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Shimla News: लद्दाख की वनस्पतियों और शिमला के वनों पर होंगे आठ शोध
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हिमालयी वन अनुसंधान संस्थान पंथाघटी करेगा जलवायु, जैव विविधता, कीट प्रकोप पर अध्ययन
संस्थान में आज चर्चा के लिए रखे जाएंगे शोध प्रस्ताव
एक्सक्लूसिव
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमालयी वन अनुसंधान संस्थान पंथाघटी, लद्दाख की वनस्पतियों से लेकर शिमला तक के वनों पर वैज्ञानिक अध्ययन करेगा। इसमें आठ आठ शोध होंगे। इन पर दो सितंबर को संस्थान में होने वाले कार्यक्रम में मंथन होगा।
शोध सलाहकार समूह की यह बैठक पंथाघाटी स्थित हिमालयी वन अनुसंधान संस्थान के सम्मेलन कक्ष में होगी। इसमें अप्रैल 2027 से शुरू किए जाने वाले प्रस्तावित शोधों पर चर्चा की जाएगी। अंतिम मंजूरी शोध नीति समिति से मिलने के बाद होगी।
लद्दाख की शीत मरुस्थलीय वनस्पतियों का डिजिटल अभिलेखीकरण प्रस्तावित है। इसके साथ कराकोरम वन्यजीव अभयारण्य में पौधों और कीटों की विविधता का आकलन होगा। दोनों अध्ययन हिमालयी क्षेत्र के जैव संसाधनों से जुड़े हैं। कृषि से जुड़े प्रस्ताव में देशी अम्लीय माइकोराइजल जैव उर्वरक का परीक्षण होगा। खेतों में इसके इस्तेमाल से फसल वृद्धि और उपज का आकलन किया जाएगा। भोजपत्र पर कीट प्रकोप बढ़ाने वाले बाहरी कारकों की जांच होगी। इसके लिए पर्यावरण अनुकूल प्रबंधन उपाय विकसित किए जाएंगे। जिले के उप-अल्पाइन वनों में जलवायु कारकों और कीट विविधता का भी अध्ययन होगा। इसमें लाभकारी कीटों पर विशेष ध्यान रहेगा।
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सीबकथॉर्न के संरक्षण पर भी होगा अध्ययन
लद्दाख में सीबकथॉर्न के आनुवंशिक संसाधनों के चयन और संरक्षण पर अध्ययन होगा। इसे भविष्य के प्रजनन कार्यक्रम से जोड़ा गया है। हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में फ्रैक्सिनस प्रजाति (फूलों वाले पेड़ों की एक प्रमुख प्रजाति) के संरक्षण पर भी शोध होगा। इसमें जनसंख्या आकलन, आवास उपयुक्तता मानचित्रण और गुणवत्तापूर्ण पौध तैयार करने का अध्ययन होगा। उत्तर-पश्चिमी हिमालय में सेब और क्रेटेगस की बीज तथा पौधशाला तकनीक मानकीकृत करने का प्रस्ताव है। बैठक में संस्थान के चल रहे शोध कार्यों और उनकी प्रगति की समीक्षा भी होगी।
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संस्थान में आज चर्चा के लिए रखे जाएंगे शोध प्रस्ताव
एक्सक्लूसिव
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमालयी वन अनुसंधान संस्थान पंथाघटी, लद्दाख की वनस्पतियों से लेकर शिमला तक के वनों पर वैज्ञानिक अध्ययन करेगा। इसमें आठ आठ शोध होंगे। इन पर दो सितंबर को संस्थान में होने वाले कार्यक्रम में मंथन होगा।
शोध सलाहकार समूह की यह बैठक पंथाघाटी स्थित हिमालयी वन अनुसंधान संस्थान के सम्मेलन कक्ष में होगी। इसमें अप्रैल 2027 से शुरू किए जाने वाले प्रस्तावित शोधों पर चर्चा की जाएगी। अंतिम मंजूरी शोध नीति समिति से मिलने के बाद होगी।
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लद्दाख की शीत मरुस्थलीय वनस्पतियों का डिजिटल अभिलेखीकरण प्रस्तावित है। इसके साथ कराकोरम वन्यजीव अभयारण्य में पौधों और कीटों की विविधता का आकलन होगा। दोनों अध्ययन हिमालयी क्षेत्र के जैव संसाधनों से जुड़े हैं। कृषि से जुड़े प्रस्ताव में देशी अम्लीय माइकोराइजल जैव उर्वरक का परीक्षण होगा। खेतों में इसके इस्तेमाल से फसल वृद्धि और उपज का आकलन किया जाएगा। भोजपत्र पर कीट प्रकोप बढ़ाने वाले बाहरी कारकों की जांच होगी। इसके लिए पर्यावरण अनुकूल प्रबंधन उपाय विकसित किए जाएंगे। जिले के उप-अल्पाइन वनों में जलवायु कारकों और कीट विविधता का भी अध्ययन होगा। इसमें लाभकारी कीटों पर विशेष ध्यान रहेगा।
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सीबकथॉर्न के संरक्षण पर भी होगा अध्ययन
लद्दाख में सीबकथॉर्न के आनुवंशिक संसाधनों के चयन और संरक्षण पर अध्ययन होगा। इसे भविष्य के प्रजनन कार्यक्रम से जोड़ा गया है। हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में फ्रैक्सिनस प्रजाति (फूलों वाले पेड़ों की एक प्रमुख प्रजाति) के संरक्षण पर भी शोध होगा। इसमें जनसंख्या आकलन, आवास उपयुक्तता मानचित्रण और गुणवत्तापूर्ण पौध तैयार करने का अध्ययन होगा। उत्तर-पश्चिमी हिमालय में सेब और क्रेटेगस की बीज तथा पौधशाला तकनीक मानकीकृत करने का प्रस्ताव है। बैठक में संस्थान के चल रहे शोध कार्यों और उनकी प्रगति की समीक्षा भी होगी।