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हिमाचल: लाखों की आय, 13 करोड़ रुपये की जमीन खरीद; विजिलेंस रिकॉर्ड आयकर विभाग और ED को भेजने की तैयारी में

Wed, 23 Sep 2026 10:16 AM IST
Ankesh Dogra संजीव शर्मा, धर्मशाला।
संजीव शर्मा, धर्मशाला। Published by: Ankesh Dogra Updated Wed, 23 Sep 2026 10:16 AM IST
सार

रक्कड़ निवासी नेक राम और उनके परिवार के नाम करीब 13 करोड़ रुपये की जमीन खरीद का मामला अब केंद्रीय एजेंसियों तक पहुंच सकता है। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (विजिलेंस) की जांच में वर्ष 2011 से 2025 के बीच धर्मशाला और पालमपुर तहसील के विभिन्न क्षेत्रों में खरीदी गई जमीन का रिकॉर्ड खंगाला गया है। पढ़ें पूरी खबर...

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dharamshala 13 crore land purchase vigilance ed income tax records
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : AI

विस्तार

रक्कड़ निवासी नेक राम और उनके परिवार के नाम करीब 13 करोड़ रुपये की जमीन खरीद का मामला अब केंद्रीय एजेंसियों तक पहुंचेगा। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (विजिलेंस) की जांच में जमीन खरीद और परिवार की घोषित आय के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। जांच में बैंक खातों और आयकर रिटर्न की पड़ताल के बाद जमीन खरीद में इस्तेमाल रकम के स्रोत पर सवाल उठाए गए हैं। विजिलेंस अब मामले से संबंधित रिकॉर्ड आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को भेजने की तैयारी कर रहा है।

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विजिलेंस ने वर्ष 2011 से 2025 के बीच नेक राम, उनकी पत्नी और मां के नाम धर्मशाला और पालमपुर तहसील के विभिन्न क्षेत्रों में खरीदी गई जमीन का ब्योरा खंगाला है। जांच रिपोर्ट में इन संपत्तियों का मूल्य करीब 13 करोड़ रुपये बताया गया है। जांच का मुख्य बिंदु यह है कि परिवार की घोषित आय और उपलब्ध बैंक लेनदेन इतनी बड़ी संपत्ति खरीद के अनुरूप दिखाई नहीं देते। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2011-12 में नेक राम की वार्षिक आय 2.08 लाख रुपये थी। वर्ष 2012-13 में आय 2.69 लाख और 2013-14 में 3.93 लाख रुपये दर्शाई गई। बावजूद वर्ष 2011 में 48.50 लाख रुपये और वर्ष 2013 में 23.95 लाख रुपये की जमीन खरीद किए जाने का रिकॉर्ड जांच में सामने आया है।
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विजिलेंस सूत्रों के अनुसार जांच में वर्ष 2025-26 की आयकर विवरणी को भी देखा गया। इसमें नेक राम ने 12.04 लाख रुपये की आय दर्शाई, जबकि इसी अवधि में उनके, उनकी पत्नी और मां के नाम 48.44 लाख रुपये की जमीन खरीद दर्ज मिली। विजिलेंस ने परिवार के बैंक खातों की भी जांच की। रिपोर्ट के अनुसार एक खाते में जनवरी 2013 में करीब एक लाख रुपये थे, जो अप्रैल 2022 में घटकर 17 रुपये रह गए। दूसरे खाते में अगस्त 2013 में पांच हजार रुपये की राशि थी, जबकि फरवरी 2025 में इसमें 2.62 लाख रुपये पाए गए। 

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किसी और से तो नहीं मिली रकम, जांच जारी
विजिलेंस की जांच में इस आशंका की भी पड़ताल की जा रही है कि जमीन खरीद के लिए किसी अन्य व्यक्ति या व्यक्तियों की ओर से धन उपलब्ध कराया गया हो। आगे की जांच में जमीन की खरीद में इस्तेमाल रकम के स्रोत, बैंक लेनदेन, आयकर विवरणियों और परिवार के सदस्यों के बीच हुए वित्तीय लेनदेन को खंगाला जाएगा। जांच से जुड़े रिकॉर्ड के आधार पर इसी वित्तीय पहलू को लेकर मामला आयकर विभाग और ईडी को भेजने की कार्रवाई प्रस्तावित है।

सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में हेराफेरी का भी आरोप
मामले में केवल जमीन खरीद की वित्तीय जांच ही नहीं बल्कि सरकारी जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में कथित हेराफेरी का आरोप भी एफआईआर में दर्ज है। विजिलेंस की एफआईआर के अनुसार सरकारी जमीन से संबंधित रिकॉर्ड में गलत म्यूटेशन दर्ज करने और सरकारी भूमि पर मंगला देवी का नाम ‘कबिजान गैर-मरूसी’ के रूप में दर्ज करने से राज्य के राजस्व को नुकसान पहुंचाने का आरोप है। एफआईआर में इस मामले में तत्कालीन तहसीलदार धर्मशाला अमर सिंह, तत्कालीन कानूनगो वीरेंद्र कुमार, तत्कालीन पटवारी मनीष कुमार, नेक राम, उनकी पत्नी किरण बाला, मंगला देवी समेत आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है। विजिलेंस ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति या अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उसे भी आरोपी बनाया जा सकता है।
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