फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Dharmeshvar Mahadev or Dharamraj and Chitragupt story Chaurashi Temple in Chamba Himachal Pradesh

यहां लगती है धर्मराज की कचहरी, कर्मोँ का होता है पूरा हिसाब

Tue, 16 Aug 2016 09:58 AM IST
रंजीत शर्मा/अमर उजाला, भरमौर (चंबा)
रंजीत शर्मा/अमर उजाला, भरमौर (चंबा) Updated Tue, 16 Aug 2016 09:58 AM IST
विज्ञापन
Dharmeshvar Mahadev or Dharamraj and Chitragupt story Chaurashi Temple in Chamba Himachal Pradesh
भरमौर में धर्मराज का मंदिर।

अकसर लोग धर्मराज के बारे में सुनते हैं। लेकिन, भरमौर में साक्षात धर्मराज विराजमान हैं। मान्यता है कि यहां उनकी कचहरी लगती है और जीव आत्माओं के कर्मोँ का पूरा हिसाब होता है। जी हां, बताया जाता है कि भरमौर क्षेत्र में स्थापित धर्म राज के इस मंदिर को विश्व में इकलौता होने का भी गौरव हासिल है।

विज्ञापन


मणिमहेश यात्रा में शामिल होने के लिए देश के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालु इस पवित्र मंदिर के दर्शन करते हैं। कई सिद्ध पुरुष इस बात का दावा भी कर चुके हैं कि उन्होंने धर्मराज की कचहरी में होने वाले सवाल-जवाब खुद सुने हैं। हालांकि इसके फिलहाल प्रत्यक्ष प्रमाण मौजूद नहीं हैं।
विज्ञापन


चौरासी परिसर में बने इस मंदिर के ठीक सामने चित्रगुप्त का आसन बनाया गया है। जबकि मंदिर से पहले सीढ़ियां और एक गुप्त यंत्र स्थापित है। बताया जाता है कि इसी गुप्त यंत्र से धर्मराज सबके जीवन का हिसाब लेते हैं। साथ ही मंदिर के बगल में ढाई सीढ़ियां लगी हैं जिन्हें स्वर्ग के दरवाजे के रूप में भी देखा जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

इस तरह हुई मंदिर की खोज

Dharmeshvar Mahadev or Dharamraj and Chitragupt story Chaurashi Temple in Chamba Himachal Pradesh
भरमौर में चित्रगुप्त का आसन

ऐसा माना जाता है कि भरमौर में चौरासी मंदिर परिसर दसवीं शताब्दी से भी पहले का बना है। यहां अलग-अलग देवताओं की शरण स्थली है। चौरासी में धर्मराज मंदिर वाली जगह स्थापित टेढ़ा शिवलिंग था।

यहां महाराज कृष्ण गिरि ने 1950 के बाद अपना आसन लगाया था। बताया जाता है कि उस समय महात्मा के साथ मिलकर कुछ लोगों ने शिवलिंग का सीधा करने की कोशिश की। लेकिन अंतहीन खुदाई की वजह से उन्हें काम रोकना पड़ा।

क्या कहते हैं पुजारी

Dharmeshvar Mahadev or Dharamraj and Chitragupt story Chaurashi Temple in Chamba Himachal Pradesh
भरमौर में धर्मराज का मंदिर।

इसके बाद महाराज कृष्ण गिरि ने कई महीनों तक मंदिर के बाहर साधना की और उन्हें इस बात का आभास हुआ कि यहां धर्मराज की कचहरी लगती है। महाराज कृष्ण गिरि का 1962 में देहांत हो चुका है और उनकी समाधि धर्मराज मंदिर के साथ ही बनी है। धर्मराज मंदिर के पुजारी पंडित लक्ष्मण दत्त शर्मा का कहना है कि उनके पूर्वज मंदिर में पूजा-अर्चना करते आए हैं।

उन्होंने इस बात का खुलासा किया था कि मंदिर परिसर में कई बार ऐसी ध्वनियां सुनाई देती हैं जैसे कोर्ट में बहस हो रही हो। उन्होंने कहा कि चित्रगुप्त सभी के कर्मों का हिसाब रखते हैं और मृत्यु के बाद दूसरी दुनिया का मार्ग धर्मराज की सीढ़ियों से होकर ही जाता है।

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed