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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Faith: Pundrik Rishi had participated in the Republic Day celebrations on the invitation of Pandit Jawaharlal

आस्था: पंडित जवाहर लाल नेहरू के निमंत्रण पर पुंडरिक ऋषि हुए थे गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल

Mon, 03 Mar 2025 11:32 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी Published by: Krishan Singh Updated Mon, 03 Mar 2025 11:32 AM IST
सार

महाशिवरात्रि महोत्सव मंडी में देवी-देवताओं के साथ ऋषि-मुनियों के प्रतिरूप भी शिरकत करते हैं। इसमें पुंडरिक ऋषि भी शामिल हैं। पुंडरिक ऋषि के बारे में कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं।

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Faith: Pundrik Rishi had participated in the Republic Day celebrations on the invitation of Pandit Jawaharlal
पुंडरिक ऋषि। - फोटो : संवाद

विस्तार

अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव मंडी में देवी-देवताओं के साथ ऋषि-मुनियों के प्रतिरूप भी शिरकत करते हैं। इसमें पुंडरिक ऋषि भी शामिल हैं। पुंडरिक ऋषि के बारे में कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। उन्होंने 1952 में दिल्ली में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में भाग लिया था। देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की ओर से मिले निमंत्रण के बाद पुंडरिक ऋषि ने समारोह में भाग लिया था। पुंडरिक ऋषि को दिल्ली तक पहुंचाने तथा वापस लाने की पूरी व्यवस्था की थी। पुंडरीक ऋषि ने 26 जनवरी 1952 की परेड में शामिल होकर देव संस्कृति को प्रदर्शित किया था। पुंडरिक ऋषि का मंदिर थलौट से करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर रोपा में स्थित है। उनका भंडार कोट नामक स्थान पर है। मंदिर के पास एक पवित्र एवं दैवीय तालाब है। माना जाता है कि तालाब में मछलियां देवता के रूप हैं। माना जाता है कि जब से मंडी नगर में महाशिवरात्रि की शुरुआत हुई है तब से ही पुंडरिक ऋषि इसमें भाग लेते हैं।

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पुंडरिक ऋषि के लिए महाशिवरात्रि महोत्सव के दौरान पड्डल मैदान में बैठने के लिए विशेष स्थान है। रात्रि ठहराव राजा के बेहड़ा में ही होता है। पुंडरिक ऋषि के साथ उनका स्वरूप बाबा कोट भी महाशिवरात्रि में पहुंचते हैं। माना जाता है कि प्राचीन समय में महाशिवरात्रि मेले के समापन के बाद जब पुंडरिक ऋषि वापस अपने मूल स्थान की ओर जाने लगे तब रियासत के तत्कालीन राजा ने पुंडरिक ऋषि को अपने पास रोकने की इच्छा जताई। राजा की इच्छा का सम्मान करते हुए पुंडरिक ऋषि ने उनका स्वरूप बनाकर अपने पास रखने के लिए कहा।

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राजा ने पुंडरिक ऋषि का बाबा कोट स्वरूप बनाया जिसे राजबेहड़ा में विशेष स्थान दिया गया है। लेकिन इस स्वरूप ने भी पुंडरिक ऋषि के साथ रहने को कहा। तब राजा ने बाबा कोट को पुंडरिक ऋषि के साथ उनके मंदिर भेज दिया। तभी से पुंडरिक ऋषि के साथ उनका बाबा कोट स्वरूप भी उनके साथ महाशिवरात्रि महोत्सव में आता है। पुंडरिक ऋषि के कारदार टेक सिंह का कहना है कि देश के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू के निमंत्रण पर पुंडरिक ऋषि ने दिल्ली में गणतंत्र दिवस की परेड में शिरकत की थी। पुंडरिक ऋषि के पास सच्चे मन से जो भी भक्त मन्नत मांगता है उसकी हर इच्छा पूरी होती है।

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