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सदन में बिजली बिल पर हंगामा
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पांच साल में तीसरी बार बदल गए मीटर
सर्विस वायर तक के लिए जा रहे हैं पैसे
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। नगर निगम सदन में बिजली बिलों पर भी बहस हुई। पार्षद दिवाकर देव शर्मा, सुनील धर, आनंद कौशल और जवविंद्र सिंह ने सवाल उठाए कि बिजली के नए मीटर लगने के बाद लोगों को भारी भरकम बिल आ रहे हैं। अचानक बिल इतने कैसे बढ़ गए, कहीं नए मीटरों में कोई खराबी तो नहीं है।
पार्षद दिवाकर देव ने कहा कि ऐसी नौबत क्या आ गई कि पांच साल में तीसरी बार मीटर लग रहे हैं। कहा कि कई लोगों से तो सर्विस वायर तक के पैसे लिए जा रहे हैं। नगर निगम के लगाए बिजली के पोल पर किसके कहने से टेलीकॉम कंपनियों की केबल डाली जा रही है। इस पर सदन में मौजूद बिजली बोर्ड के अधिशासी अभियंता तनुज गुप्ता ने जवाब दिया कि सरकार के निर्देश पर यह नए प्रीपेड मीटर लग रहे हैं।
यह आधुनिक सुविधाओं से लैस है और किसी इलाके में बिजली गुल होने पर बोर्ड को इसकी तुरंत जानकारी मिल जाएगी। कहा कि सर्विस वायर के पैसे नहीं लिए जा सकते। लोग इस बारे में शिकायत कर सकते हैं। कहा कि नए मीटर में कोई खराबी नहीं है। यदि पार्षदों को संदेह है तो चेक मीटर लगा सकते हैं। कहा कि सर्दी में बिजली खपत बढ़ने से भी आजकल बिल ज्यादा आ रहे हैं। कहा कि निगम बिजली पोल पर लगे केबल का टैक्स वसूल कर सकता है, इस बारे में निगम को पत्र लिखा है। पार्षदों ने फिक्स चार्ज पर सवाल उठाए तो अभियंता ने कहा कि नए मीटर लगने के बाद अप्रैल से यह शुल्क खत्म हो जाएंगे।
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भाजपा पार्षद ने की पानी फ्री करने की मांग
भाजपा पार्षद विवेक शर्मा ने बिजली की तर्ज पर घरेलू उपयोग के लिए इस्तेमाल होने वाला पानी भी निशुल्क करने की मांग सदन में उठाई। कहा कि सोमवार को होने वाली पेजयल कंपनी की सब कमेटी की बैठक में इस प्रस्ताव को ले जाया जाए। बाकी पार्षदों ने भी इस पर हामी तो भरी लेकिन लिखित प्रस्ताव न होने के चलते इस पर ज्यादा चर्चा नहीं हुई। आयुक्त आशीष कोहली ने कहा कि यह एक पार्षद का सुझाव था जिसे दर्ज किया है। सब कमेटी में इस पर चर्चा होना मुश्किल है।
निगम से पूछे बिना संपत्तियां नहीं बेच सकेंगी कंपनी
पार्षद दिवाकर देव शर्मा ने सवाल उठाए कि कंपनी बिना पूछे नगर निगम की संपत्तियां कैसे बेच सकती है। लाखों का कबाड़ निगम से बिना पूछे कैसे बेचा गया। इसकी रिपोर्ट दी जाए। सदन में प्रस्ताव पारित किया कि कंपनी अब नगर निगम से पूछे बिना कोई संपत्ति नहीं बेच सकेगी। सदन की मंजूरी लेना जरूरी होगा। गौरतलब है कि पेयजल कंपनी को ज्यादातर संपत्तियां नगर निगम से मिली हैं। सड़कों पर अतिक्रमण की निशानदेही करने के पार्षद राकेश चौहान के सवाल पर आयुक्त ने कहा कि इस बारे में लोनिवि को पत्र लिखा गया है।
