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कूड़ा शुल्क न घटाया तो अनशन करेंगे कारोबारी
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समाजसेवी रवि का एमसी को अल्टीमेटम, बोले, महापौर दफ्तर के बाहर देंगे धरना
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहर में सिर्फ जिम का कूड़ा शुल्क घटाने के नगर निगम के फैसले पर कारोबारियों ने सवाल उठाना शुरू कर दिए हैं। इनका कहा है कि कोरोना के चलते शहर में सिर्फ जिम ही बंद नहीं थे, बल्कि दुकानें भी बंद रही हैं।
ऐसे में मेयर सिर्फ जिम का शुल्क घटाने की बजाय कारोबारियों को राहत देने का भी फैसला ले। समाजसेवी एवं संजौली के कारोबारी रवि कुमार ने इस मामले पर अब मेयर कार्यालय के बाहर अनशन की चेतावनी दी है। इनका कहना है कि यदि एक हफ्ते के भीतर नगर निगम ने इस मामले पर कोई फैसला नहीं लिया तो वह कारोबारियों के साथ अगले हफ्ते मेयर कार्यालय के बाहर अनशन पर बैठ जाएंगे। कहा कि शहर में कारोबारियों के साथ धोखा हो रहा है। कोरोना काल के दौरान दुकानें बंद थी। इनसे कूड़ा नहीं उठा। इसके बावजूद नगर निगम पूरा शुल्क वसूल रहा है। होटल बंद रहने पर भी उनसे पूरा शुल्क लिया जा रहा है। यह गलत है। नगर निगम को जिम पर तो तरस आ रहा है, लेकिन कारोबारियों की परेशानी नहीं दिख रही।
समाजसेवी ने कारोबारियों की मांगें न उठाने को लेकर शिमला व्यापार मंडल पर भी सवाल उठाए हैं। इनका कहना है कि व्यापार मंडल के पदाधिकारी एवं पार्षद सदन में कारोबारियों को राहत नहीं दिला पा रहे हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहर में सिर्फ जिम का कूड़ा शुल्क घटाने के नगर निगम के फैसले पर कारोबारियों ने सवाल उठाना शुरू कर दिए हैं। इनका कहा है कि कोरोना के चलते शहर में सिर्फ जिम ही बंद नहीं थे, बल्कि दुकानें भी बंद रही हैं।
ऐसे में मेयर सिर्फ जिम का शुल्क घटाने की बजाय कारोबारियों को राहत देने का भी फैसला ले। समाजसेवी एवं संजौली के कारोबारी रवि कुमार ने इस मामले पर अब मेयर कार्यालय के बाहर अनशन की चेतावनी दी है। इनका कहना है कि यदि एक हफ्ते के भीतर नगर निगम ने इस मामले पर कोई फैसला नहीं लिया तो वह कारोबारियों के साथ अगले हफ्ते मेयर कार्यालय के बाहर अनशन पर बैठ जाएंगे। कहा कि शहर में कारोबारियों के साथ धोखा हो रहा है। कोरोना काल के दौरान दुकानें बंद थी। इनसे कूड़ा नहीं उठा। इसके बावजूद नगर निगम पूरा शुल्क वसूल रहा है। होटल बंद रहने पर भी उनसे पूरा शुल्क लिया जा रहा है। यह गलत है। नगर निगम को जिम पर तो तरस आ रहा है, लेकिन कारोबारियों की परेशानी नहीं दिख रही।
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समाजसेवी ने कारोबारियों की मांगें न उठाने को लेकर शिमला व्यापार मंडल पर भी सवाल उठाए हैं। इनका कहना है कि व्यापार मंडल के पदाधिकारी एवं पार्षद सदन में कारोबारियों को राहत नहीं दिला पा रहे हैं।
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