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खुंब उत्पादन में 18 से 20 डिग्री तक ही रखें कमरे का तापमान

Mon, 16 Dec 2019 10:23 AM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धर्मशाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धर्मशाला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Mon, 16 Dec 2019 10:23 AM IST
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Expert advice for farming of mushroom in Himachal Pradesh
डॉ दीपिका सूद - फोटो : अमर उजाला

खुंब मृत कार्बनिक पदार्थ पर उगने वाला एक प्रकार का कवक है। यह स्वास्थ्य वर्धक, पौष्टिक एवं औषधीय गुणों से परिपूर्ण रोगरोधक सुपाच्य खाद्य पदार्थ है। यह शाकाहारी जनसंख्या के लिए पोषक गुणों से भरपूर महत्वपूर्ण विकल्प है व पौष्टिकता की दृष्टि से शाकाहारी एवं मांसाहारी भोजन के बीच का स्थान रखता है।

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कृषि व्यवसाय के तौर पर खुंब की खेती आमदनी का एक प्रमुख साधन है। इसके लिए उपजाऊ भूमि की आवश्यकता नहीं होती, इसलिए ग्रामीण या शहरी क्षेत्रों के लिए यह एक व्यावहारिक व्यवसाय है। उपभोक्ताओं की मांग को देखते हुए खुंब की विभिन्न किस्मों की खेती की जाती है।
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इनमें कुछ खाने के लिए उपयुक्त हैं तो कुछ औषधीय गुणों से भरपूर, जो कैंसर एवं एड्स जैसे जटिल रोगों की रोकथाम के लिए विभिन्न चिकित्सीय पद्धतियों में प्रयोग की जाती हैं। खुंब उत्पादन के लिए उत्पादकों को कमरे का तापमान 18 से 20 डिग्री तक रखना जरूरी है। इसके अलावा पानी देने के दौरान कमरे के दरवाजे व खिड़कियां खोल दें, ताकि ताजी हवा कमरे में प्रवेश कर सके।
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ये सावधानियां बरतें किसान
मौजूदा समय में कंपोस्ट की वजह से बीमारियां उत्पन होती हैं। अगर किसानों को लगे कि खुंब टेढ़े-मेढ़े निकल रहे हैं तो किसान ब्लीलिंग पाउडर का छिड़काव कर इससे छुटकारा पा सकते हैं। अगर मिट्टी पर हरे या काले रंग की फफूंद नजर आए तो किसान वेबस्टिन का इस्तेमाल कर इस बीमारी से छुटकारा पा सकते हैं।

खुंब का पोषकीय महत्व
पोषक तत्वों की प्रचुरता के दृष्टिकोण से अधिकांश सब्जियों की तुलना में खुंब में अधिक पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसकी खेती पोषकीय एवं औषधीय लाभ के लिए की जाती है। इसमें विभिन्न प्रकार के पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं जो मानव शरीर के निर्माण, पुन: निर्माण एवं वृद्धि के लिए आवश्यक होते हैं।

खुंब में पाई जाने वाली प्रोटीन में शरीर के लिए आवश्यक सभी अमीनो अम्ल, लाइसिन, मेथियोनिन, आइसोल्यूसिन, थ्रीमिन, ट्रिंप्टोफेन, वैलीन, हिस्टीडिन और आजीनिन आदि पर्याप्त मात्र में होते हैं, जो दालों में प्रचुर मात्रा में नहीं पाए जाते हैं। खुंब में लगभग 22-35 प्रतिशत उच्च कोटि की प्रोटीन पाई जाती है, जिसकी पाचन शक्ति 60-70 प्रतिशत तक होती है। इसमें कालवासिन, क्यूनाइड, लेंटीनिन, क्षारीय एवं अम्लीय प्रोटीन की उपस्थिति मानव शरीर में टयूमर बनने से रोकती है।

कोलेस्ट्राल-शर्करा के अवशोषण को कम करता है खुंब 
खुंब में 4-5 प्रतिशत कार्बोहाईड्रेट्स व पर्याप्त मात्रा में रेशे होते हैं। यह कब्ज, अपचन, अति अम्लयता सहित पेट के विभिन्न विकारों को दूर करता है। साथ ही शरीर में कोलेस्ट्राल एवं शर्करा के अवशोषण को कम करता है। प्रति 100 ग्राम मशरूम से लगभग 35 कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है। इसमें सोडियम सॉल्ट नहीं पाया जाता है। इस कारण मोटापे, गर्दा तथा हृदयघात रोगियों के लिए आदर्श आहार है। इसमें आवश्यक विटामिन जैसे थायमिन, राबोफ्लोविन, नायसिन, बायोटिन, एस्कोर्बिक एसिड पेन्टोथिनिक एसिड पाए जाते हैं।

स्वरोजगार का अच्छा साधन है खुंब
वैज्ञानिक रूप से खुंब की खेती 20वीं सदी से शुरू हुई। 1970 तक यह वृद्धि बटन खुंब तक सीमित थी, लेकिन वर्तमान में खुंब की पौष्टिकता, औषधीय गुणों एवं आय के उत्तम साधन के रूप में इसे अत्यधिक महत्व मिला है तथा कृषक इस व्यवसाय को अपना कर अपनी आय बढ़ा रहे हैं। बटन खुंब विश्व में सर्वाधिक उगाया जाने वाला खाद्य मशरूम है। विश्व खुंब उत्पादन में शिटाके का स्थान दूसरा है।

इसका उपयोग भोजन एवं औषधि दोनों के रूप में किया जाता है। ढिगरी मशरूम विश्व में उगाए जाने वाले खुंब में तीसरा प्रमुख है तथा भारत में इसका दूसरा स्थान है। इसे खाने से शरीर में ग्लूकोज सहन करने की क्षमता बढ़ती है, जिससे मधुमेह रोगियों के उपचार में अत्यंत लाभकारी पाया गया है। खुंब की खेती के बारे में किसानों को जागरूक करने के लिए कृषि विवि में खुंब उत्पादन की सही तकनीकी जैसे खाद बनाने, निर्जिमिकृत करने, स्पॉनरन की विधि, फलन, तुड़ाई, ग्रेडिंग, पैकइंग एवं परिरक्षन पर प्रशिक्षण दिया जाता है।


डॉ दीपिका सूद प्रदेश कृषि विवि में सेवाएं दे रही हैं। इनके पास खुंब उत्पादन पर 20 से अधिक वर्ष का अनुभव है। मई से अगस्त 2019 तक जापान में उन्होंने शीत के खुंब पर प्रशिक्षण लिया है।

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