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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   divorce case in court.

जेल जाऊंगा पर पत्नी को फूटी कौड़ी तक नहीं दूंगा

Wed, 29 Oct 2014 11:58 PM IST
Updated Wed, 29 Oct 2014 11:58 PM IST
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divorce case in court.

भरी अदालत में जज के सामने पति ने कह दिया कि जेल जाने को तैयार हूं लेकिन पत्नी को फूटी कौड़ी तक नहीं दूंगा। राज्य महिला आयोग की तीसरे दिन की कोर्ट में एक अलग ही मामला सुनवाई के लिए आया। कांगड़ा की एक महिला ने पति पर खर्चा न देने का आरोप लगाया और आयोग से खर्चा दिलाने की गुहार लगाई। कोर्ट ने जब दोनों पक्षों को सुना।

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पति ने आयोग की कोर्ट को दो टूक शब्दों में कहा कि वह जेल जाने के लिए तैयार है लेकिन पत्नी को किसी तरह का खर्चा नहीं देगा। महिला को एक निश्चित खर्चा देने के आदेश कोर्ट से भी हो चुके हैं, बावजूद इसके पति ने तय कर रखा है कि वह जेल जाएगा पर पत्नी को खर्चा किसी भी सूरत में नहीं देगा। उसने आयोग के समक्ष यह बात मानी की वह कोर्ट के आदेशों की अवमानना करने पर जेल भी जा चुका है। बड़ी बात यह है कि उसने आयोग की कोर्ट के समक्ष यह साफ नहीं किया कि वह आखिर क्यों पत्नी को खर्चा नहीं देना चाहता है।
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इसके अलावा आयोग के समक्ष अवैध संबंधों और एक के होते हुए दूसरी शादी करने और घरेलू हिंसा का शिकार हो रही महिलाओं के मामले सुनवाई के लिए पहुंचे। बुधवार को आयोग में 21 मामले सुनवाई के लिए लगे थे। इनमें 7 मामलों में दोनों ही पक्ष नहीं पहंचे। 3 मामलों को दोनों पक्षों की सहमति से निपटा दिया गया। चौथे और अंतिम दिन वीरवार को आयोग में मंडी जिला के 21 शिकायतों की सुनवाई होगी।
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बेटे को पहुंचना पड़ा आयोग

divorce case in court.

शिमला जिला के एक मामले में न तो शिकायत कर्ता पत्नी पहुंची और न ही पति पहुंचा। उनके बेटे ने आयोग पहुंच कर अपना पक्ष रखा और कहा कि उसकी मां बीमार हो गई है और आयोग में पेश नहीं हो सकती है। बेटे ने कहा कि उसके पिता के अवैध संबंध हैं। उन्हें न तो खर्चा देते हैं और न ही देखभाल करते हैं, जिस कारण उसे आधे में ही अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी है। उसने यह भी कहा कि किस तरह मां बाप के झगड़ों के कारण बच्चों का भविष्य बरबाद होता है।

मानवीय संवेदनाओं का हो रहा पतन

नशा, अवैध संबंध और एक के होते हुए दूसरी शादी करना परिवार के टूटने के सबसे बड़े कारण बन रहे है। कहीं मां बच्चों को छोड़ कर जा रही है तो कही पिता बच्चों की देखभाल करने से इंकार कर रहे हैं। मानवीय संवेदनाओं का पतन हो रहा है। समाज में आज बड़े पैमाने पर बौद्धिक जागरूकता की आवश्यकता है जो सामाजिक परिवेश और संकुचित हो रही सोच में बदलाव ला सके।
जैनब चंदेल. अध्यक्ष. राज्य महिला आयोग

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