालासुंदरी गोसदन में तैयार होंगे। इसके लिए पांच लाख रुपये स्वीकृत हुए हैं।

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