कारोबारी के बेटे को दे दिया बेरोजगारी भत्ता, विवाद हुआ तो वापस ले लिया चेक
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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की ओर से चंबा में शुरू की गई बेरोजगारी भत्ता योजना विवादों में आ गई है। हिमाचल दिवस पर सीएम की ओर से 10 बेरोजगारों युवाओं को चेक जारी किए गए। इनमें से एक युवक के आय प्रमाण पत्र पर सवाल उठ गए हैं। बताया जा रहा है कि यह युवक शहर के एक कारोबारी का बेटा है।
आरोप है कि उनकी आय दो लाख से अधिक है। जैसे ही रोजगार कार्यालय को इसका पता चला तो युवक को जारी चेक वापस करने के निर्देश दिए गए। विभाग अब तर्क दे रहा है कि आय प्रमाणपत्र की जांच की जा रही है। जल्दबाजी में ऐसा हो सकता है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने जिन दस युवाओं को बेरोजगारी भत्ते के चेक वितरित किए हैं, उन सबका चयन रोजगार कार्यालय के माध्यम से ही किया गया था।
कैसे जारी हो गया आय का प्रमाणपत्र
पात्र बेरोजगारों के चयन के लिए दस जमा दो पास होना, परिवार की आय दो लाख से कम, उम्र 20 से 35 वर्ष के बीच और रोजगार कार्यालय में कम से कम एक साल पहले पंजीकृत होना आवश्यक था। इन तमाम शर्तों को पूरा करने के बाद ही बेरोजगार युवाओं को भत्ता मिलना था। लेकिन, शनिवार को मुख्यमंत्री के हाथों से पहले से रोजगार प्राप्त और सालाना दो लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित करने वालों का भी चयन हो गया।
बहरहाल बेरोजगारी भत्ते की शुरुआत के साथ ही कई सवाल खड़े हो गए हैं। जो लोग सार्वजनिक जगहों पर दुकानदारी चला रहे हैं। उन्हें कम आय का प्रमाणपत्र कैसे जारी हो गया। यदि प्रमाणपत्र जारी नहीं हुआ तो बेरोजगारी भत्ते की पहली किस्त में विभाग ने उनका नाम किस आधार पर शामिल कर लिया।
बख्शे नहीं जाएंगे दोषी: कपूर
जिला रोजगार कार्यालय प्रभारी एसआर कपूर का कहना है कि हो सकता है जल्दबाजी में प्रमाणपत्र जांचने में गलती हुई हो। लेकिन, विभाग इस पूरे मामले की जांच करेगा और जो भी कर्मचारी इसके लिए दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने बेरोजगारी भत्ता प्राप्त करने वाले युवक को भी चेक लौटाने के आदेश जारी कर दिए हैं।