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सरकार-संगठन में घमासान, पांच और सचिव दे सकते हैं इस्तीफा

Tue, 27 Sep 2016 10:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Tue, 27 Sep 2016 10:25 AM IST
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Dispute in Congress and HP Govt, Five Secretaries send a Letter to Sukhu.

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू के सीएम वीरभद्र सिंह के निशाने पर आने से पार्टी में हलचल तेज हो गई है। सीएम के चुनाव क्षेत्र शिमला ग्रामीण से दो सचिवों के पद छोड़ने के बाद अब पीसीसी के पांच और सचिवों ने प्रदेश कांग्रेस से इस्तीफे की पेशकश की है।

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राज्य भर में पीसीसी सचिवों की संख्या करीब 60 है। प्रदेश कांग्र्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष नरेश चौहान ने बताया कि पांच सचिवों ने इस्तीफा देने की पेशकश की है। हालांकि, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने उन्हें समझाया है कि ऐसा करने की जरूरत नहीं है।  
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बता दें कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने पीसीसी सचिवों की नियुक्तियों की प्रणाली पर सवाल खड़े किए थे, जिसके बाद शिमला ग्रामीण के दो पीसीसी सचिवों कुसुम वर्मा और प्रदीप वर्मा ने अपने इस्तीफे दे दिए हैं। इन इस्तीफों पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी अभी विचार कर रही है कि इन्हें मंजूर किया जाए या नहीं। शिमला ग्रामीण से अब प्रदेश कांग्रेस के सचिव अनिल गोयल ही हैं। इससे पहले तीन सचिव थे।
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सीएम के नाम सचिवों का खुला पत्र चर्चा में
सीएम के नाम कुछ सचिवों का एक खुला पत्र भी चर्चा में है। यह पत्र कांग्रेस के आंतरिक सोशल मीडिया ग्रुप पर चल रहा है। सूत्रों ने बताया कि कुछ सचिवों की ओर से सीएम को संबोधित इस पत्र में लिखा है कि 60 सचिवों में से करीब 40 से अधिक सचिवों को वरिष्ठ नेताओं के कहने पर बनाया गया है। बड़ी संख्या में सचिवों का अच्छा जनाधार है। इसके अलावा और भी कई तीखी बातें कही गई हैं।

पीसीसी सचिवों का कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष को लिखा खुला पत्र

Dispute in Congress and HP Govt, Five Secretaries send a Letter to Sukhu.

हिमाचल सरकार और कांग्रेस पार्टी संगठन में घमासान छिड़ गया है। दो सचिवों के इस्तीफे के बाद तनातनी के बीच अब पांच पीसीसी सचिवों ने कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष के नाम खुला पत्र लिखकर सीएम का नाम लिए बगैर उनके पूर्व में आए बयान पर आपत्ति दर्ज की है।

पीसीसी सचिव मनजीत ठाकुर, अमिंद्र ठाकुर, रितेश कपरेट, महेश शर्मा और दीपक राठौर ने खुले पत्र में लिखा है कि वे उन्हें वरिष्ठ नेता की टिप्पणियों से गहरा आघात लगा है। वे अपने मन की पीड़ा बता रहे हैं। चाटुकारिता संगठन में नहीं, सत्ता में होती है। कार्यकर्ता ही नेता बनाती है।

हमने पंचायत, बीडीसी और जिला परिषद के चुनाव जीते हैं। इसलिए पीसीसी सचिव पंच का चुनाव नहीं जीत सकते, ऐसी टिप्पणी से वे आहत होकर ये पत्र लिखने के लिए मजबूर हैं। सरकार में बोर्ड-निगमों के 100 चेयरमैन-वाइस चेयरमैन हैं। उनमें से कितनों ने पंच का चुनाव लड़ा और जीता है। क्या वरिष्ठ नेताओं के पुत्रों को ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी में पद पाने का अधिकार है।

क्या आम कांग्रेस कार्यकर्ता पीसीसी सचिव नहीं बन सकता। वरिष्ठ नेताओं के वक्तव्यों से मिशन रिपीट को धक्का पहुंचेगा। ये खुला पत्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग ने सोमवार को प्रेस को जारी किया। पत्र में सचिवों ने लिखा है कि उनकी और राज्य सरकार के बोर्ड-निगमों के चेयरमैन-वाइस चेयरमैन की योग्यता देखी जाए तो उनसे वे योग्य हैं। दोनों ही मनोनीत हैं।

उन्हें पीसीसी सचिव बने तीन साल हो चुके हैं। वरिष्ठ नेताओं की ओर से आज इस मामले को सार्वजनिक मंचों पर क्यों उठाया जा रहा है। वरिष्ठ नेताओं को पार्टी प्लेटफॉर्म पर बात रखनी चाहिए। वरिष्ठ नेताओं का महत्वपूर्ण योगदान कांग्रेस को मजबूत करने में रहा है, लेकिन आम कांग्रेस कार्यकर्ता का भी कोई आत्मसम्मान है। वरिष्ठ नेता राजनीतिक मंचों से कार्यकर्ताओं के आत्मसम्मान को उछाल रहे हैं, जिससे वे आहत हैं।

अपनी जेब से खर्चा कर पार्टी का साथ दे रहे सचिव

Dispute in Congress and HP Govt, Five Secretaries send a Letter to Sukhu.

आम पार्टी कार्यकर्ता के खिलाफ तो सार्वजनिक बयानबाजी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई कर दी जाती है। वे बीस साल से पार्टी की सेवा कर रहे हैं। कभी पार्टी छोड़ने की धमकी नहीं दी, न कभी पार्टी छोड़ी। अपनी जेब से खर्च कर हमेशा पार्टी का साथ दिया है। जहां भी जिस भी ब्लॉक में ड्यूटी लगी, उन्होंने पार्टी को मजबूत ही किया है। वे बताना चाहते हैं कि हरियाणा-पंजाब में पीसीसी सचिवों की संख्या हिमाचल से ज्यादा है।

हिमाचल में तो सिर्फ 60 सचिव और 6 महासचिव हैं, जबकि पंजाब में 307 सचिव और 96 महासचिव हैं। हरियाणा में सचिवों की संख्या 150 है। सार्वजनिक मंचों से बयानबाजी करने पर पार्टी में हताशा फैलेगी। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव सरकार को दोबारा सत्ता में लाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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