राजेश खन्ना की फिल्म देखने मसूरी से शिमला पहुंचे गए थे ये मशहूर थियेटर आर्टिस्ट
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शिमला मसूरी की बड़ी बहन है, यहां पहुंचते ही मुझे घर की अनुभूति होती है। यहां का प्यार, वातावरण मुझे अद्भुत अहसास दिलाता है। यह बात शनिवार को ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत में विश्वविख्यात रंगकर्मी टॉम ऑल्टर ने कही। उन्होंने कहा कि वे 1972-73 में सिनेमा जगत के मशहूर अभिनेता राजेश खन्ना की दाग फिल्म देखने मसूरी से शिमला पहुंच गए थे।
वे गेयटी थियेटर में तीसरी मर्तबा अपनी प्रस्तुति दे रहे हैं। टॉम ऑल्टर मनोहर सिंह के तृतीय नाट्य समारोह पर शिमला पहुंचे हैं। टॉम ऑल्टर ने कहा कि युक्ति से मुसीबत हल करने की सीख देता है नाटक पैगंबर। उन्होंने बताया कि पैगंबर नाटक अंग्रेजी किताब ‘द प्रोफिट’ का हिंदी अनुवाद है।
किताब को खलील जबरान साहब ने लिखा है। शाम छह बजे शुरू हुए नाटक में उन्होंने अपने गजब के शेयरो शायरी अंदाज से लोगों को मंत्रमुग्ध किया। नाटक पूरी तरह से व्यक्ति के जीवन पर आधारित हैं। इसमें व्यक्ति की जिंदगी में आने वाली मुसीबतों को दर्शाया गया है। नाटक में पंद्रह किरदार अलग- अलग अंदाज में अपने अनुभवों को नाटक के माध्यम से मंचन करेंगे।
दोनो हाथों की उंगलियां चोटिल, फिर भी जज्बा बरकरार
नाटक समाप्ति के बाद वे दिल्ली रवाना हुए। जहां वह दो ‘नाटक लाल किले का आखिरी मुशायरा’ और ‘खालिब के खत’ में अपनी प्रस्तुति देंगे। टॉम ऑल्टर ने कहा कि उन्हें नही पता कि किस कारण उन्हें पद्म श्री अवार्ड मिला है, लेकिन अवार्ड मिलने पर उन्हें खुशी प्राप्त हुई।
उन्होंने सचिन तेंडुलकर का भी साक्षात्कार लिया है, तब वे मुंबई के लिए रणजी खेलते थे। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से उनका तब तक कोई नाता नही था। मशहूर रंगकर्मी टॉम ऑल्टर के दोनों हाथों की अंगुलियों में चोटें हैं, लेकिन फिर भी अभिनय के प्रति उनका जज्बा बरकरार है।
युवाओं को संदेश
टॉम ऑल्टर ने कहा कि रंगमंच में कुछ करना है तो दिल्ली और मुंबई थियेटर आएं। मैं भी मसूरी से बांबे आया था। फिल्म जगत से जुडे़ होने के नाते बॉलीवुड में काफी नयी फिल्में बन रही हैं, इससे वह खुश हैं।