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Hamirpur: विशेषज्ञों की मदद से किसानों की मक्की की फसल को कीट से बचाएगी कमेटी

Sun, 16 Jul 2023 01:17 PM IST
अरविन्द ठाकुर बवीता चंदेल, संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
बवीता चंदेल, संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sun, 16 Jul 2023 01:17 PM IST
सार

वर्तमान समय में जिलेभर में 842.5 हेक्टेयर भूमि में 2.88 फीसदी मक्की की फसल में फॉल आर्मी वर्म कीट लगा हुआ है। इससे किसानों को काफी नुकसान हो रहा है।

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Expert committee will give tips to save Maize Crop from Fall army worm destructive pest of Maize
मक्की की फसल को लगा फॉल आर्मी वर्म कीट। - फोटो : संवाद

विस्तार

फॉल आर्मी वर्म कीट से मक्की की फसल को बचाने के लिए कृषि विभाग की ओर से सर्वे कमेटी का गठन किया है। इसके तहत कीट विज्ञान विशेषज्ञों की सहायता सर्वे कमेटी जिलेभर में फसलों का निरीक्षण करेगी। निरीक्षण के दौरान जिलेभर के सभी खंडों में किसानों के लिए कार्यशालाएं आयोजित होंगी। इसमें किसानों को फॉल आर्मी कीट से मक्की की फसल को बचाने के बारे में प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिला हमीरपुर में 32,500 हेक्टेयर भूमि पर मक्की की पैदावार होती है। करीब 80 हजार किसान खेतीबाड़ी से जुड़े हैं।

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वर्तमान समय में जिलेभर में 842.5 हेक्टेयर भूमि में 2.88 फीसदी मक्की की फसल में फॉल आर्मी वर्म कीट लगा हुआ है। इससे किसानों को काफी नुकसान हो रहा है। कृषि विभाग की ओर से किसानों को फॉल आर्मी कीट से बचाव के लिए दवाई भी प्रदान की जा रही है, ताकि मौजूदा सुरक्षित फसल को कीट से बचाया जा सके। इस दौरान कीट विज्ञान विशेषज्ञों की ओर से किसानों को फॉल आर्मी कीट से बचाव के लिए कीटनाशक का इस्लेमाल, फसल बोने से पहले रणनीति बनाने के बारे में प्रशिक्षित भी किया जाएगा।
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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में कवर नहीं है नुकसान
मक्की की फसल को लगने वाली बीमारी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में कवर नहीं है। विशेषज्ञ बताते हैं कि फसल बीमा योजना में केवल सूखे और अन्य आपदा से होने वाले नुकसान को ही कवर किया गया है। हां अगर फॉल आर्मी वर्म को कोविड की तरह राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए तो इसे भी फसल बीमा योजना में कवर किया जा सकता है। इससे किसानों को मुआवजा मिल सकता है लेकिन वर्तमान में किसान मक्की की फसल को वर्म से होने वाले नुकसान को लेकर परेशान हैं।

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इस वर्ष फॉल आर्मी कीट से मक्की को काफी नुकसान पहुंच रहा है। इससे बचाव के लिए कृषि विभाग की ओर से खंड स्तर पर कीटनाशक औषधि उपलब्ध करवा दी है। इस औषधि का छिड़काव किसानों को मक्की की बिजाई के दस दिन बाद करना चाहिए। जिसमें एक कनाल के लिए आठ से दस एमएल, वहीं दूसरी बार छिड़काव 18 से 25 दिन बाद करना चाहिए। इस बीमारी से होने वाले नुकसान को फसल बीमा योजना में कवर नहीं किया गया है। -डॉ. अतुल डोगरा, उपनिदेशक, कृषि विभाग हमीरपुर।

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