रिटायर कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर, पढ़ें जरूर
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31 मार्च को सेवानिवृत्त हुए हिमाचल के हजारों कर्मचारियों के लिए यह एक अच्छी खबर है। प्रदेश सरकार जल्द ही इनके देय वित्तीय लाभ जारी कर सकती है। रविवार को ही केंद्र सरकार ने हिमाचल को 267 करोड़ रुपये जारी किए हैं।
चौदहवें वित्त आयोग की ओर से तय राशि की यह पहली किस्त है। इस राशि से सेवानिवृत्त कर्मचारियों को ग्रेच्युटी और लीव इनकैशमेंट आदि का भुगतान किया जा सकेगा। राज्य सरकार के करीब 6500 कर्मचारी एवं अधिकारी 31 मार्च हो ही रिटायर हुए हैं।
सूबे में आर्थिक संकट के चलते प्रदेश सरकार हाल ही में रिटायर हुए कर्मचारियों और अफसरों को भुगतान नहीं कर पा रही थी।
हिमाचल को मिला इतना पैसा
केंद्रीय वित्त मंत्रालय की ओर से पांच अप्रैल को ही राज्यों को 14वें वित्त की सिफारिशों के आधार पर पहली किस्त के रूप में 37420.86 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इसमें हिमाचल को 267.38 करोड़ मिले हैं।
सेवानिवृत्त कर्मियों को देने हैं 700 करोड़
मार्च महीने में रिटायर हुए कर्मचारियों और अधिकारियों को सरकार ने करीब 700 करोड़ रुपये देने हैं। केंद्र सरकार से 267 करोड़ रुपये मिल गए हैं। उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो शेष राशि के भुगतान के लिए सरकार फिर से लोन उठाने पर भी विचार कर रही है।
प्रधान सचिव वित्त श्रीकांत बाल्दी का कहना है कि सरकार के सामने रिटायर कर्मियों के देय बकाये का भुगतान पहली प्राथमिकता है। केंद्र से मिले इस राशि से यह भुगतान किया जा सकेगा।
कमेटियां निपटाएंगी कर्मचारियों के क्लेम : वीरभद्र
वहीं, मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि हिमाचल में कर्मचारियों के क्लेम को जल्द निपटाने के लिए कमेटियों का गठन किया गया है। ये कमेटियां जल्द से जल्द विभिन्न विभागों के कर्मचारियों के क्लेम को निपटाएंगी। मुकदमेबाजी को शुरुआती चरण में निपटाने के लिए लिटिगेशन पॉलिसी बनाई है। इससे समय और पैसे दोनों की बचत होगी। प्रशासनिक ट्रिब्यूनल का गठन भी किया है।
इससे कर्मचारियों की सेवाओं से जुड़े मामलों को तेजी से निपटाने में सुविधा होगी। यही नहीं, सुप्रीम कोर्ट में मुकदमों की संख्या भी कम होगी। वीरभद्र सिंह रविवार को विज्ञान भवन नई दिल्ली में आयोजित मुख्यमंत्री और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के सम्मेलन में बोल रहे थे। वीरभद्र सिंह ने कहा कि वर्तमान में महिलाओं के अधिकारों और सुविधाओं के लिए कई कानून हैं, लेकिन अज्ञानता, निरक्षरता और गरीबी के कारण कई बार कानूनी प्रावधानों का लाभ जरूरतमंद महिलाओं तक नहीं पहुंच पा रहा है।
इस दिशा में आवश्यक कदम उठाने की जरूरत है। वीरभद्र ने कहा कि सरकार ने पूरे राज्य में न्यायिक परिसरों का निर्माण किया है। इसके अतिरिक्त न्यायिक अधिकारियों के लिए आवासों की भी व्यवस्था की गई है। राज्य न्यायिक अकादमी परिसर के शिमला स्थित भवन के लिए बजट में आवश्यक प्रावधान किया गया है। सरकार की ओर से किशोरों से जुड़े मामलों के लिए किशोर न्यायिक बोर्ड और बाल कल्याण कमेटियों का भी जिलों में गठन किया गया है।
अनुबंध शिक्षकों ने उठाई ये मांग
उधर, प्रदेश अनुबंध अध्यापक संघ ने सरकार से 5 साल बाद नियमित करने वाली अधिसूचना जारी करने की मांग की है। प्रदेशाध्यक्ष राजेश जयसिंहपुरिया और महासचिव राजेश वर्मा ने कहा कि अधिसूचना में 31 मार्च की शर्त लागू की जा रही है।
इसके लागू होने से अनुबंध कर्मचारियों को एक वर्ष का नुकसान होगा। अनुबंध अध्यापकों को नियमित करने पर महासचिव राजेश वर्मा ने युकां अध्यक्ष विक्रमादित्य सिंह का भी आभार जताया है। संघ ने फैसला लिया है कि शीघ्र ही अध्यापकों का प्रतिनिधिमंडल विक्रमादित्य की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से मिलेगा। मुख्यमंत्री से भी 31 मार्च की शर्त को हटाने की मांग रखी जाएगी।