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गांधी के बारे में नया खुलासा जिसे नहीं जानते होंगे आप!

Sun, 06 Apr 2014 01:37 AM IST
सुरेश शांडिल्य/ अमर उजाला, शिमला
सुरेश शांडिल्य/ अमर उजाला, शिमला Updated Sun, 06 Apr 2014 01:37 AM IST
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Dr mehta gave the title of 'mahatma' to gandhi, nor ravindranath tagore

महात्मा गांधी को ‘महात्मा’ का पहली बार खिताब रबीन्द्र नाथ ठाकुर ने नहीं बल्कि डा. प्राणजीवन मेहता ने दिया था। यह दावा शिमला के इतिहासकार एसआर मेहरोत्रा ने अपनी हाल ही में प्रकाशित पुस्तक ‘द महात्मा एंड द डॉक्टर’ में किया है।

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उन्होंने इस किताब में मेहता के गोपाल कृष्ण गोखले को लिखे उस पत्र को भी प्रकाशित किया है जिसमें गांधीजी को पहली बार महात्मा कहा गया है।

यह पत्र 1909 में लिखा गया। जबकि अब तक कहा जाता रहा है कि  कवि रबींद्रनाथ टैगोर ने 1919 के आसपास ने पहली बाद गांधी को महात्मा कहना शुरू किया था।

हिमाचल विवि और जेएनयू विवि में इतिहास के प्रोफेसर रहे शिमला मूल के इतिहासकार प्रो. एसआर मेहरोत्रा की किताब ‘द महात्मा एंड द डॉक्टर’ डा. प्राणजीवन मेहता और गांधीजी से उनके संबंधों पर आधारित है।
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डा. प्राणजीवन मेहता के पत्र का हवाला

Dr mehta gave the title of 'mahatma' to gandhi, nor ravindranath tagore

जनवरी 2014 में मुंबई से छपी इस पुस्तक में डा. मेहरोत्रा ने डा. प्राणजीवन मेहता के पत्र का हवाला दिया है जो उन्होंने जीके गोखले को रंगून से 8 नवंबर, 1909 को लिखा था। इस पत्र के शुरू में ही डा. प्राणजीवन ने लिखा है - ‘अपने यूरोप के दौरे के दौरान मैंने गांधी की साल भर में महानता देखी है।

(मैं उन्हें बीस साल से करीब से जानता हूं)। मैंने उन्हें ज्यादा से ज्यादा नि:स्वार्थ देखा है। वह अब तपस्वी की तरह का जीवन जी रहे हैं। एक साधारण योगी की तरह जैसे कि हम आम तौर पर देखते है। पर एक महान महात्मा की तरह। ...उनका मन मातृभूमि में ही है...।’

बताते चलें कि अपनी पुस्तक ‘गांधी बिफोर इंडिया’ में भी इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने इस तथ्य की तस्दीक है। वे कहते हैं कि पारंपरिक ज्ञान यह रहा है कि कवि रबींद्रनाथ टैगोर ने 1919 के आसपास पहली बाद गांधी को महात्मा कहना शुरू किया था। तब गांधी भारतीय राजनीति में बड़े चेहरा बन चुके थे। प्राणजीवन मेहता ने तो यह नाम उन्हें अपने एक निजी पत्र में इससे भी पहले दे दिया था।

कौन थे डा. मेहता

Dr mehta gave the title of 'mahatma' to gandhi, nor ravindranath tagore

प्रो. मेहरोत्रा के अनुसार डा. प्राणजीवन जगजीवनदास मेहता पहले भारतीय थे, जिन्होंने गांधी पर 1911 में पहली पुस्तक ‘एमके गांधी एंड द साउथ अफ्रीकन इंडियन प्रोब्लम’ लिखी थी। गांधी और डा. मेहता दोनों काठियावाड़ से संबंध रखते थे।

पहली बार डा. मेहता ने ही गांधीजी को महात्मा कहा था। प्रो. श्रीराम मेहरोत्रा ने बताया कि इतिहास ने डा. मेहता का ठीक से मूल्यांकन नहीं किया। गांधी को महात्मा बनाने में उनकी अहम भूमिका थी।

खुद गांधी ने कहा था कि बिना डा. मेहता की आर्थिक मदद से भारत में सत्याग्रह संभव नहीं होता। उन्होंने इस तथ्य को चुनौती दी कि रबींद्र नाथ टैगोर ने पहली बार एमके गांधी को महात्मा कहा था।

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