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मासिक धर्म की ऐसी सजा, सोची न होगी आपने

Fri, 06 Mar 2015 01:28 AM IST
Updated Fri, 06 Mar 2015 01:28 AM IST
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during premenstrual women removed from the home.

रूढ़ीवादी समाज में अंधविश्वास की आड़ में किस तरह से महिलाओं का शोषण किया जा रहा है। इसका जीता जागता उदाहरण देवभूमि हिमाचल में हैं।

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यहां मंडी जिला की कमरूघाटी में सदियों से महावारी के दौरान महिलाओं घर से निकाल दिया जाता है। ऐसे में महिलाओं को पशुओं के कमरे में सोना पड़ता है।

हैरानी इस बात की है कि महावारी के दौरान लोग महिलाओं के साए से भी दूर रहते हैं और इनसे अछूतों जैसा व्यवहार किया जाता है। मंडी में ही नहीं यह परंपरा हिमाचल के ज्यादातर हिस्सों में आज भी जारी है।

घरों में हैं देवी देवताओं का वास

during premenstrual women removed from the home.

लोगों का तर्क है कि क्योंकि उनके घरों में देवी देवताओं का वास होता है। यही वजह है कि छूआछूत बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाती। मान्यता है कि ऐसा करने पर उनके परिवार पर संकटों का पहाड़ टूट सकता है।

यही वजह है कि महावारी के दौरान महिला को गौशाला में सुलाया जाता है। नई दुल्‍हनों के साथ सास को सुलाया जाता है ताकि गौशाला के एकांत में वह भयभीन न हो। कमरूनाग घाटी में आज भी लोग इस रूढ़ीवादी परंपराओं से किनारा नहीं कर पाए हैं।

कमरूघाटी के 95 वर्षीय बुजुर्ग के अनुसार महावारी के दौरान तीन दिन तक महिला का घर में प्रवेश निषेध होता है। इस विषय पर घाटी की महिलाओं ने अमर उजाला के साथ अपने विचार साझा ‌किए। ज्यादातर महिलाओं का मानना है कि आधुनिकता के इस युग में भी वह बुजुर्गों के संस्कारों को अपनाने में गुरेज नहीं करती।

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शिक्षित महिलाएं करने लगी हैं विरोध

during premenstrual women removed from the home.

मगर इसके बावजूद अब शिक्षित महिलाएं अपने साथ होने वाले इस अन्याय के खिलाफ खुलकर सामने आने लगी है। उनका कहना है कि अब वह महावारी के दौरान घरों में ही रहती है।

बर्तनों को छूना भी मना है
महावारी के दौरान महिला से ही उसके द्वारा प्रयोग होने वाले बर्तनों को भी छूने गुरेज किया जाता है। इसके अलावा महिला द्वारा प्रयोग में लाए जाने वाले अन्य सामान को भी तीन दिन बाद साफ करके की इस्तेमाल में लाया जाता है। सबसे अधिक परेशानी सर्दियों के मौसम में होती है जब कड़ाके की ठंड पड़ती है।

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