अफसरों की मिलीभगत से निजी संस्थानों में बांट दी अस्सी फीसदी छात्रवृत्ति
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केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं की राशि के आवंटन में 150 करोड़ से ज्यादा के घोटाले में नया खुलासा है। शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट के मुताबिक अफसरों की मिलीभगत से 80 फीसदी छात्रवृत्ति निजी संस्थानों को बांट दी गई
जबकि सरकारी संस्थानों के विद्यार्थियों को महज 20 फीसदी राशि ही मिली। राज्य सरकार ने अब इस घोटाले की सीबीआई जांच कराने की सिफारिश की है। लिहाजा, पूर्व सरकार के समय शिक्षा विभाग में ऊंचे पदों पर रहे कई अधिकारियों तक जांच की आंच पहुंचेगी।
उल्लेखनीय है कि स्कूल और उच्च शिक्षण संस्थानों को प्रतिवर्ष लाखों रुपये का बजट छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत जारी होता है। उच्च शिक्षा निदेशालय के माध्यम से छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किए जाते हैं।
जांच रिपोर्ट में हुअा ये खुलासा
रिपोर्ट के अनुसार साल 2013 के दौरान पहले आओ पहले पाओ के आधार पर छात्रवृत्ति राशि जारी होती थी। सरकारी और निजी संस्थानों के लिए अलग-अलग बजट की व्यवस्था नहीं थी।
इसका लाभ उठाते हुए कुछ निजी शिक्षण संस्थानों ने शिक्षा विभाग के अफसरों और कर्मचारियों की मिलीभगत से सरकारी खजाने को चपत लगाई। साल 2015-16 के दौरान सरकारी संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति नहीं मिलने के मामले सामने आने के बाद सरकार ने छात्रवृत्ति राशि को सरकारी और निजी संस्थानों के लिए बांटा था।
सीबीआई जांच के लिए केंद्र को भेजेंगे पत्र
शिक्षा विभाग में 150 करोड़ से अधिक राशि के छात्रवृत्ति आवंटन घोटाले का मामला सीबीआई को भेजने की तैयारी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री कार्यालय इस बाबत केंद्र सरकार को पत्र भेजेगा।
केंद्र सरकार मामले को कार्मिक मंत्रालय को भेजेगी। कार्मिक मंत्रालय जांच करने का अंतिम फैसला लेगा। विधायक राकेश सिंघा विधानसभा में उठाएंगे छात्रवृत्ति घोटाला
माकपा विधायक राकेश सिंघा विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान 29 अगस्त को शिक्षा विभाग में हुए 150 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले का मामला उठाएंगे। विधायक ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी वर्ग के विद्यार्थियों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति राशि के आवंटन को लेकर सवाल पूछे हैं।