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हिमाचल: चंबा और लाहौल-स्पीति में भूकंप के झटके, जानें रिक्टर पैमाने पर क्या रही तीव्रता
Wed, 02 Feb 2022 05:04 PM IST
Krishan Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Wed, 02 Feb 2022 05:04 PM IST
सार
प्रदेश के चंबा और लाहौल-स्पीति में बुधवार को भूकंप के झटके महसूस किए गए। चंबा जिले में सुबह करीब 11 बजकर 54 मिनट पर भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 2.7 रही और इसका केंद्र जमीन के अंदर पांच किलोमीटर गहराई पर था।
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भूकंप(सांकेतिक)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हिमाचल प्रदेश के चंबा और लाहौल-स्पीति में बुधवार को भूकंप के झटके महसूस किए गए। चंबा जिले में सुबह करीब 11 बजकर 54 मिनट पर भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 2.7 रही और इसका केंद्र जमीन के अंदर पांच किलोमीटर गहराई पर था। भूकंप के हल्के झटके चंबा से सटे कांगड़ा के कुछ भागों में भी महसूस किए गए। वहीं, पिन वैली नेशनल पार्क स्पीति में भी शाम चार बजकर 13 मिनट पर रिक्टर पैमाने पर तीन की तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। भूकंप का केंद्र जमीन के अंदर 123.6 किमी गहराई पर था। भूकंप से किसी तरह के जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं है। छह दिन पहले 27 जनवरी को भी चंबा में 3.4 की तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था।
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हिमाचल भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील
हिमाचल जोन पांच यानी भूकंप के लिहाज से अति संवेदनशील वर्ग में आता है। 4 अप्रैल 1905 को हिमाचल में 7.8 तीव्रता वाला बड़ा भूकंप आ चुका है। इसके बाद हिमाचल में बड़े भूकंप अक्सर आते रहे हैं। 28 फरवरी 1906 को कुल्लू में 6.4 तीव्रता वाला भूकंप आया था। वर्ष 1930 में भी 6.10 तीव्रता वाला भूकंप आया था। इसके बाद वर्ष 1945 में 6 और 1975 में 6.8 तीव्रता वाला भूकंप आया था। प्रदेश के चंबा, कुल्लू, कांगड़ा, ऊना, हमीरपुर, मंडी, बिलासपुर सिस्मिक जोन पांच और लाहौल स्पीति, शिमला, सिरमौर, सोलन जोन चार में आते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार लोगों को बेतरतीब निर्माण के बजाय भूकंपरोधी घर ही बनाने चाहिए ताकि आपदा के समय उनकी जिंदगी बच सके।
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1905 के भूकंप में 20 हजार से ज्यादा गई थीं जानें
कांगड़ा में 4 अप्रैल, 1905 की अलसुबह आए 7.8 की तीव्रता वाले भूकंप में 20 हजार से ज्यादा इंसानी जानें चली गई थीं। भूकंप से एक लाख के करीब इमारतें तहस-नहस हो गई थीं, जबकि 53 हजार से ज्यादा मवेशी भी भूकंप की भेंट चढ़ गए थे।
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