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सर्विस वायर तक के लिए जा रहे हैं पैसे
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। नगर निगम सदन में बिजली बिलों पर भी बहस हुई। पार्षद दिवाकर देव शर्मा, सुनील धर, आनंद कौशल और जवविंद्र सिंह ने सवाल उठाए कि बिजली के नए मीटर लगने के बाद लोगों को भारी भरकम बिल आ रहे हैं। अचानक बिल इतने कैसे बढ़ गए, कहीं नए मीटरों में कोई खराबी तो नहीं है।
पार्षद दिवाकर देव ने कहा कि ऐसी नौबत क्या आ गई कि पांच साल में तीसरी बार मीटर लग रहे हैं। कहा कि कई लोगों से तो सर्विस वायर तक के पैसे लिए जा रहे हैं। नगर निगम के लगाए बिजली के पोल पर किसके कहने से टेलीकॉम कंपनियों की केबल डाली जा रही है। इस पर सदन में मौजूद बिजली बोर्ड के अधिशासी अभियंता तनुज गुप्ता ने जवाब दिया कि सरकार के निर्देश पर यह नए प्रीपेड मीटर लग रहे हैं।
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यह आधुनिक सुविधाओं से लैस है और किसी इलाके में बिजली गुल होने पर बोर्ड को इसकी तुरंत जानकारी मिल जाएगी। कहा कि सर्विस वायर के पैसे नहीं लिए जा सकते। लोग इस बारे में शिकायत कर सकते हैं। कहा कि नए मीटर में कोई खराबी नहीं है। यदि पार्षदों को संदेह है तो चेक मीटर लगा सकते हैं। कहा कि सर्दी में बिजली खपत बढ़ने से भी आजकल बिल ज्यादा आ रहे हैं। कहा कि निगम बिजली पोल पर लगे केबल का टैक्स वसूल कर सकता है, इस बारे में निगम को पत्र लिखा है। पार्षदों ने फिक्स चार्ज पर सवाल उठाए तो अभियंता ने कहा कि नए मीटर लगने के बाद अप्रैल से यह शुल्क खत्म हो जाएंगे।
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भाजपा पार्षद ने की पानी फ्री करने की मांग
भाजपा पार्षद विवेक शर्मा ने बिजली की तर्ज पर घरेलू उपयोग के लिए इस्तेमाल होने वाला पानी भी निशुल्क करने की मांग सदन में उठाई। कहा कि सोमवार को होने वाली पेजयल कंपनी की सब कमेटी की बैठक में इस प्रस्ताव को ले जाया जाए। बाकी पार्षदों ने भी इस पर हामी तो भरी लेकिन लिखित प्रस्ताव न होने के चलते इस पर ज्यादा चर्चा नहीं हुई। आयुक्त आशीष कोहली ने कहा कि यह एक पार्षद का सुझाव था जिसे दर्ज किया है। सब कमेटी में इस पर चर्चा होना मुश्किल है।
निगम से पूछे बिना संपत्तियां नहीं बेच सकेंगी कंपनी
पार्षद दिवाकर देव शर्मा ने सवाल उठाए कि कंपनी बिना पूछे नगर निगम की संपत्तियां कैसे बेच सकती है। लाखों का कबाड़ निगम से बिना पूछे कैसे बेचा गया। इसकी रिपोर्ट दी जाए। सदन में प्रस्ताव पारित किया कि कंपनी अब नगर निगम से पूछे बिना कोई संपत्ति नहीं बेच सकेगी। सदन की मंजूरी लेना जरूरी होगा। गौरतलब है कि पेयजल कंपनी को ज्यादातर संपत्तियां नगर निगम से मिली हैं। सड़कों पर अतिक्रमण की निशानदेही करने के पार्षद राकेश चौहान के सवाल पर आयुक्त ने कहा कि इस बारे में लोनिवि को पत्र लिखा गया है।