केंद्रीय बजट से लघु उद्योग जगत में निराशा, पूरी नहीं हुई उम्मीदें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल के केंद्रीय बजट में प्रदेश के उद्योग जगत में निराशा का माहौल है। खासतौर पर मध्यम सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों (एमएसएमई) के लिए यह बजट कुछ खास नहीं रहा है। हालांकि, उद्योगपतियों ने टैक्स स्लैब में दी गई छूट और इंफ्रास्ट्रक्चर पर दिए गए जोर का व्यापक तौर पर स्वागत किया गया है। लेकिन, एमएसएमई उद्योगों के हाथ कुछ न लगने से उत्पादन में वृद्धि न होने की दृष्टि से बजट निराशाजनक माना जा रहा है। उद्योगों को मिली छूट से राहत तो अवश्य होगी, लेकिन जो उम्मीदें उद्योगपति लगाए बैठे थे, वह इस बजट में पूर्ण न होने से उनमें मायूसी भी छाई हुई है।
उद्योग जगत के लिए लंबी समयावधि की योजना : अग्रवाल
सीआईआई हिमाचल चैप्टर के चेयरमैन हरीश अग्रवाल ने कहा कि उद्योग जगत के लिए बजट में लंबे समयावधि की योजना है, जिसके परिणाम अभी तो नहीं आएंगे, लेकिन भविष्य में इसका असर होगा। उन्होंने कहा कि आयकर में छूट और डिबेडेंट टैक्स में छूट बेशक दी गई है। डिबेडेंट टैक्स बंद होने से मिडल इनकम वाले समूह के लोगों को अवश्य लाभ मिलेगा।
सीजीटीएमएस में छूट देगी राहत : कंसल
लघु उद्योग भारती के प्रदेशाध्यक्ष राजीव कंसल ने कहा कि एक करोड़ तक के ऑडिट की सीमा अब 5 करोड़ करने और सीजीटीएमएस में 1 करोड़ की छूट एक वर्ष के लिए और देने से उद्योगों को राहत होगी। टैक्स स्लैब में कमी और निर्यात पर 100 फीसदी टैक्स माफ करना भी उद्योग जगत के लिए हितकर है।
उम्मीदों के अनुरूप नहीं है बजट : अग्रवाल
बीबीएनआईए के पूर्व अध्यक्ष शैलेश अग्रवाल ने कहा कि यह बजट उम्मीदों के अनुरूप नहीं है और खास तौर पर एमएसएमई के हाथों कुछ नहीं आया है। जीएसटी में कोई कटौती नहीं की गई है, अलबत्ता इंफ्रास्ट्रक्चर पर अवश्य जोर दिया गया है, जिससे इकोनॉमी मेें सुधार अवश्य होगा, लेकिन उद्योगों के हित में यह बजट 10 में से 7 अंकों वाला है।
पार्टनरशिप और प्रोपराइटर वाले उद्योगों को नहीं मिली छूट : गुप्ता
हिमाचल दवा निर्माता संघ के प्रदेशाध्यक्ष डॉ.राजेश गुप्ता ने कहा कि बजट में उद्योगों को अच्छा वातावरण देने का प्रयास किया गया है, लेकिन एसएसएमई के तहत कुछ खास नहीं मिला है। पार्टनरशिप और प्रोपराइटर कंपनियों को छूट न मिलने से निराशा है। टैक्स में छूट देने का बजट में प्रयास सराहनीय है।