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सर्वे रिपोर्ट में खुलासा, कैसे एसटी दर्जे से बाहर की गई ये पंचायत

Tue, 13 Dec 2016 10:09 AM IST
वेद प्रकाश ठाकुर/अमर उजाला, दीदग (सिरमौर)
वेद प्रकाश ठाकुर/अमर उजाला, दीदग (सिरमौर) Updated Tue, 13 Dec 2016 10:09 AM IST
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Didag Panchayat of Sirmaur.

सिरमौर जिला मुख्यालय से लगभग 114 किलोमीटर दूर एक पहाड़ी पर बसी है दीदग पंचायत। जनजातीय अध्ययन संस्थान की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार लगभग 1700 की आबादी वाली यह पंचायत एसटी दर्जे की फेहरिस्त से बाहर है, जबकि इसके पूर्व की छोगटाली, पश्चिम की भुईरा, उत्तर की दाहन और दक्षिण की लानाचेता को एसटी दर्जे में शामिल करने की जनजातीय अध्ययन संस्थान ने सिफारिश की है।

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प्रदेश विश्वविद्यालय के जनजातीय अध्ययन संस्थान की इस सर्वे रिपोर्ट से गिरिपार के लोग हैरान हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इर्द-गिर्द की पंचायतें एसटी दर्जे की हकदार हों और मध्य की नहीं, यह कैसे संभव हो सकता है? दीदग की भांति सर्वे रिपोर्ट से बाहर हुईं 19 में से अधिकतर पंचायतों की स्थिति करीब करीब ऐसी ही है। इन पंचायतों का आर्थिक एवं सामाजिक ताना-बाना समरूप है।
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बोली, संस्कृति, मेले और भौगोलिक स्थिति भी एक जैसी ही है। एक भाई दीदग में रहता है तो दूसरा लानाचेता में, लेकिन सर्वे रिपोर्ट के अनुसार दोनों में से लानाचेता निवासी ही एसटी दर्जे की दौड़ में हैं। हालांकि, प्रदेश सरकार ने दरियादिली दिखाते हुए इस सिफारिश को दरकिनार कर समूचे गिरिपार क्षेत्र की 127 पंचायतों को जनतातीय क्षेत्र घोषित करने की संस्तुति की है, लेकिन सर्वे रिपोर्ट में 19 पंचायतों के नाम नहीं होने से लोग असमंजस में हैं।
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अगर केंद्र ने गिरिपार को जनजातीय घोषित किया तो उक्त 19 पंचायतें उसमें शामिल होंगी या नहीं, इसे लेकर संबंधित क्षेत्रों के ग्रामीण चिंतित हैं। लोगों का कहना है कि इस रिपोर्ट की जांच की तो कई हैरान कर देने वाले पहलू सामने आए। एक समय दीदग पंचायत का हिस्सा रही भुईरा और छोगटाली को तो शामिल किया, लेकिन जनक पंचायत दीदग को बाहर कर दिया।

दीदग पंचायत के रामानंद सनियों गांव में रहते हैं, जबकि उनका बड़ा भाई जगमोहन लानाचेता पंचायत के गुसाण में रहता है। इसी गांव के दो भाई रामलाल और भरतभूषण तो सनियों में रहते हैं, जबकि इनके दो भाई रामगोपाल और अर्जुन गुसाण में रहते हैं। भाणत पंचायत की स्थिति भी ऐसी ही है। इन लोगों का कहना है कि 19 पंचायतों के लोगों के साथ नाइंसाफी की गई है।

हाटी समिति राजगढ़ के अध्यक्ष जय प्रकाश चौहान का कहना है कि 19 पंचायतों को जिन तथ्यों से बाहर रखा गया है, वह हास्यास्पद है। एक ही परिवार के कुछ लोग ली गई पंचायतों में आते हैं और कुछ बाहर की गई पंचायतों में। ऐसे में यदि इसी रिपोर्ट को आधार मानकर दर्जा मिला तो एक ही परिवार के कुछ लोग एसटी हो जाएंगे और कुछ नहीं। समिति के मुख्य सलाहकार चंद्रमोहन ठाकुर का आरोप है कि राजगढ़ की 19 पंचायतों को अलग रखना एक सोची-समझी साजिश है।

गिरिपार की सभी 127 पंचायतों की समान संस्कृति, रहन-सहन, खानपान और धार्मिक मान्यताएं हैं। ऐसे में समूचे क्षेत्र को जनजातीय घोषित किया जाना चाहिए। दीदग पंचायत के पूर्व उपप्रधान रघुनाथ सिंह का कहना है कि फिलहाल मामला मुख्यमंत्री और राज्यपाल के समक्ष रखा गया है। यदि न्याय नहीं मिला तो मामले को अदालत में भी ले जाने पर यहां के लोग मजबूर होंगे।

यह पंचायतें एसटी दर्जे की दावेदार
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के जनजातीय अध्ययन संस्थान ने गिरिपार क्षेत्र के सर्वे का कार्य किया। जो रिपोर्ट प्रदेश सरकार को सौंपी, उसमें से राजगढ़ की 11 पंचायतों छोगटाली, दाहन, भुईरा, हाब्बन, शाया सनौरा, जदोल टपरोली, कोटी पधोग, देवठी मझगांव, डिब्बर, माटल बखोग और टालीभुज्जल की संस्कृति, भाषा, रहन-सहन, खानपान, परंपराएं और धार्मिक मान्यताओं उत्तराखंड के जोनसार बावर से मिलता-जुलता बताते हुए एसटी दर्जे में शामिल करने की संस्तुति की गई।  


एसटी के दावे से ये पंचायतें आउट
उपमंडल की 19 पंचायतों दीदग, नेहरपाब, शलाना, ठौडनिवाड, डिंबर, काथली भरण, सैर जगास, करगाणू, शिलांजी, थैना बसोतरी, नेई नेटी, राणाघाट, बोहल टालिया, भाणत, नेरी कोटली, नेरटी भगोट, कोटला बांगी, कोठिया जाजर और टिक्कर को इससे भिन्न बताते हुए एसटी दर्जे से आउट किया गया। अब लोग इन पंचायतों को भी एसटी दर्जे की दौड़ में शामिल करने की मांग कर रहे हैं।

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