किसान का बेटा बना लेफ्टिनेंट, खोला कामयाबी का राज
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) देहरादून से शनिवार को 469 युवा अफसर सेना में शामिल हुए। इनमें प्रदेश के गबरुओं ने भी जगह पाई है। हिमाचल के सोलन भोजनगर के 31 वर्षीय भीम बहादुर सेना में लेफ्टिनेंट बन गए हैं।
उन्होंने ऑफिसर ट्रेनिंग अकादमी ग्वालियर से ट्रेनिंग पूरी कर पासआउट किया और अब 14 जेएके राईफल में सेवाएं देंगे। उनके छोटे भाई आनंद सिंह ने बताया कि भीम पहले गोरखा राइफल में सिपाही के पद पर तैनात थे। उन्होंने अपनी पढ़ाई राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल भोजनगर से की है।
उनके पिता भोजनगर में ही खेतीबाड़ी का काम करते थे। उन्होंने बताया कि उनके बड़े भाई मनी मगर भी सेना में नायब सूबेदार के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि लेफ्टिनेंट बनने के लिए उन्होंने लगातार 8 से 10 घंटे तक प्रतिदिन पढ़ाई की जिसकी बदौलत वह लेफ्टिनेंट बन सके हैं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने मां बाप व परिवार को दिया है।
सिपाही से लेफ्टिनेंट बना धर्मशाला का पुनीत
वहीं, धर्मशाला जिला मुख्यालय के समीपवर्ती गांव दाड़ी के पुनीत थापा भी सेना में लेफ्टिनेंट बने हैं। पुनीत आर्मी ऑर्डिनेंस डिफेंस कोर में सेवाएं देंगे। इससे पूर्व पुनीत ने भारतीय सेना में आठ साल बतौर जवान सेवाएं दी हैं। पुनीत थापा पुत्र ललित थापा 2007 में बीए की पढ़ाई करते हुए सेना में बतौर जवान भर्ती हो गए। इसके बाद उन्होंने सेना में रहते हुए लिखित परीक्षा पास की।
एक साल की ट्रेनिंग के बाद अब उन्हें लेफ्टिनेंट पद मिला है। पुनीत थापा के पिता एक्स सूबेदार मेजर ललित थापा ने 28 साल तक 12 जेकेएलआई में सेवाएं दी हैं, जबकि 2003 में सेवानिवृत हुए। पुनीत की माता बिंदू थापा गृहणि हैं। पुनीत थापा ने बताया कि पिता सेना में थे। धर्मशाला कॉलेज में बीए प्रथम और द्वितीय वर्ष तक की पढ़ाई की। इसके बाद सेना में बतौर जवान भर्ती हो गए थे।