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Shimla News: घर के साथ वाहन चलाने में भी बढ़ी महिलाओं की रूची

Fri, 24 May 2024 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 24 May 2024 11:59 PM IST
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driving home 
Women's interest also increased
परिवार की जिम्मेदारी के लिए थामा स्टेयरिंग
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ड्र्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए 25 ने दिए टेस्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी में महिलाओं का घर के साथ गाड़ी चलाने में भी रुझान बढ़ने लगा है। परिवार की जिम्मेदारी उठाने के लिए महिलाएं ड्राइविंग सीख रही हैं।

परिवहन विभाग की ओर से शुक्रवार को तारादेवी में ड्राइविंग टेस्ट लिए गए। इनमें 25 महिलाएं और युवतियां टेस्ट देने के लिए पहुंचीं थीं। कई महिलाएं शौकिया तौर पर तो कई महिलाएं मजबूरी में ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के लिए आई थीं। महिलाओं ने बातचीत में बताया कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में सभी के पास वक्त की कमी हो गई है। चाहकर भी नियमित तौर पर मदद नहीं कर पाते हैं। चाहे बच्चों को स्कूल छोड़ने या वहां से लाने की बात हो आपको अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए निजी वाहन का इस्तेमाल करना ही पड़ता है। अब जरूरी नहीं है कि रोजाना पारिवारिक सदस्य उपलब्ध हो आज की जीवन शैली में ड्राइविंग अभिन्न अंग बन चुका है। इसके बिना आप दूसरों पर अधिक निर्भर होते है।
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बच्चों को स्कूल छोड़ने के लिए सीखी ड्राइविंग
अलका शर्मा ने बताया कि बच्चों को स्कूल छोड़ने और स्कूल से घर लाने में दिक्कत होती थी। बच्चों को स्कूल छोड़ने के लिए परिवार के सदस्य हर समय मौजूद नहीं रहते। इससे टैक्सी में ज्यादा खर्च कर भेजना पड़ता था। इसलिए 37 साल की उम्र में ड्राइविंग सीखनी पड़ी। लाइसेंस बनने से अब बच्चों को स्कूल छोड़ने में परेशानी नहीं होगी।
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घर लौटने के लिए होती थी मुश्किल : नेगी
विकासनगर की आरती नेगी ने कहा कि गाड़ी सीखना महिलाओं की जरूरत बन गई है। अस्पताल में कई बार नाइट ड्यूटी देने के बाद रात को घर लौटने में मुश्किल होती थी। रात के समय बसें और टैक्सियां नहीं मिल पाती। इस पर परिवार के सदस्यों को बुलाना पड़ता था। इसलिए गाड़ी सीखना जरूरी था।


नौकरी के साथ गाड़ी सीखना जरूरी : कश्यप
मशोबरा की भुवनेश्वरी कश्यप ने कहा कि नौकरी के साथ गाड़ी सीखना जरूरत बन गया था। समय पर बस नहीं मिल पाती थी। इसके साथ ही टैक्सी में ज्यादा किराया चुकाना पड़ता था। छह माह प्रशिक्षण लेकर गाड़ी चलाना सीखी है। अब नौकरी के साथ घर के काम के लिए भी आसानी होगी।



शौक के लिए सीखी गाड़ी चलानी
श्रेया गुप्ता ने कहा कि शौकिया तौर पर गाड़ी चलाना सीखी है। आत्मनिर्भर बनने के लिए लाइसेंस बनाना जरूरी था। परिवार में पापा ही गाड़ी चलाते हैं। इसलिए अन्य कार्यों के लिए गाड़ी चलाना जरूरी था।


कोट
सीनियर मोटर वाहन निरीक्षक पंकज सिंह ने कहा कि तारादेवी में शुक्रवार को 25 महिलाओं और युवतियों ने ड्राइविंग टेस्ट दिए। ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के लिए पहले की अपेक्षा महिलाओं की संख्या बढ़ी है।
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