फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Drone will become the most effective tool to extinguish forest fires

Himachal: केमिकल से जंगल की आग भी बुझाएगा ड्रोन, करोड़ों की वन संपदा राख होने से बचेगी

Fri, 25 Nov 2022 10:40 AM IST
Krishan Singh त्रिपुरारी सांख्यान, संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
त्रिपुरारी सांख्यान, संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी Published by: Krishan Singh Updated Fri, 25 Nov 2022 10:40 AM IST
सार

जंगलों में जहां फायर ब्रिगेड, पानी और लोग नहीं पहुंच पाते, वहां आग के कारण करोड़ों की वन संपदा राख हो जाती है। ऐसे में अब वहां ड्रोन आग बुझाएंगे। इसके लिए वन विभाग और आईटी विभाग प्रोजेक्ट शुरू कर रहा है। 

विज्ञापन
Drone will become the most effective tool to extinguish forest fires
ड्रोन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 हिमाचल प्रदेश में जंगलों की आग बुझाने के लिए ड्रोन को बड़ा माध्यम बनाया जा रहा है। जंगलों में जहां फायर ब्रिगेड, पानी और लोग नहीं पहुंच पाते, वहां आग के कारण करोड़ों की वन संपदा राख हो जाती है। ऐसे में अब वहां ड्रोन आग बुझाएंगे। इसके लिए वन विभाग और आईटी विभाग प्रोजेक्ट शुरू कर रहा है। इसके लिए आईआईआईटी मंडी की मदद ली जाएगी। अगस्त में आईआईटी मंडी के स्टार्टअप में भी यह मॉडल युवा शोधकर्ता और उद्यमी कर चुके हैं, जिसे प्रथम तीन श्रेणी में शामिल किया जा चुका है। अब वन विभाग इस नई तकनीक पर काम शुरू करने पर विचार कर रहा है। एक ऐसे केमिकल का प्रयोग किया जाएगा, जो करीब ढाई एकड़ जमीन में आग बुझाने में सक्षम होगा। हालांकि, यह भी दावा किया जा रहा है कि यह केमिकल शत-प्रतिशत ईको फ्रेंडली और बोया-डिग्रेडेबल होता है। आईटी विभाग के प्रबंधक नरेंद्र कुमार ने कहा कि इस तकनीक पर विचार किया जा रहा है।

विज्ञापन


ड्रोन में केमिकल से भरी 12 बॉल्स ले जाने की क्षमता
विभाग ने मंडी और कुल्लू से जुड़े एक स्टार्टअप से संपर्क किया है, जिन्होंने ऐसा ड्रोन तैयार किया है। यह एक साथ केमिकल से भरी 12 बॉल्स (गेंद) ले जा सकेगा। कंपनी के अधिकारियों ने दावा किया कि एक बॉल नौ स्क्वेयर मीटर एरिया यानी करीब ढाई एकड़ में आग बुझाने को पर्याप्त होगा। यह ड्रोन 80 किलोमीटर तक अप और डाउन कर सकेगा। कुल्लू के शरद खन्ना और उनकी टीम ने इसे बनाया हैै। टीम ने यह भी दावा किया है कि यह ड्रोन 50 किलो भार उठाकर उड़ान भरता है। 
विज्ञापन


ऐसे करेगा काम
ड्रोन के माध्यम से छोटी फ्लाइट अधिक कारगर साबित होगी। अधिक आग होने पर एक साथ कई ड्रोन उड़ाए जा सकते हैं। इन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से एक रिमोट से उड़ाया जाएगा। जहां आग लगी है, वहां केमिकल से भरी गेंद को गिराया जाएगा। यह आग में गिरते ही ताप अधिक होने पर फट जाएगी। इसमें केमिकल धुएं कर तरह फैल जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


अब तक स्वास्थ्य, कृषि में हो चुका है सफल
अब तक ड्रोन से स्वास्थ्य क्षेत्र में बहुत बेहतर काम किया जा रहा है। इससे बर्फबारी या आपदा प्रभावित इलाकों में दवाइयां, खाना आदि भेजा जा सकता है। प्रदेश भर में ड्रोन से अब दवाइयों की सप्लाई मरीजों और दूरदराज के अस्पतालों तक की जा रही है। कृषि विभाग भी केमिकल छिड़काव सहित अन्य कार्यों में ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है। बागबानी में भी ड्रोन का प्रयोग हो रहा है। 


हिमाचल में हैं 2026 वन वीट 
प्रदेश में करीब 2,026 वन बीट हैं। इनमें 339 अति संवेदनशील हैं और 667 संवेदनशील हैं। हालांकि, इनमें 1,020 बीट ही सामान्य बीट हैं। इस साल में अप्रैल-मई में ही प्रदेश में 409 आग की घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें 3,209 हेक्टेयर एरिया जलकर राख हो गया था। यह आग की घटनाएं शिमला, रामपुर, मंडी और धर्मशाला वन बीटों में हुई हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed