निम्न जाति के कर्मी से भेदभाव, शिक्षक समेत स्कूली बच्चों ने नहीं खाए लड्डू
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आधुनिकता के इस दौर में भी लोग छुआछूत की दीवारों को नहीं मिटा पाए हैं। सरकारी स्कूल खुलने से स्वर्ण और निम्न जाति के बच्चे एक ही स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, लेकिन भेदभाव अभी भी नहीं मिटा। हिमाचल सिरमौर जिले की एक राजकीय प्राथमिक पाठशाला में ऐसा ही मामला सामने आया है।
स्कूल के बच्चों ने निम्न जाति के कर्मचारी के हाथ से कथित तौर पर लड्डू खाने से इनकार कर दिया। उन्हें पूछा गया तो बताया कि परिजनों ने उन्हें कर्मी के हाथ से खाने को मना किया है। स्कूल की मुख्य अध्यापिका रजनी ने इस संदर्भ में थाना राजगढ़ में शिकायत दर्ज करवाई है।
इसके बाद पुलिस ने अनुसूचित जाति एवं जनजाति अधिनियम की धारा 3 (1) के तहत मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है। उक्त प्राइमरी स्कूल में एक व्यक्ति ने मिड-डे मील में नियुक्ति होने पर स्कूल में लड्डू बांटे, लेकिन बच्चों ने लड्डू खाने से इनकार कर दिया।
शिक्षक और कर्मचारी ने भी नहीं खाए लड्डू
पुलिस को दिए बयान में मुख्य अध्यापिका ने कहा कि जब बच्चों से पूछा गया कि उन्होंने लड्डू क्यों नहीं खाए तो उन्होंने बताया कि उनके परिजनों ने ऐसा करने के लिए कहा है। मुख्य अध्यापिका ने यह भी आरोप लगाया कि सामान्य वर्ग से ही संबंधित एक शिक्षक और मिड-डे मील कर्मचारी ने भी उस व्यक्ति के हाथ से बना खाना, चाय और पानी पीने से मना कर दिया।
उधर, डीएसपी राजगढ़ योगेश रोल्टा ने सोमवार को स्वयं स्कूल का दौरा किया। कहा कि मामले की छानबीन की जा रही है। स्कूल का रिकॉर्ड कब्जे में ले लिया है। खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी चेतराम शर्मा ने बताया कि मुख्य अध्यापिका ने 14 सितंबर को यह मामला उनके संज्ञान में लाया। 15 सितंबर को उन्होंने स्कूल का दौरा किया, लेकिन इसी दिन मुख्य अध्यापिका ने पुलिस में शिकायत की।